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Cicada New Covid 19 Variant: नया कोविड वेरिएंट ‘सिकाडा’, ओमिक्रोन से कितना अलग और कितना खतरनाक?

Cicada New Covid 19 Variant, कोरोना वायरस एक बार फिर नए रूप में चर्चा में है। इस बार सामने आया वेरिएंट BA.3.2 है, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘सिकाडा’ नाम दिया गया है।

Cicada New Covid 19 Variant : सिकाडा वेरिएंट ने बढ़ाई चिंता! भारत में कितने मरीज, क्या है ताजा अपडेट

Cicada New Covid 19 Variant, कोरोना वायरस एक बार फिर नए रूप में चर्चा में है। इस बार सामने आया वेरिएंट BA.3.2 है, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘सिकाडा’ नाम दिया गया है। यह वेरिएंट ओमिक्रोन परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है और अब तक 22 देशों में फैल चुका है। अमेरिका के कई राज्यों, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में इसके मामले रिपोर्ट होने के बाद लोगों के मन में फिर से चिंता बढ़ गई है। सवाल यह है कि क्या यह वेरिएंट भारत में भी पहुंच चुका है? और क्या यह पहले के वेरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक है? आइए विस्तार से समझते हैं।

वेरिएंट की पृष्ठभूमि

रिपोर्ट्स के अनुसार BA.3.2 वेरिएंट सबसे पहले 2024 के अंत में दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया था। तब से वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां इसकी निगरानी कर रही हैं। World Health Organization (WHO) ने इसे ओमिक्रोन परिवार का हिस्सा माना है और फिलहाल इसे ‘अंडर मॉनिटरिंग’ श्रेणी में रखा है।WHO के तकनीकी सलाहकार समूह, Technical Advisory Group on COVID-19 Vaccine Composition (TAG-CO-VAC), के अनुसार यह वेरिएंट तेजी से फैल सकता है, लेकिन अब तक इसके अधिक घातक होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।

क्या भारत में पहुंच चुका है सिकाडा?

भारत में इस वेरिएंट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत डेटा सामने नहीं आया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब यह वेरिएंट पिछले एक साल से वैश्विक स्तर पर मौजूद है और 22 से अधिक देशों में रिपोर्ट हो चुका है, तो इसके भारत में भी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल देश में कोविड के मामलों में कोई असामान्य उछाल दर्ज नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार जीनोमिक सर्विलांस और निगरानी पर जोर दे रहे हैं ताकि किसी भी नए वेरिएंट की समय रहते पहचान हो सके।

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लक्षण: क्या अलग है सिकाडा?

अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिकाडा वेरिएंट के लक्षण ओमिक्रोन जैसे ही बताए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं:

  • गले में खराश
  • सूखी खांसी
  • सर्दी या बंद नाक
  • सिरदर्द और बदन दर्द
  • हल्का बुखार
  • स्वाद और गंध का अस्थायी नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर फेफड़ों के संक्रमण या अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में अभी तक कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं देखी गई है।

क्या ओमिक्रोन से ज्यादा खतरनाक है?

अब तक के वैज्ञानिक आंकड़ों से यह संकेत नहीं मिलता कि BA.3.2 वेरिएंट ओमिक्रोन से अधिक घातक है। हालांकि इसकी संक्रामकता (Infectivity) अधिक हो सकती है, यानी यह तेजी से फैल सकता है।WHO ने इसे फिलहाल उच्च प्राथमिकता वाले वेरिएंट की सूची में शामिल नहीं किया है। इसका मतलब है कि वैश्विक स्तर पर इसे गंभीर खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा, लेकिन निगरानी जारी है।

वैक्सीन पर असर?

सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि नए वेरिएंट पर वैक्सीन असरदार नहीं होगी। विशेषज्ञ इसे भ्रामक बताते हैं। TAG-CO-VAC के अनुसार, वर्तमान वैक्सीन रणनीति में इस वेरिएंट को अलग से प्राथमिकता देने की जरूरत नहीं समझी गई है।वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा वैक्सीन गंभीर बीमारी और मृत्यु से सुरक्षा देने में अभी भी प्रभावी हैं, भले ही संक्रमण पूरी तरह न रोक पाएं।

भारतीय विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. महेश चंद्र मिश्रा के अनुसार, “कोरोना वायरस का म्यूटेशन होना स्वाभाविक है। हर नए वेरिएंट का मतलब यह नहीं कि महामारी फिर लौट आएगी। वायरस अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए रूप बदलता रहता है।”उनका कहना है कि जब वायरस दुनिया के कई हिस्सों में मौजूद है, तो भारत में भी इसके होने की संभावना रहती है। इसलिए लोगों को कोविड-अनुकूल व्यवहार (Covid Appropriate Behaviour) अपनाना नहीं छोड़ना चाहिए।

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क्या बरतें सावधानी?

हालांकि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।

  • भीड़भाड़ वाली जगहों में मास्क पहनना
  • हाथों को साबुन से बार-बार धोना
  • फ्लू जैसे लक्षण होने पर जांच कराना
  • बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों का विशेष ध्यान रखना

ये छोटे-छोटे कदम संक्रमण के जोखिम को कम कर सकते हैं।

सिकाडा यानी BA.3.2 वेरिएंट ने वैश्विक स्तर पर हलचल जरूर पैदा की है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह ओमिक्रोन से ज्यादा खतरनाक साबित नहीं हुआ है। WHO और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियां इसकी निगरानी कर रही हैं। भारत में फिलहाल कोई गंभीर स्थिति सामने नहीं आई है।ऐसे में जरूरी है कि अफवाहों से बचें, आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और बुनियादी सावधानियां अपनाते रहें। महामारी के पिछले अनुभवों ने हमें सिखाया है कि जागरूकता और जिम्मेदारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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