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Shocking news: स्विट्जरलैंड में बनी मौत देने वाली मशीन, जानिए इसकी जरूरत कब पड़ती है

इस मशीन को बनाने का श्रेय डॉक्टर डेथ के नाम से मशहूर डॉक्टर फिलिप नित्स्चके को जाता है। वो एक एनजीओ के डायरेक्टर भी हैं। इस मशीन में अंदर लेटकर शख्स खुद अपनी मौत को कंट्रोल करेगा।

Shocking news: जानिए मौत की मशीन कैसे ले लेती है जान ? ये मशहूर डॉक्टर हैं इसके जनक


Shocking news: इच्‍छामृत्‍यु के मामले में स्विट्जरलैंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। यहां सुसाइड पॉड यानी इच्‍छामृत्‍यु की मशीन को कानूनी मंजूरी दे दी गई है। इस मंजूरी के बाद इच्‍छामृत्‍यु का रास्‍ता साफ हो गया है। ऐसे मरीज जो गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और जिनके बचने की उम्‍मीद नहीं है वो इस मशीन के जरिए मौत को गले लगा सकेंगे।

इच्‍छामृत्‍यु की जरूरत कब पड़ती है?

इच्‍छामृत्‍यु का मतलब है अपनी मौत को गले लगाना। इसकी जरूरत तब पड़ती है जब जीवन मौत से भी ज्‍यादा तकलीफदेह हो जाता है। इच्‍छामृत्‍यु को अंग्रेजी में यूथनेशिया (Euthanasia) कहते हैं। इस शब्‍द की उत्‍पत्‍त‍ि ग्रीक भाषा के Euthanatos से हुई है। इसमें Eu का अर्थ है अच्‍छी और Thanatos का मतलब है मौत। इस तरह यह बना इच्‍छामृत्‍यु। यह दो तरह की होती हैं, पहली एक्टिव यूथनेशिया और दूसरी पैसिव यूथनेशिया। एक्टिव यूथनेशिया के तहत मरीज की जिंदगी का अंत सीधे तौर पर डॉक्‍टर्स की मदद से किया जाता है। वहीं, पैसिव यूथनेशिया के तहत रिश्‍तेदारों और सगे-सम्‍बंधियों की अनुमति से डॉक्‍टर्स कोमा या गंभीर हालत में पड़े मरीज को बचाने वाले जीवनरक्षक उपकरण को धीरे-धीरे बंद करते जाते हैं। इस तरह मरीज की मौत हो जाती है।

‘मौत की मशीन’कैसे लेती है जान ?

इसे तैयार करने वाले संगठन एक्‍ज‍िट इंटरनेशनल का कहना है, हमनें सुसाइड पॉड के दो प्रोटोटाइप तैयार किए हैं। इसका नाम सारको रखा गया है। इसमें मरीज को लिटाया जाता है। इसके बाद एक बटन दबाया जाता है। ऐसा करने के बाद मशीन के अंदर नाइट्रोजन का लेवल बढ़ना शुरू हो जाता है और 20 सेकंड के अंदर ऑक्‍सीजन का लेवल 21 फीसदी से 1 फीसदी तक पहुंच जाता है। नतीजा, मरीज की 5 से 10 मिनट के अंदर मौत हो जाती है।

इस मशहूर डॉक्टर ने बनाया

इस मशीन को बनाने का श्रेय डॉक्टर डेथ के नाम से मशहूर डॉक्टर फिलिप नित्स्चके को जाता है। वो एक एनजीओ के डायरेक्टर भी हैं। इस मशीन में अंदर लेटकर शख्स खुद अपनी मौत को कंट्रोल करेगा। जब वो पूरी तरह मृत्यु के लिए तैयार हो जाएगा, तब मशीन के अंदर लगे बटन को दबा देगा। इससे मशीन के अंदर ऑक्सीजन लेवल कम हो जाएगा। बेहोश होने के एक मिनट के अंदर ही शख्स की मौत हो जाएगी।

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इच्छामृत्यु की नई मशीन का नाम सार्को

आपको बता दें किइच्छामृत्यु के लिए बनाई गई इस मशीन के अलावा पहले से ही स्विट्ज़रलैंड में सन् 1942 से ही कुछ खास मामलों में अस्स्टिेड सुसाइड यानि मदद के साथ आत्महत्या को लीगल माना गया है। इच्छामृत्यु की नई मशीन का नाम सार्को रखा गया है। ये काफी महंगा प्रॉजेक्ट है और उम्मीद की जा रही है कि अगले साल से ये मशीन काम में ली जा सकेगी।

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