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Rani Kapur: संजय कपूर परिवार विवाद में सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, ‘मध्यस्थता सफल नहीं हुई तो केस आगे बढ़ेगा’

Rani Kapur, दिवंगत उद्योगपति संजय (संजय/सुनजय) कपूर के परिवार से जुड़े बहुचर्चित फैमिली ट्रस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।

Rani Kapur : मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, संजय कपूर ट्रस्ट विवाद में क्या होगा अगला कदम?

Rani Kapur, दिवंगत उद्योगपति संजय (संजय/सुनजय) कपूर के परिवार से जुड़े बहुचर्चित फैमिली ट्रस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि वह फिलहाल मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया से संतुष्ट है और उम्मीद करती है कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकाल लेंगे। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मध्यस्थता सफल नहीं होती है, तो मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति और आरके फैमिली ट्रस्ट (RK Family Trust) के नियंत्रण को लेकर है। विवाद मुख्य रूप से उनकी मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया कपूर के बीच चल रहा है। दोनों पक्ष ट्रस्ट के संचालन और संपत्तियों पर अपने-अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की शुरुआती रिपोर्ट को “सकारात्मक” और “संतोषजनक” बताया। अदालत ने कहा कि यदि पक्षकार आपसी सहमति से समाधान निकाल लेते हैं तो लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सकता है।साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो अदालत मामले की नियमित सुनवाई कर कानूनी आधार पर फैसला करेगी।

पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ कर रहे हैं मध्यस्थता

इस हाई-प्रोफाइल विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। अदालत ने दोनों पक्षों से खुले मन से बातचीत करने और सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की भी सलाह दी थी।

नवंबर तक का समय

ताजा सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अदालत अब नवंबर 2026 में मध्यस्थ की नई रिपोर्ट का इंतजार करेगी। यदि तब तक समझौता हो जाता है तो विवाद अदालत के बाहर ही सुलझ सकता है।

पहले भी कोर्ट ने दी थी समझौते की सलाह

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह मामला लंबे समय तक चल सकता है, इसलिए अदालत की बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालना सभी पक्षों के हित में होगा। कोर्ट ने इसे पारिवारिक विवाद बताते हुए आपसी सहमति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया था।

विवाद क्यों बना चर्चा का विषय?

संजय कपूर के निधन के बाद उनकी बड़ी कारोबारी विरासत और फैमिली ट्रस्ट के नियंत्रण को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई। यह मामला कारोबारी जगत के साथ-साथ कानूनी हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें बड़ी संपत्ति और ट्रस्ट के प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं।

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दोनों पक्षों की दलीलें

रानी कपूर का कहना है कि ट्रस्ट के संचालन और उससे जुड़े कुछ फैसलों पर उन्हें गंभीर आपत्तियां हैं। दूसरी ओर प्रिया कपूर अपने पक्ष में कानूनी दावे पेश कर रही हैं। इन दावों की वैधता पर अंतिम निर्णय अभी अदालत द्वारा नहीं दिया गया है और मामला विचाराधीन है।

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आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर नवंबर में आने वाली मध्यस्थ की अगली रिपोर्ट पर रहेगी। यदि रिपोर्ट में सहमति बनने की पुष्टि होती है तो मामला आपसी समझौते से समाप्त हो सकता है। लेकिन यदि बातचीत विफल रहती है, तो सुप्रीम कोर्ट नियमित सुनवाई शुरू कर साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर फैसला करेगा। संजय कपूर फैमिली ट्रस्ट विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मध्यस्थता प्रक्रिया पर भरोसा जताया है। अदालत ने सकारात्मक प्रगति का स्वागत करते हुए पक्षकारों को बातचीत जारी रखने का अवसर दिया है। साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि यदि मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो न्यायालय मामले की विस्तृत सुनवाई कर कानून के अनुसार अंतिम फैसला सुनाएगा।

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