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जाने आखिर क्यों की जाती है शिवलिंग की आधी परिक्रमा और क्यों नहीं लांघी जाती शिवलिंग की जलाधारी

जाने शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण


परिक्रमा करने का चलन सिर्फ हिन्दू धर्म में नहीं बल्कि यह चलन कई धर्मो में है। मान्यताओं के अनुसार परिक्रमा करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। अगर आप शास्त्रों की माने तो शास्त्रों में कहा गया है कि “यानि कानी च पापानी ज्ञाता ज्ञात क्रतानि च, तानी सर्वाणी नश्यंति प्रदक्षिणे पदे पदे” यानी की परिक्रमा करते हुए एक एक कदम चलने से ज्ञात अज्ञात अनेकों पापों का नाश हो जाता है। शायद आपने कभी ध्यान दिया हो कि अक्सर सभी देवी देवताओं और मंदिरों की पूरी परिक्रमा की जाती है लेकिन शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही की जाती है।

अगर हम शिव की बात करें, तो शिव आदि देव है शिव को मूर्ति और शिवलिंग दोनों ही तरीकों से पूजा जाता है। लेकिन शिवलिंग पूजा के नियम कुछ अलग है। इस पूजा में कुछ मर्यादाएं भी निहित है। आपको बता दें कि शिवलिंग की आधी परिक्रमा को शास्त्र संवत माना गया है। इससे चंद्राकार परिक्रमा कहा जाता है। क्या आपको पता है परिक्रमा के दौरान जलाधारी को लांघना मना होता है अगर नहीं तो चलिए जानते है इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण।

शिवलिंग

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शिवलिंग को शिव और शक्ति की सम्मिलित ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है

आपको बता दे कि ज्योतिष के अनुसार शिव पुराण समेत कई शास्त्रों में शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने का विधान बताया गया हैं। इसके पीछे कई धार्मिक कारण है। ये बात तो शायद आप जानते ही होंगे कि शिवलिंग को शिव और शक्ति दोनों की सम्मिलित ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसी लिए शिवलिंग पर लगातार जल चढ़ाया जाता है। और इस जल को बहुत ज्यादा पवित्र माना जाता है। ये जल जिस मार्ग से निकलता है उससे निर्मली, सोमसूत्र और जलाधारी कहा जाता है।

जाने क्यों नहीं लांघी जाती है जलाधारी

शिवलिंग को काफी ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल में भी शिव और शक्ति दोनों की ऊर्जा के कुछ अंश मिल जाते है जिसे की इस जल में इतनी ज्यादा ऊर्जा होती है कि यदि कोई व्यक्ति इसे लांघें तो ये ऊर्जा लांघते समय उसके पैरों के बीच से उसके शरीर में प्रवेश कर जाती है। जिसके कारण लांघने वाले व्यक्ति को वीर्य या रज संबन्धित शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। इसी लिए हमारे शास्त्रों में जलाधारी को लांघना घोर पाप माना जाता है।

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