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यौन शोषण के बुरे आईने को दिखाने वाली बॉलीवुड की 5 फ़िल्में

यौन-शोषण – समाज का बुरा आईना


यौन-शोषण यानि सेक्सुअल हर्रासमेंट (sexual harassment) आज हमारे समाज का वो बुरा आइना है जिसके खिलाफ पूरी दुनिया ने जंग छेड़ी हुई हैं। इस विषय से हमारा बॉलीवुड समाज भी अछूता नहीं रहा हैं। बॉलीवुड के कुछ ऐसे दिग्गज निर्देशकों ने कुछ ऐसी फ़िल्में बनायीं हैं जिंसमे यौन शोषण के बुरे आईने को अलग-अलग कहानियों के माध्यम से दर्शाया गया है। आईये जानते हैं वो यौन शोषण के बुरे आईने को दिखाने वाली बॉलीवुड की वो 5 फ़िल्में जिन्होंने समाज में फैली इस बुराई का अंत करने में मदद की।

1. भूमि (2017) – इस फिल्म में एक सिंगल फादर के द्वारा पाली गयी बेटी के बलात्कार और उसके रिवेंज की कहानी हैं। इसमें सिंगल फादर यानि अरुण सचदेवा की भूमिका में होते हैं संजय दत्त और उसकी बेटी भूमि यानि अदिति राव हैदरी है। इसकी कहानी में भूमि का बलात्कार होने के बाद एक बाप की जंग शुरू होती हैं।

2. पिंक (2016) – ये फिल्म समाज के उस आईने को दिखती है जहाँ लड़कियों के ना बोलने पर क्या होता है यह दिखाया गया हैं। इसमें चार लड़कियों की कहानी है जिनके साथ एक पार्टी में मौजूद कुछ लड़के छेड़छाड़ करते हैं। जब इसका विरोध किया जाता है तो बात बढ़ जाती हैं और इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस तापसी पन्नू लड़के को घायल कर अपने दोस्तों के साथ वहां से भाग जाती हैं। इसके बाद शुरू होता है पुलिस, कोर्ट रूम और वकीलों की दलीलों का सफर। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन एक वकील का रोल निभा रहें हैं।

3. मॉम (2017) – इस फिल्म में एक माँ की उसकी सौतेली बेटी के बलात्कार हो जाने के बाद उन लोगों के साथ जंग की कहानी है जिसमे वो सभी को एक अलग तरीके से बदला लेने का बनाती हैं। फिल्म में देवकी की भूमिका में श्रीदेवी है जो आर्या की माँ की भूमिका निभा रही हैं। आर्या के साथ एक पार्टी के दौरान रेप हो जाने के बाद शुरू होता हैं देवकी का अपनी बेटी को न्याय दिलाने का सफर।

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4. मातृ (2017) – ये फिल्म भी एक मां (रवीना टंडन) के बदले की कहानी है जिसमें उसकी बेटी का बलात्कार उसकी आंखों के सामने होता है। इस परिस्थिति में मां खुद के संभालते हुए कैसे सिस्टम से लोहा लेती है और कैसे सत्ता में बैठे दबंगों को इसकी सजा देती है यही इस फिल्म की कहानी है।

5. लज्जा (2001) – यह फिल्म उन औरतों के दर्द की कहानी है जिसमे उनके मर्दों द्वारा उनपर किये गए अत्याचार को दिखाया गया हैं। कैसे मुश्किल परिस्तिथों में एक औरत अपने सम्मान की रक्षा करती है और कैसे वो दूसरी औरतों का सहारा पाती हैं।

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हेल्थी ब्रेकफास्ट के लिए खाने में क्या चुनें

सुबह ब्रेकफास्ट खाना कितना जरूरी


जब हमारा शरीर रात भर सोने के बाद उठता है तो रात भर में सोकर हमारी एनर्जी डाउन हो जाती है और हमारे शरीर को एनर्जी की जरूरत होती हैं। अगर हमें दिन भर काम करना होता है तो इसके लिए हमें ऊर्जा चाहिए होती और ऊर्जा का स्रोत्र होता हैं – भरपूर पोषण। भरपूर पपोषण पाने के लिए जरूरी होता हैं सुबह का ब्रेकफास्ट। खाली पेट रहने और सुबह का ब्रेकफास्ट समय पर ना खाने से हमारे शरीर में सुस्ती रहती है और हमें थकान महसूस होती हैं। आइये जानते है शरीर को ऊर्जावान बनाये रखने के लिए सुबह के ब्रेकफ़ास्ट में क्या खाएं –

सुबह के ब्रेकफ़ास्ट में क्या खाएं

• पोषक से भरपूर हल्का नाश्ता – पराठे, पोहे या उपमा जैसी चीजों को खाने से कम एनर्जी मिलती है और पेट भरा -भरा लगता हैं। आपको पराठों की जगह उपमा, नमकीन दलिया, कॉर्न फलैक्स आदि शामिल करना चाहिए।

• ब्रेड या बेकरी प्रोडक्ट्स – बेकरी की बनी चीजें जैसे पाव, कप केक की जगह होलग्रेन ब्रेड यानि आटे की ब्रेड खाने से आपको ज्यादा ऊर्जा महसूस होगी और साथ ये आपकी सेहत भी बनाये रखेगा।

•  ड्रिंक्स – कुछ लोग सुबह दूध पीना ज्यादा पौष्टिक मानते है लेकिन ऐसा नहीं हैं। अगर आप छाछ या जूस भी लेते हैं तो इससे आप सारा दिन ऊर्जावान महसूस करेंगे।

•  फल और सब्जिया – सुबह के समय नाश्ते में फल और सब्जियों की सलाद खाने से हमें सभी जरूरी पौष्टिक तत्व हमारे शरीर को मिलते हैं। लेकिन आपको फलों का चयन बहुत जरुरी हैं। आपको सुबह ब्रेकफास्ट में खट्टे फल जैसे संतरा, मौसंबी, नींबू, कीवी जैसे खट्टे फल खाने से बचना चाहिए। ये फल खाली पेट नुकसान करते हैं।

•  कार्बोनेटेड ड्रिंक्स – अगर आपको कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पसंद है तो ध्यान रहें आप खाली पेट इन ड्रिंक्स का सेवन ना करें। आप इसके बदले फलों और सब्जियों का ताज़ा जूस पियें।

•  नॉन वेजीटेरियन – अगर आप ब्रेकफास्ट में नॉन वेज खाना पसंद करते है तो सिर्फ नाश्ते में अंडे ही खाएं। मसालेदार मांस लेने के बजाए सफेद अंडे कहीं अधि‍क फायदेमंद होंगे। अंडों में सोडियम की मात्रा कम होती है सेहत के लिए फायदेमंद हैं।

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सलमान खान लेते है एंडोर्समेंट के लिए लेंगे 7 करोड़ रुपये, जानिये बाकी एक्टर्स का हाल

प्रोडक्ट एंडोर्समेंट के लिए कौन सा एक्टर करता सबसे ज़्यादा चार्ज


एंडोर्समेंट क्या होता हैं ?

आम आदमी के जीवन पर सेलेब्रिटीज का अत्यधिक प्रभाव होता है। इसी कारण के कारण फेमस ब्रांड अपने विज्ञापन के लिए और अपने लिए समर्थन पाने के लिए बॉलीवुड सेलिब्रिटीज का सहारा लेते हैं। इसी को एंडोर्समेंट कहते हैं। जब दर्शक अपने चहेते सितारें को देखकर प्रोडक्ट्स खरीदते हैं। एक ब्रांड एंबेसडर बनना एक सेलेब के लिए बहुत प्रभावी तरीका होता है क्योंकि बॉलीवुड सेलेब्स ब्रांड एंडोर्समेंट के माध्यम से बहुत पैसा कमाते हैं। प्रत्येक स्टार का मूल्य उनकी फिल्मों की सफलता पर निर्भर करता है।

• अमिताभ बच्चन –  प्रति दिन 2.5 करोड़। इन्हे “लॉर्ड ऑफ एंडोर्समेंट्स” के रूप में जाना जाता है। कारों, हेयर ऑयल, पेन, चॉकलेट्स आदि को बढ़ावा देने में उनके एंडोर्समेंट की कीमत लगभग 50 से 120 मिलियन रुपये बनते है। बिग बी गुजरात टूरिज्म, फर्स्ट क्राई,पार्कर, मैगी, कल्याण ज्वैलर्स, बोरोप्लस, जेन मोबाइल, मैक्स न्यूयॉर्क लाइफ इंश्योरेंस और रियल एस्टेट के ब्रांड एंडोर्स कर रहे हैं।

• सलमान खान – एंडोर्समेंट कुल राशि: एक दिन में 5 से 7 करोड़। इनकी द्वारा सबसे लोकप्रिय ब्रांड थंप्स अप, रिवाइटल, व्हील, सुजुकी, यात्रा डॉट कॉम और रिलैक्सो हैं। कई महान ब्रांड कंपनियों के साथ सलमान खान का जुड़ाव मीडिया और जनता के बीच चर्चा का एक दिलचस्प हिस्सा रहा है। उन्होंने अपनी कंपनी बीइंग ह्यूमन की कमाई का अधिकांश पैसा दान किया।

• इरफान खान – पद्म श्री पुरस्कार विजेता, बॉलीवुड और हॉलीवुड में कुछ प्रसिद्ध फिल्मों के साथ और लगभग दो वर्षों से सीट टायर्स, इंडिया मार्ट,  सिस्का लेड और एनवी डेओडोरैंट्स को एंडोर्स कर रहे हैं।

• शाहरुख खान – एंडोर्समेंट राशि –  एक दिन में 3.5 से 4 करोड़। शाहरुख़ खान पेप्सी, लक्स, डिश टीवी, डीडेकोर, नोकिआ और हुंडई जैसे कई प्रसिद्ध ब्रांडों को एंडोर किया है।

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• आमिर खान – एंडोर्समेंट राशि की पेशकश: प्रति दिन 5 से 7 करोड़। उनके शीर्ष ब्रांडों में शामिल हैं – सैमसंग, टाइटन, स्नैपडील और कोका-कोला। सूत्रों के मुताबिक, स्नैपडील के सबसे बड़े ब्रैंड एम्बेस्डर आमिर खान सबसे महंगे सेलिब्रिटी ब्रांड एंबेसडर हैं जो लगभग 30 करोड़ एक कैंपेन के लिए लेते हैं।

• सैफ अली खान – एंडोर्समेंट मनी – एंडोर्समेंट के लिए 3 से 4 करोड़ रुपए। विज्ञापन उद्योग में ब्रांडों का समर्थन सियाराम सिल्क मिल्स के ऑक्सम्बर्ग, साथ ही वह प्रोवोग और ओसीएम के लिए फैशन के कपड़ों का समर्थन कर रहे थे।

• ऐश्वर्या राय बच्चन – सूत्रों के अनुसार, इनका न्यूनतम शुल्क रु. 5 से 6 करोड़ प्रति दिन है जो उन्हें सबसे महंगी हस्ती बनाता है।

• प्रियंका चोपड़ा – यह भी कथित रूप से कहा जाता है कि उन्होंने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय हैंडबैग कंपनी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और उनका समर्थन मूल्य रु। दिन में 4 से 5 करोड़ हैं।

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क्या होती है touch therapy? हर बच्चे को क्यों जरूरत होती है ‘Jadoo Ki Jhappi’ की

बच्चे को touch therapy देने के फायदे


कोई भी मां बच्चे को प्यार करने, चुप करवाने या सुलाने के लिए उसे गले लगाती है। इससे बच्चा सुरक्षित महसूस करने के साथ-साथ सकारात्मक भी महसूस करता है। इसे बॉलीवुड में जहां जादू की झप्पी कहा जाता है वहीं आयुर्वेद में स्पर्श चिकित्सा और जापान जैसे देशों में रेकी का नाम दिया गया है तो चीन में ची का नाम दिया गया है।

Touch therapy

टच थेरेपी में सिर पर हाथ रखने, मालिश करने, गले लगाने, शरीर को स्पर्श करने जैसी चीजें शामिल हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है और शरीर में सकारात्मकता का संचार होता है।

क्या आप जानते हैं बच्चे को टच थेरेपी देने के बहुत लाभ हैं। चलिए जानते हैं इन लाभों के बारे में:

1. बच्चे में एक स्वस्थ भावना पैदा होती है।

2. बच्चेम को मन की शांति के अलावा और आराम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है

3. बच्चे की मांसपेशियों की टोन और परिसंचरण में सुधार होना

4. फेफड़ों और प्रतिरक्षा कार्यों में सुधार

5. नींद के पैटर्न में सुधार

6. चिंता और तनाव कम करना

7. शुरुआती भीड़ और भावनात्मक तनाव से असुविधा को कम करना

8. पाचन, संचार और गैस्ट्रिक संबंधी प्रणालियों को मजबूत करना

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शोधकर्ताओं के अनुसार, जो बच्चे बहुत बीमार होते हैं और वे इतने मजबूत नहीं होते कि वे अपनी देखभाल करने वालों के साथ चंचल या फिर बातचीत में संलग्न हों, ऐसे में माता-पिता के लिए बच्चे को कडलिंग या टच थेरेपी देना एक अच्छा तरीका है ताकि वे अपने बच्चे के साथ प्यार और सार्थक तरीके से बातचीत कर सकें। यह थेरेपी बच्चे की असहायता की भावना को कम करने में मदद करती है।

इसे कंगारू देखभाल भी कहा जाता है। कंगारू देखभाल आपके बच्चे के सामने और आपकी छाती के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क है। इससे आपका बच्चा आपकी गंध, स्पर्श, आवाज और सांस लेने की लय को जानता है। इससे आप सफल स्तनपान और दूध उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकती हैं। बच्चे के शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद मिल सकती है। बच्चे अधिक समय गहरी नींद में बिता सकता है।

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क्या आपके सभी Financial Matter आपका पति हैंडल करता हैं: जानिये आंकड़ें क्या कहते हैं?

भारतीय महिलाएं क्या अब भी नहीं है Financially Independent?


How to be financially independent: भारत में देखा गया कि अधिकत्तर महिलाओं के फाइनेंशियल मैटर उनके पति या घर के बड़े पुरुष ही संभालते हैं। बेशक, महिलाएं वर्किंग ही क्यों ना हों, लेकिन वे फाइनेंशियल मैटर से संबंधित सभी जानकारियां अपने हस्बेंड से न सिर्फ शेयर करती हैं बल्कि उन्हीं से अपना एकाउट हैंडल करवाती हैं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि हाल ही में आई रिपोर्ट में भी साबित हुआ है। जानें, क्या कहते हैं रिपोर्ट में मौजूद आंकड़े।

2017 में इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली 100 बड़े पद की शिक्षित महिलाओं में से 92 प्रतिशत ने इस बात को स्वीकार किया है कि सभी वित्तीय निर्णय परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा या उनके पति द्वारा लिए जाते हैं।रिपोर्ट में कहा गया कि महिलाओं को सबसे अधिक वित्तिीय मैटर्स संभालने में उस समय दिक्कतें आती हैं जब अचानक फाइनेंशियल मैटर संभालने वाले पुरुष या पति की मौत हो जाती है या फिर कोई बड़ा हादसा हो जाता है। रिपोर्ट में पाया गया कि महिलाओं को फाइनेंशियल मैटर की ना तो कोई जानकारी होती है और ना ही कोई सुराग होता है, ऐसे में उन्हें फाइनेंस से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं और दस्तावेजों की तलाश करनी पड़ती है।

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मुंबई में वर्किंग समिक्षा सिंह के पति का 35 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्हें वित्तीय अनिश्चितता का सामना करते हुए बहुत ज्यादा नुकसान से जूझना पड़ा। वे कहती हैं कि मुझे अपने पति के निवेशों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी। मुझे यह भी पता नहीं था कि क्या हमारे पास बीमा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि आजकल की अनिश्चितता के चलते जोडि़यों को एक वित्तीय ब्लैक बॉक्स बनाना चाहिए। ये भौतिक या डिजिटल हो सकता है जिसमें सभी आवश्यक सभी जानकारियां और दस्तावेज़ शामिल हों। वित्तीय ब्लैक बॉक्स की जरूरत इसीलिए है क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर महिलाएं अपने वित्त का प्रभार तभी लेती हैं जब कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है। ब्लैक बॉक्स यह सुनिश्चित करता है कि उनकी पूरी वित्तीय स्थिति एक क्लिक में उपलब्ध हो। यह भी सुनिश्चित करता है कि महिलाएं आपातकालीन स्थिति में उन्हें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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Holi Songs Playlist: एवरग्रीन गाने जो CELEBRATIONS मे भर देंगे मस्ती के रंग

Holi songs: होली पर सबसे जयादा बजाये जाने वाले सांग्स, इनपर डांस न किया तो क्या किया?


Holi songs: रंग, डांस, भांग,पानी और सबसे ज्यादा होली के गानों के बिना यह त्यौहार अधूरा सा लगता है। इस साल छोटी होली जिस दिन हम पूजा करते हैं 9 मार्च को, और बड़ी होली यानी रंगो वाली होली 10 मार्च 2020 को है, जिस दिन हम रंगो से खेलते हैं।

जब भी किसी फिल्म में होली का त्यौहार दिखाया जाता है तो उसमें होली का गाना ऐसा होता है जो होली के त्यौहार में रंग डाल देता है। बहुत सी पुरानी और नयी फिल्मों में होली के गाने फिल्माए गए हैं जैसे ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ ,’जॉली एलएलबी 2′, मोहब्बतें, वक़्त आदि। होली के गानों पर चाहे वो बच्चे हो या बूढ़ें, बच्चे, औरत हो या आदमी, सभी इन गीतों पर थिरकते हैं।

आइये जानते हैं बॉलीवुड के वो सबसे पॉपुलर होली के गाने जिन पर आज भी सभी थिरकते हैं –

वर्ष 1937 में प्रथम महिला संगीतकार सरस्वती देवी ने फिल्म जीवन प्रभात के लिए “होली आई रे कान्हा” गाना गाया था।

अनिल विश्वास ने अंगुलीमाल फिल्म में एक होली गीत – आई आई बसंती बेला, मगन मन झूम रहा’

जोगन फिल्म का गीत – ” रंग डारो रे रसिया” का़फी हिट होली सांग हैं।

वर्ष 1959 में प्रदर्शित फिल्म नवरंग में होली का गीत – अरे जा रे हट नटखट

2000 में फिल्म मोहब्बतें – सोनी-सोनी अंखियों वाली होली

2003 में रवि चोपड़ा के निर्देशन में बनी फिल्म बाग़बांन में अमिताभ बच्चन पर “होली खेले रघुवीरा अवध”

हेमा मालिनी पर फिल्माया गीत – “होली के दिन दिल खिल जाते हैं, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं”

अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म सिलसिला – रंग बरसे भीगे चुनर वाली होली

वर्ष 1993 में अंग से अंग लगाना, हमें ऐसे रंग लगाना श्रोताओं के बीच का़फी लोकप्रिय हुआ था

वह पुरानी फ़िल्में जिनमे होली के गीत हुए थे मशहूर-

जीवन संध्या (1937), अंगुलीमाल, पूजा, होली (1940), आन (1942), लड़की (1943), मदर-इंडिया (1947), जोगन (1949), नवरंग (1949), कोहिनूर (1960), फागुन (1960), रंगोली (1962), फूल और पत्थर (1966), पराया धन (1971), फागुन (1973), आपकी क़सम (1973), शोले (1974), ज़िद (1976), आपबीती (1977), सिलसिला (1981), कामचोर (1981), धनवान ( 1982), होली (1987) आदि।

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आइये जानते है होली के सांग की हिट लिस्ट

सबसे ज्यादा फेमस सांग – बालम पिचकारी

बलम पिचकारी

मोहब्बतें का सांग

बद्री की दुलहनिआ

जॉली एल एल बी

छन्न के मोहल्ला सारा

वक़्त – डू मी ए फेवर

लहू मुँह लग गया

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Lady Finger Benefits: भिंडी खाने से होगा मोटापा कम, जानिये कैसे

Lady Finger Benefits: भिंडी खाने के हैं कई फायदे, मोटापा भी होता है कम


लेडी फिंगर यानि भिंडी से जुडी कुछ ख़ास बातें 

शायद ही आपमे से किसी ने सुना होगा कि महिला ऊँगली खाने से वजन कम होता हैं। घबराइए मत हम आपको किसी महिला की ऊँगली खाने के लिए नहीं बोल रहे हैं बल्कि हम बात कर रहे हैं लेडी फिंगर, यानि “भिंडी’ की जिसे ओकरा के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय रसोईंघर में भिंडी की सब्जी का स्वाद तो आप सभी ने चखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं भिंडी खाने से वजन भी कम होता है, और साथ ही होते हैं और भी हेल्थ बेनिफिट।

भिंडी का पौधा मुख्य रूप से अफ्रीका, मध्य पूर्व, दक्षिण अमेरिका और भारत के कई स्थलों पर उगाया जाता है। यह एक गर्म मौसम की फसल है। इसके नुकीले आकार के कारण इसको लेडी फिंगर कहा जाता हैं। भिंडी खाने के असंख्य स्वास्थ्य लाभ है जिससे आप लोग परिचित नहीं हैं।

भिंडी विटामिन और खनिजों से भरपूर होती है। इसमें उच्च घुलनशील और अघुलनशील फाइबर सामग्री अधिक होती है। एक सर्वे के अनुसार, भिंडी (भिंडी) की 100 ग्राम मात्रा में 33% कैलोरी, 7.45 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 1.93 ग्राम प्रोटीन, 0.19 ग्राम वसा और 3.2 ग्राम फाइबर होता है। जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए फाइबर की मात्रा बहुत अधिक फायदेमंद साबित होती है। इसलिए, भिंडी को उन सब्जियों में से एक माना जाता है जिन्हें आप अपने वजन घटाने के अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। आइये आज आपको भिंडी के फायदों के बारे में बताते हैं।

लेडी फिंगर यानि भिंडी खाने के फायदें

वजन कम करने में मदद करती है भिंडी

भिंडी का सबसे पहला फायदा होता है कि इससे आपका वजन कम होता है। भिंडी में फाइबर अधिक मात्रा में होता है, जो आपको हमेशा तृप्त रखता है और आपको लंबे समय पेट भरा हुआ महसूस करवाता है। भिंडी में फाइबर की सामग्री शरीर द्वारा आसानी से पचती नहीं है, इसलिए हमारे सिस्टम में रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है। फाइबर हमारे शरीर में आंत्र आंदोलन में सुधार करके शरीर में पाचन की प्रक्रिया को सही करता है। भिंडी मेटाबॉलिज्म और पाचन क्रिया को सही करके वजन कम करने में मदद करती है।

कम वसा युक्त

भिंडी में वसा की मात्रा 0.3 ग्राम होती है। वसा एक ऐसा पोषक तत्व है जो आहार में अधिक मात्रा में कैलोरी प्रदान करता है। एक ग्राम वसा में नौ कैलोरी होती है। कम वसा वाला फ़ूड खाने से कोलेस्ट्रॉल ठीक रहता है। इससे पेट फूलने, पेट में मरोड़ आना, एसिडिटी व डायरिया आदि से बचाव होता है।

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आंखों की रोशनी के लिए वरदान

भिंडी खाने से आंखों की रोशनी सही रहती है क्योंकि इसमें ल्यूटिन, बीटा-कैरोटीन जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं। भिंडी खाने से हम आखों से जुड़ी कई तरह की अन्य समस्यायों से भी बचें रहते हैं।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) कम होता है

भिन्डी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिसके कारण हमारे शरीर की रक्त शर्करा पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, गैर-स्टार्च वाली सब्जियां, जैसे कि भिन्डी, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ खाने से डायबिटीज के रोगियों को बहुत फायदा होता हैं। साथ ही भिंडी में ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) कम होने वजन कम करने में मदद मिलती है।

भिंडी खाने से ब्लड प्रेशर होता है कंट्रोल

भिंडी आपके ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भिंडी खाना काफी फायदेमंद साबित होगा।

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Women’s Day 2020: क्या है इस साल की अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम?

Women’s Day 2020: जानिए पहली बार कब मनाया गया था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस


Women’s Day 2020: हर साल भारत देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर में महिलाओं की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाता है। ये दिन विशेष रूप से एक ऐसी दुनिया में एकता, समानता और वकालत पर केंद्रित है जहां महिलाओं और पुरुषों के बीच मतभेद और अन्याय हमेशा की तरह महान हैं।

एशिया में 20 से अधिक देश विशेष रूप से इसे सभी के लिए एक दिन की छुट्टी के साथ मनाते हैं। यद्यपि कई लोग जो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की अवधारणा से समस्या रखते हैं, वे इसे एक आधुनिक आविष्कार मान सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पहली आधिकारिक स्वीकृति 1911 में आ गई थी और 1917 से सोवियत संघ में एक आधारशिला अवकाश बन गया (यहां तक कि 1965 में काम से एक दिन दूर रहने का निर्णय लिया गया)। 1977 के बाद से, संयुक्त राष्ट्र ने इसे महिलाओं के अधिकारों और विश्व शांति दोनों के लिए फोकस दिवस बनाया।

क्या है इस साल की अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम –

हर साल अन्य दिवसों की तरह ही महिला दिवस की भी थीम होती है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) 2020 की थीम है- “आई एम जनरेशन इक्वेलिटी: महिलाओं के अधिकारों को साकार कर रही हूं”। इस साल जनरेशन इक्वेलिटी पर बहुत ज्यादा फोकस किया जा रहा है। यह विषय संयुक्त राष्ट्र की नई बहु-भाषी मुहिम जनरेशन इक्वेलिटी के साथ जुड़ा हुआ है, जो बीजिंग डिक्लेरेशन और प्लेटफॉर्म फॉर एक्शन की 25 वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। 

वर्ष 2020 दुनिया भर में लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष है, क्योंकि वैश्विक समुदाय कार्रवाई के लिए बीजिंग प्लेटफॉर्म को अपनाने के बाद से महिलाओं के अधिकारों के लिए की गई प्रगति का जायजा लेता है। 

उभरती हुई वैश्विक सहमति यह है कि कुछ प्रगति के बावजूद, वास्तविक परिवर्तन दुनिया में बहुसंख्यक महिलाओं और लड़कियों के लिए आश्चर्यजनक रूप से धीमा रहा है। आज, कोई भी देश लैंगिक समानता हासिल करने का दावा नहीं कर सकता है। कई बाधाएं कानून और संस्कृति में अपरिवर्तित रहती हैं। महिलाओं और लड़कियों का वंचित होना जारी है; वे अधिक काम करते हैं और कम कमाते हैं और उनके पास कम विकल्प होते हैं; और घर और सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा के कई रूपों का अनुभव करें। इसके अलावा, कड़ी मेहनत से जीते नारीवादी लाभ के रोलबैक का एक महत्वपूर्ण खतरा है। वर्ष 2020 लैंगिक समानता और सभी महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकारों को प्राप्त करने के लिए वैश्विक कार्रवाई को जुटाने के लिए एक अस्वीकार्य अवसर का प्रतिनिधित्व करता है।

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महिला दिवस के मौके पर दें उन्हें ये उपहार-

महिला दिवस के मौके पर महिलाओं को बहुत सम्मान दिया जाता है। उन्हें खुश करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में आप 8 मार्च को अपने जीवन में महत्व‍ रखने वाली महिलाओं को उपहार दे सकते हैं। आप अपने प्‍यार और सम्मान को दिखाते हुए अच्छा सा कार्ड खुद से बनाएं। अगर पत्नी को गिफ्ट देना है तो सुबह से लेकर शाम तक उनके लिए खाने की अलग-अलग चीजें बनाएं। फिटनेस संबंधी कोई वाउचर या स्पा बुकिंग का वाउचर भी दे सकते हैं। महिलाओं को ज्वैलरी से बहुत लगाव होता है, आप इन्हें कोई आभूषण दे सकते हैं। मेकअप किट और कपड़े ऐसी चीजें हैं जो हर महिला को पसंद आती है। आप महिला की पसंद को ध्यान में रखकर उन्हें उपहार दें जिससे वे खुश हों और खुद को भाग्यशाली समझें।

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आखिर मार्च मे जन्में लोग क्यों होते है ‘Brutally Honest’? यहाँ जाने Fun Facts

मार्च मे जन्में लोगों से जुड़ी कुछ ख़ास बातें


हर माह में जन्में बच्चों का भाग्य और उनकी खासियत अलग-अलग होती है।  यूं तो इंसान की जन्म की तारीख, समय और स्थान भी उनके जीवन में होने वाले उतार-चढ़ाव के लिए जिम्मेदार होता है  लेकिन आज हम आपको मार्च माह में जन्में बच्चों की विशेषता बताने जा रहे हैं। चलिए जानते हैं कैसे होते हैं मार्च माह में जन्में बच्चे और उनका व्यक्त्वि।

मार्च में पैदा होने वाले बच्चों की सबसे खास बात ये होती है कि वे बेहद मिलनसार होते हैं और आकर्षक होते हैं।  जिससे भी वे मिलते हैं उनके आकर्षक व्यक्त्वि के कारण हर कोई इनका दीवाना सा हो जाता है।  यही कारण है कि इनके दोस्त भी बहुत सारे होते हैं। मार्च में जन्में बच्चे ट्रैवल के भी बहुत शौकीन होते हैं   इस माह में जन्में बच्चे विचारों से भी बेहद महत्वाकांक्षी होते हैं।  मार्च में जन्में बच्चे बेहद जिम्मेदार होते हैं  वे बड़े पदों पर जाकर जो भी जिम्मेदारी संभालते  हैं उसमें पूरी तरह सफल होते हैं।   ऐसे में इस माह में जन्में बच्चे तरक्की़ दर तरक्की‍ पाते हैं।  

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मार्च माह में जन्में बच्चे कुछ भी बोलने से पहले खूब सोच-विचार करते हैं।  वे पूरी जानकारी इकत्रि‍त करके ही किसी विषय पर बोलते हैं।  हालांकि, मार्च माह में  जन्में कुछ बच्चों का व्यक्त्वि बेहद लापरवाह किस्म का होता है।  

मार्च माह में जन्में बच्चों की खासियत होती है कि वो माहौल जमाना जानते हैं।  वे ना सिर्फ किसी एक चीज पर पूरी तरह से फोकस करते हैं बल्कि ये बेहद बातूनी होते हैं।  जब तक इस माह में जन्में बच्चे  केयरलेस रहते हैं तब तक वे काफी कुछ खो देते हैं लेकिन जब वे गंभीर होते हैं तो सफलता उनके कदम चूमते हैं.  कई बार इस माह में जन्में बच्चे ऐसा काम कर देते हैं कि हर कोई उन्हें देखकर आश्चर्यचकित हो जाता है और यकीन नहीं कर पाता कि वाकई ये काम इन्होंने ही किया है।

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Summer Vacation मे क्यों होना चाहिए बच्चों के पास ‘टाइम टेबल’

कैसे बनाये  बच्चों की summer vacation प्रोडक्टिव ?


गर्मी की छुट्टियां आते ही बच्चों की मौज हो जाती है लेकिन पेरेंट्स के लिए सबसे ज्यादा सिरदर्दी बढ़ जाती है। अब आप भी चिंता में होंगे कि कैसे अपने बच्चों को व्यस्त रखें और खुश करें जिससे उनकी समर वेकेशन भी अच्छी निकल जाए। तो चलिए जानते हैं बच्चों को खुश करने के लिए आप क्या-क्या टिप्स अपना सकते हैं।

गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को धमाचौकड़ी मचाना बहुत अच्छा लगता है। ऐसे में आप पहले से ही योजना बनाकर रखें कि बच्चों को कहा पर व्यस्त रखना है जिससे वे खुशी-खुशी अपनी समर वेकेशन बिता सकें।

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गर्मी की छुट्टियों में आप बच्चों को ननिहाल ले जा सकते हैं। बच्चों को ननिहाल जाना बहुत पसंद होता है। लेकिन आजकल के बच्चे गैजेट्स के साथ टाइम बिताना पसंद करते हैं। ऐसे में आप बच्चों को एक्सट्रा एक्टिविटी में डालें।  अगर आपके बच्चे को डांस, सिंगिंग, म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट, थियेटर, स्पोर्ट्स या स्वीमिंग जैसी एक्टिविटी में रहना पसंद करते हैं तो बच्चों के समर वेकेशन आते ही उनका इन एक्टिविटीज के लिए एडमिशन करवा दें। बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संस्थान बच्चों के लिए समर वेकेशन पर कैंप, वर्कशॉप्स और प्रोफेशनल कोर्स करवाते हैं।

आप चाहे तो बच्चों को टूर पर ले जा सकते हैं। जहां आप बच्चों को दुनियाभर की अलग-अलग चीजें दिखा सकते हैं। बच्चों के साथ घर में क्राफ्टिंग करवा सकते हैं। छोटे बच्चों को ड्राइंग का बहुत शौक होता है आप उनके साथ स्टोरीज शेयर करते हुए उन्हें ड्राइंग करवा सकते हैं।  आजकल साइंस और मैथ्स की ऐसी क्लासेज होती हैं जिससे बच्चे का आईक्यू लेवल तेज होता है। आप अपने बच्चे की पसंद के हिसाब से उन्हें इस तरह के प्रोफेशनल कोर्स में भी इन्वॉल्व कर सकते हैं। इससे बच्चों का पढ़ाई में भी मन लगेगा और आपको अपने बच्चे की चिंता भी नहीं सताएगी।  इन सब चीजों से आपका बच्चा ना सिर्फ व्यस्त रहेगा बल्कि क्रिएटिव भी रहेगा और गैजेट से दूर रहकर अपना खेल-खेल में विकास करेगा।

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