Jeju Air crash: जेजू एयर विमान हादसा, 7 अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी, ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की लापरवाही की जांच तेज
Jeju Air crash, दक्षिण कोरिया के 2024 जेजू एयर विमान हादसे की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब दो साल पुराने इस भयावह विमान हादसे के मामले में पुलिस ने परिवहन मंत्रालय के सात अधिकारियों को अभियोजन के लिए भेजने की सिफारिश की है।
Jeju Air crash : जेजू एयर क्रैश में अब सरकारी अफसरों की बारी, 7 अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत; क्या थी लापरवाही?
Jeju Air crash, दक्षिण कोरिया के 2024 जेजू एयर विमान हादसे की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब दो साल पुराने इस भयावह विमान हादसे के मामले में पुलिस ने परिवहन मंत्रालय के सात अधिकारियों को अभियोजन के लिए भेजने की सिफारिश की है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने हादसे के बाद मुआन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मौजूद एक महत्वपूर्ण विमानन उपकरण यानी लोकलाइजर (Localizer) की सुरक्षा स्थिति को लेकर कथित तौर पर भ्रामक आधिकारिक दस्तावेज और प्रेस सामग्री तैयार की थी। 29 दिसंबर 2024 को हुए इस हादसे में 181 लोगों में से 179 की मौत हो गई थी। यह दक्षिण कोरिया के सबसे घातक विमान हादसों में से एक था। अब जांच का दायरा सिर्फ विमान और उसके संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा मानकों और सरकारी निगरानी की भूमिका तक पहुंच गया है।
क्या हुआ था जेजू एयर विमान के साथ?
जेजू एयर की फ्लाइट 7C2216 ने थाईलैंड के बैंकॉक से उड़ान भरी थी और दक्षिण कोरिया के मुआन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने की कोशिश कर रही थी। विमान को लैंडिंग गियर में समस्या का सामना करना पड़ा और उसने रनवे पर बेली लैंडिंग की। विमान रनवे से आगे निकल गया और एक मजबूत कंक्रीट संरचना से टकरा गया। टक्कर के बाद विमान में आग लग गई और देखते ही देखते बड़ा हादसा हो गया। विमान में सवार 181 लोगों में सिर्फ दो लोग जीवित बचे। हादसे की जांच के दौरान विमान के इंजनों में बर्ड स्ट्राइक यानी पक्षी से टकराने के निशान भी मिले थे। इसके अलावा विमान के दोनों ब्लैक बॉक्स ने दुर्घटना से करीब चार मिनट पहले रिकॉर्डिंग बंद कर दी थी। इसलिए हादसे के सभी पहलुओं को समझने के लिए जांच एजेंसियां कई अलग-अलग कोणों से मामले की पड़ताल कर रही हैं।
लोकलाइजर बना जांच का अहम केंद्र
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा लोकलाइजर सिस्टम को लेकर हुई। लोकलाइजर एक नेविगेशन उपकरण है, जो विमान को रनवे पर उतरते समय सही दिशा बनाए रखने में मदद करता है। मुआन एयरपोर्ट पर यह उपकरण एक कंक्रीट के उभरे हुए ढांचे पर लगा था। जांचकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि रनवे के अंत के पास ऐसी संरचना इतनी मजबूत क्यों थी। विमान के रनवे से बाहर निकलने के बाद इसी संरचना से टकराने पर हादसा और ज्यादा घातक होने की आशंका जताई गई। विमानन सुरक्षा नियमों में रनवे के आसपास मौजूद कुछ नेविगेशन संरचनाओं के लिए अपेक्षाकृत आसानी से टूटने या ऊर्जा सोखने वाली संरचना की जरूरत होती है, ताकि विमान के टकराने की स्थिति में नुकसान कम किया जा सके। पुलिस का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को इन नियमों की जानकारी थी।
सात अधिकारियों पर क्या आरोप है?
पुलिस के मुताबिक, परिवहन मंत्रालय के सात अधिकारियों ने हादसे के तुरंत बाद जारी की गई प्रेस सामग्री में यह दावा किया कि लोकलाइजर की स्थापना घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों को कुछ ऐसे नियमों की जानकारी थी, जो इस संरचना की स्थिति पर सवाल उठाते थे, लेकिन कथित तौर पर इन प्रावधानों को आधिकारिक सामग्री में शामिल नहीं किया गया। पुलिस का मानना है कि इस तरह मंत्रालय की ओर से जारी सामग्री ने लोकलाइजर की वास्तविक नियामकीय स्थिति को गलत तरीके से पेश किया। इसी आधार पर पुलिस ने सात अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर और गलत दस्तावेज तैयार करने जैसे आरोपों में अभियोजन की सिफारिश की है।
हादसे के तुरंत बाद जारी हुए थे बयान
पुलिस जांच के मुताबिक, हादसे के अगले दिन यानी 30 और 31 दिसंबर 2024 को मंत्रालय से संबंधित प्रेस सामग्री जारी की गई थी। इन दस्तावेजों में लोकलाइजर की स्थापना को नियमों के अनुरूप बताया गया था। पुलिस का आरोप है कि यह दावा करते समय ऐसे नियामकीय प्रावधानों को छोड़ दिया गया, जिनमें रनवे के आसपास मौजूद संरचनाओं को दुर्घटना की स्थिति में कम नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री से बनाए जाने की जरूरत बताई गई थी। यही वजह है कि अब मामला सिर्फ दुर्घटना की तकनीकी वजहों तक सीमित नहीं रहा है। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि दुर्घटना के बाद सरकारी एजेंसियों ने जनता और मीडिया को सही जानकारी दी थी या नहीं।
दोष साबित हुआ तो हो सकती है सजा
पुलिस ने मामले को अभियोजन पक्ष के पास भेजते हुए अधिकारियों पर दस्तावेजों से जुड़ी आपराधिक धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्टों के मुताबिक, यदि संबंधित आरोप साबित होते हैं तो सात साल तक की जेल जैसी सजा का प्रावधान हो सकता है। हालांकि अभी यह केवल पुलिस की कार्रवाई और अभियोजन की सिफारिश है; अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है। यानी फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सातों अधिकारी दोषी पाए गए हैं। अभियोजन पक्ष मामले की समीक्षा करेगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों पर अंतिम फैसला होगा।
जांच में करीब 70 और लोग भी घेरे में
मामले की जांच का दायरा इससे कहीं बड़ा है। पुलिस करीब 70 अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। इनमें एयरपोर्ट संचालन, लोकलाइजर की स्थापना और उससे जुड़े दूसरे कामों में शामिल लोग भी बताए जा रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि लोकलाइजर की संरचना किस प्रक्रिया के तहत बनाई गई, उसकी सुरक्षा जांच कैसे हुई और संबंधित अधिकारियों ने नियमों के पालन की निगरानी किस तरह की।
इससे पहले भी अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
जेजू एयर हादसे के बाद सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अप्रैल 2026 में एक सरकारी जांच में सामने आया था कि शवों और मलबे को संभालने की प्रक्रिया में पर्याप्त दिशानिर्देश और निगरानी की कमी रही। उस जांच के बाद 12 संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इनमें परिवहन मंत्रालय और विमान दुर्घटना जांच बोर्ड से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। अब सात अधिकारियों को आपराधिक मामले में अभियोजन के लिए भेजे जाने से सरकारी जवाबदेही का मुद्दा और गंभीर हो गया है।
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हादसे की अंतिम वजह अभी तय नहीं
हालांकि लोकलाइजर संरचना को लेकर जांच में गंभीर सवाल उठे हैं, लेकिन 2024 जेजू एयर हादसे की अंतिम आधिकारिक वजह अभी पूरी तरह तय नहीं हुई है। विमान के इंजन में पक्षी से टकराने के संकेत, लैंडिंग गियर की समस्या, रनवे से बाहर निकलना और कंक्रीट संरचना से टक्कर—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस की जांच के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत विमान दुर्घटना जांच बोर्ड भी अपनी अलग जांच कर रहा है। पुलिस ने संकेत दिया है कि अपनी जांच के अंतिम नतीजे विमान दुर्घटना जांच की व्यापक प्रक्रिया के साथ तालमेल में जारी किए जाएंगे।
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अब आगे क्या होगा?
सात अधिकारियों को अभियोजन के लिए भेजे जाने के बाद अब अगला चरण अभियोजकों की समीक्षा और संभावित कानूनी कार्रवाई का होगा। यदि अभियोजन पक्ष पर्याप्त सबूत पाता है, तो आरोपों को अदालत में आगे बढ़ाया जा सकता है। इस पूरे मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सिर्फ एक विमान दुर्घटना की जांच नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों, सरकारी निगरानी और दुर्घटना के बाद सार्वजनिक जानकारी की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला बन चुका है। जेजू एयर हादसे में 179 लोगों की जान गई थी। ऐसे में पीड़ित परिवारों के लिए यह जांच बेहद महत्वपूर्ण है। सात अधिकारियों के खिलाफ ताजा कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिला है कि दक्षिण कोरिया में हादसे की जिम्मेदारी तय करने की कोशिश अब और गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। लेकिन अंतिम जिम्मेदारी और दुर्घटना की पूरी वजह का पता चलने के लिए अभी अभियोजन और आधिकारिक विमान दुर्घटना जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना होगा।
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