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PMS Symptoms: पीरियड्स से पहले शरीर में हो रहे हैं ये बदलाव? हर बार इसे PMS समझना हो सकता है भारी

PMS Symptoms, पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले महिलाओं के शरीर और मूड में कई तरह के बदलाव महसूस हो सकते हैं। पेट में हल्का दर्द, स्तनों में संवेदनशीलता, थकान, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, सिरदर्द, भूख में बदलाव या शरीर में पानी जमा होने जैसी समस्याएं अक्सर प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी PMS का हिस्सा हो सकती हैं।

PMS Symptoms : पीरियड्स से पहले होने वाले ये बदलाव नहीं हैं हमेशा PMS, जानें कब बजती है खतरे की घंटी

PMS Symptoms, पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले महिलाओं के शरीर और मूड में कई तरह के बदलाव महसूस हो सकते हैं। पेट में हल्का दर्द, स्तनों में संवेदनशीलता, थकान, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, सिरदर्द, भूख में बदलाव या शरीर में पानी जमा होने जैसी समस्याएं अक्सर प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी PMS का हिस्सा हो सकती हैं। आमतौर पर ये लक्षण पीरियड्स शुरू होने के आसपास कम होने लगते हैं। लेकिन हर बार पीरियड्स से पहले होने वाले किसी भी बदलाव को PMS मान लेना सही नहीं है। कुछ लक्षण किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और उन्हें नजरअंदाज करने से समस्या बढ़ सकती है।

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PMS और Warning Signs में अंतर समझना जरूरी

PMS के लक्षण आमतौर पर पीरियड्स से कुछ दिन या एक-दो सप्ताह पहले शुरू हो सकते हैं और मासिक धर्म शुरू होने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। इनकी तीव्रता हर महिला में अलग हो सकती है। वहीं अगर कोई लक्षण हर महीने बहुत ज्यादा बढ़ रहा है, रोजमर्रा के काम, नींद, रिश्तों या नौकरी को प्रभावित कर रहा है या पीरियड्स खत्म होने के बाद भी बना रहता है, तो इसे सिर्फ PMS मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।विशेषज्ञों के अनुसार, लक्षणों का पैटर्न समझना महत्वपूर्ण है। अगर कोई परेशानी लगातार बनी रहती है या समय के साथ गंभीर होती जा रही है, तो इसके पीछे किसी अन्य मेडिकल कारण की जांच की जरूरत हो सकती है।

बहुत ज्यादा दर्द को सामान्य न मानें

पीरियड्स से पहले या पीरियड्स के दौरान हल्का पेट दर्द और ऐंठन आम हो सकती है, लेकिन अगर दर्द इतना तेज हो कि सामान्य गतिविधियां करना मुश्किल हो जाए, बार-बार दर्द की दवा लेने की जरूरत पड़े या हर महीने दर्द की तीव्रता बढ़ती जाए, तो इसे सामान्य PMS समझना सही नहीं है।बहुत अधिक पीरियड दर्द एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस, फाइब्रॉइड या दूसरी स्त्री रोग संबंधी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। खासकर तब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है जब दर्द अचानक पहले से काफी ज्यादा हो जाए या इसके साथ असामान्य ब्लीडिंग भी होने लगे।

असामान्य ब्लीडिंग है तो ध्यान दें

पीरियड्स से पहले हल्की स्पॉटिंग कुछ महिलाओं में हो सकती है, लेकिन बार-बार पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग होना, सेक्स के बाद रक्तस्राव होना, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या लंबे समय तक ब्लीडिंग जारी रहना जांच की वजह हो सकता है।मासिक धर्म का पैटर्न अचानक बदलना भी महत्वपूर्ण संकेत है। अगर पहले पीरियड्स नियमित थे और अचानक बहुत ज्यादा अनियमित हो गए हैं, कई महीनों तक पीरियड्स नहीं आ रहे हैं या ब्लीडिंग का पैटर्न काफी बदल गया है, तो इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड, PCOS, गर्भावस्था से संबंधित कारण या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

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बहुत ज्यादा मूड स्विंग्स को भी नजरअंदाज न करें

PMS के दौरान चिड़चिड़ापन, उदासी, चिंता और मूड स्विंग्स होना संभव है। लेकिन अगर हर महीने पीरियड्स से पहले भावनात्मक लक्षण इतने गंभीर हो जाएं कि कामकाज या व्यक्तिगत रिश्ते प्रभावित होने लगें, तो यह गंभीर PMS या Premenstrual Dysphoric Disorder यानी PMDD का संकेत हो सकता है।PMDD में उदासी, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, चिंता, गुस्सा, ध्यान लगाने में परेशानी और भावनात्मक अस्थिरता जैसे लक्षण काफी तीव्र हो सकते हैं। अगर किसी महिला को खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या जैसे विचार आते हैं, तो इसे PMS समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से मदद लेना जरूरी है।

अचानक वजन बढ़ना या शरीर में ज्यादा सूजन

पीरियड्स से पहले हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर में थोड़ा पानी जमा हो सकता है और अस्थायी रूप से वजन बढ़ा हुआ महसूस हो सकता है। लेकिन अगर अचानक बहुत ज्यादा सूजन दिखाई दे, वजन तेजी से बढ़े या पैरों, चेहरे और हाथों में लगातार सूजन बनी रहे, तो इसे केवल PMS नहीं माना जाना चाहिए।

लगातार सूजन कई अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ी हो सकती है। इसलिए अगर यह समस्या हर महीने बढ़ रही है या पीरियड्स खत्म होने के बाद भी बनी रहती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

अत्यधिक थकान और कमजोरी पर भी दें ध्यान

PMS के दौरान थकान महसूस होना आम है, लेकिन अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना या लगातार ऊर्जा की कमी किसी दूसरी समस्या का संकेत हो सकती है। खासकर जिन महिलाओं को बहुत ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग होती है, उनमें आयरन की कमी या एनीमिया की संभावना हो सकती है।अगर पर्याप्त नींद और आराम के बावजूद थकान लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से बात करके जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट करवाना उपयोगी हो सकता है। बिना जांच के खुद से आयरन या अन्य सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।

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स्तनों में बदलाव को भी समझें

पीरियड्स से पहले स्तनों में हल्का दर्द, भारीपन या संवेदनशीलता हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकती है और अक्सर पीरियड्स शुरू होने के बाद कम हो जाती है। लेकिन अगर स्तन में कोई नई गांठ महसूस हो, त्वचा में असामान्य बदलाव दिखाई दे, निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज हो या दर्द लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।हर गांठ कैंसर नहीं होती और कई गांठें पूरी तरह सामान्य कारणों से भी हो सकती हैं, लेकिन किसी नए या असामान्य बदलाव की जांच करवाना सुरक्षित विकल्प है।

पाचन संबंधी समस्या भी हर बार PMS नहीं

पीरियड्स से पहले पेट फूलना, कब्ज या भूख में बदलाव हो सकता है। लेकिन अगर पेट फूलने की समस्या लगातार बनी रहती है, बहुत ज्यादा बढ़ रही है, पेट में लगातार दर्द रहता है या खाने के बाद असामान्य रूप से जल्दी पेट भर जाता है, तो इसे केवल PMS मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।लगातार बने रहने वाले पाचन संबंधी लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए इनके पैटर्न और अवधि पर ध्यान देना जरूरी है।

अपने लक्षणों का रिकॉर्ड रखें

PMS और दूसरे स्वास्थ्य संकेतों के बीच अंतर समझने का एक आसान तरीका है कि महिला अपने पीरियड्स और लक्षणों का रिकॉर्ड रखे। कैलेंडर या पीरियड ट्रैकर में पीरियड की तारीख, दर्द, ब्लीडिंग, मूड, नींद, भूख और दूसरे लक्षणों को नोट किया जा सकता है।अगर कोई लक्षण केवल पीरियड्स से पहले दिखाई देता है और पीरियड्स शुरू होने के बाद कम हो जाता है, तो डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। वहीं अगर लक्षण पूरे महीने बना रहता है या हर चक्र के साथ ज्यादा गंभीर होता जा रहा है, तो यह जानकारी जांच के दौरान काफी उपयोगी हो सकती है।

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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर पीरियड्स से पहले होने वाले लक्षण आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, दर्द बहुत ज्यादा है, ब्लीडिंग असामान्य है, लक्षण लगातार बने रहते हैं या हर महीने उनकी तीव्रता बढ़ रही है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। अचानक बहुत तेज पेट या पेल्विक दर्द, बेहोशी, अत्यधिक रक्तस्राव, सांस लेने में गंभीर परेशानी या गर्भावस्था की संभावना के साथ दर्द या ब्लीडिंग जैसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।PMS एक वास्तविक और आम समस्या है, लेकिन हर परेशानी को PMS कहकर टालना सही नहीं है। अपने शरीर में होने वाले बदलावों को समझना, उनके पैटर्न पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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