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पीएम मोदी करेंगे देश के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन आज, इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है अटल सेतु : Atal setu

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश के सबसे लंबे पुल अटल सेतु का लोकार्पण करेंगे। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर इसका नाम अटल सेतु रखा गया है और यह ब्रिज मुंबई से नवी मुंबई को आपस में जोड़ेगा जिससे दो घंटे के सफर को लगभग 15 मिनट में पूरा कर सकता है।

Atal setu : समुद्री ब्रिज ‘सेवरी-न्हावा शेवा अटल सेतु’ 15 मिनट में 2 घंटे का सफर करती तय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश के सबसे लंबे पुल अटल सेतु का लोकार्पण करेंगे। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर इसका नाम अटल सेतु रखा गया है और यह ब्रिज मुंबई से नवी मुंबई को आपस में जोड़ेगा जिससे दो घंटे के सफर को लगभग 15 मिनट में पूरा कर सकता है।

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देश के सबसे लंबे पुल की खासियत –

यह अटल ब्रिज देश का सबसे लंबा समुद्री ब्रिज होगा, जिसकी लंबाई 21.8 किलो मीटर तक की है, इस पुल का 16.5 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के ऊपर और 5.5 किलो मीटर तक  हिस्सा जमीन के ऊपर भी बना हुआ है वैसे ये 6 लेन वाला रोड ब्रिज होते है। यह नायाब ब्रिज मुंबई से नवी मुंबई को आपस में जोड़ता है जिससे दो घंटे के सफर को लगभग 15 मिनट में पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही पुणे, गोवा और दक्षिण भारत का सफर भी कम समय में पूरा हो सकता है। इस पुल को बनाते हुए सुरक्षा को भी ध्यान रखा गया है जिसके बाद ही इस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले 190 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इस समय दुनिया का 12वां सबसे लंबा समुद्र पर बना पुल भी है, जो 17 हजार 840 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुआ है।

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‘सेवरी-न्हावा शेवा अटल सेतु’ और क्या -क्या है –

सिक्स लेन वाले इस ब्रिज पर रोजाना 70 हजार से अधिक गाड़ियों का ट्रैफिक चल सकता है। पुल पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे फर्राटा रफ्तार से गाड़ियां दौड़ेंगी, जिससे घंटों का सफर मिनटों में तय होगा।

इस पुल की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसमें एफिल टावर की तुलना में 17 गुना अधिक स्टील लगाया गया है और कोलकाता के हावड़ा ब्रिज से चार गुना अधिक स्टील का इस्तेमाल किया गया है।

इस पुल के निर्माण में जो कंक्रीट इस्तेमाल किया गया है, वह अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी छह गुना ज्यादा है।

इस अटल पुल के निर्माण में लगभग 177,903 मीट्रिक टन स्टील और 504,253 मीट्रिक टन सीमेंट का उपयोग किया जा चुका है।

अटल सेतु इतना मजबूत है कि इस पर भूकंप, उच्च ज्वार और तेज हवाओं के दबाव का असर नहीं होगा।

इस पुल का निर्माण एपॉक्सी-स्ट्रैंड्स वाले विशेष मैटेरियल से किया गया है, जिनका उपयोग परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए किया जाता है।

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