Delhi Coal Scam: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन! कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई से अलग किए गए दो जज
Delhi Coal Scam, कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को एक अहम फैसला लिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध पर शीर्ष अदालत ने कोयला घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे दो विशेष न्यायाधीशों को उनके मौजूदा पद से हटाने की अनुमति दे दी है।
Delhi Coal Scam : कोयला घोटाला मामलों में बड़ा बदलाव, दिल्ली HC की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने हटाए दो जज
Delhi Coal Scam, कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को एक अहम फैसला लिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध पर शीर्ष अदालत ने कोयला घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे दो विशेष न्यायाधीशों को उनके मौजूदा पद से हटाने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन मामलों की सुनवाई के लिए नए विशेष न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाएगी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों न्यायाधीशों को हाल के वर्षों में ही कोयला घोटाला मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने किसके अनुरोध पर लिया फैसला?
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से विशेष न्यायाधीश सुनेना शर्मा और धीरज मोर को कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई से हटाने का अनुरोध किया था। दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया कि दोनों न्यायिक अधिकारी कुछ अन्य जिम्मेदारियों के लिए ज्यादा उपयुक्त हैं। हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को उत्कृष्ट योग्यता वाला बताया और कहा कि उनकी सेवाओं का इस्तेमाल न्यायपालिका में अन्य जिम्मेदारियों के लिए किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए दोनों न्यायाधीशों को विशेष कोयला घोटाला अदालतों से स्थानांतरित करने की अनुमति दी।
छह महीने पहले ही हुई थी सुनेना शर्मा की नियुक्ति
इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह है कि जज सुनेना शर्मा ने करीब छह महीने पहले ही कोयला घोटाला मामलों की विशेष अदालत का कार्यभार संभाला था। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध को मंजूरी देते हुए उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया था। उनसे पहले जज संजय बंसल करीब साढ़े चार साल तक विशेष कोयला घोटाला अदालत की अध्यक्षता कर चुके थे। ऐसे में सुनेना शर्मा की अपेक्षाकृत कम अवधि के बाद नई जिम्मेदारी के लिए स्थानांतरण को न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में उनके खिलाफ किसी तरह की प्रतिकूल टिप्पणी या अनुशासनात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है।
धीरज मोर ने भी संभाली थी विशेष जिम्मेदारी
दूसरे न्यायाधीश धीरज मोर को अप्रैल 2025 में विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्होंने कोयला घोटाले से जुड़े सीबीआई मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी संभाली थी। इस तरह ताजा बदलाव के समय उन्हें इस पद पर करीब एक साल से कुछ अधिक समय हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों की योग्यता को देखते हुए उन्हें दूसरी न्यायिक जिम्मेदारियों में इस्तेमाल करने की इच्छा जताई। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है।
अब कौन करेगा कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनेना शर्मा और धीरज मोर की जगह वीरेंद्र कुमार खर्ता और अजय गर्ग को नियुक्त करने की मंजूरी दी है। वीरेंद्र कुमार खर्ता इससे पहले साकेत स्थित एनडीपीएस अदालत में विशेष न्यायाधीश के तौर पर काम कर रहे थे। वहीं अजय गर्ग तिस हजारी स्थित फास्ट-ट्रैक अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के पद पर थे। नई व्यवस्था के तहत वीरेंद्र कुमार खर्ता सुनेना शर्मा की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि अजय गर्ग धीरज मोर की जगह कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई करेंगे। इससे इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
दोनों जजों को तत्काल नई न्यायिक पोस्टिंग नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेश में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सुनेना शर्मा और धीरज मोर को फिलहाल कोई नई न्यायिक पोस्टिंग नहीं दी गई है। दोनों अधिकारियों को प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज (सीबीआई) के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन मामलों में दोनों न्यायाधीशों ने अपना फैसला या आदेश सुरक्षित रखा है, उनमें उन्हें लंबित आदेशों की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। जिन मामलों में फैसला सुनाने की तारीख पहले से निर्धारित है, उन्हें निर्धारित तारीख पर या अधिकतम दो से तीन सप्ताह के भीतर सुनाया जाना है। संबंधित तारीखों को पुराने और नए दोनों न्यायालयों की कॉज लिस्ट तथा अदालत की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा।
कोयला घोटाला मामलों का क्या है महत्व?
कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों की जांच लंबे समय से केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की निगरानी में चलती रही है। इन मामलों में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और कोयला ब्लॉकों के आवंटन से जुड़े आरोपों की जांच और सुनवाई हुई है। कोयला घोटाला मामलों की विशेष अदालतें लंबे समय से इन मामलों की सुनवाई कर रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले साल दो विशेष कोयला घोटाला अदालतों के सामने 29 सीबीआई भ्रष्टाचार के मामले लंबित थे, जबकि 27 से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका था। ऐसे में न्यायाधीशों में बदलाव के बावजूद लंबित मामलों की सुनवाई और समयबद्ध निपटारे पर विशेष नजर रहेगी।
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क्या जजों को हटाना किसी विवाद से जुड़ा है?
इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दोनों न्यायाधीशों को कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई से हटाए जाने को किसी आरोप, दोष या अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने अनुरोध में दोनों अधिकारियों को “outstanding merit” यानी उत्कृष्ट योग्यता वाला बताया है और कहा है कि वे अन्य जिम्मेदारियों के लिए अधिक उपयुक्त हैं।इसलिए यह बदलाव मुख्य रूप से न्यायिक प्रशासन और अधिकारियों की सेवाओं को दूसरी जिम्मेदारियों में इस्तेमाल करने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी है।
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आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर नए विशेष न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने और लंबित कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई पर होगी। पुराने न्यायाधीशों द्वारा सुरक्षित किए गए फैसलों को निर्धारित समयसीमा में सुनाने का निर्देश भी दिया गया है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। कुल मिलाकर, दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कोयला घोटाला मामलों की न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव है। नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद लंबित मामलों की सुनवाई किस गति से आगे बढ़ती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।
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