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Nepal flood: नेपाल में बाढ़ बनी काल! 165 शव मिले, 1500 लोग अब भी लापता, लिस्ट में 300 भारतीय भी शामिल

Nepal flood, नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया।

Nepal flood : नेपाल बाढ़ में मची तबाही, 165 शव बरामद और 1500 लोग गायब; 300 भारतीयों की तलाश तेज

Nepal flood, नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, कम से कम 165 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर करीब 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों और पर्यटकों की है। नेपाल में अकेले 826 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

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भोटेकोशी नदी में अचानक आया सैलाब

यह आपदा बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास शुरू हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में बर्फ, चट्टान और मलबे के बड़े पैमाने पर खिसकने के बाद नदी में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया। इससे भोटेकोशी और आसपास की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। देखते ही देखते पानी ने सड़कों, पुलों, इमारतों और कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।रॉयटर्स के मुताबिक, इस घटना के पीछे ग्लेशियर के निचले हिस्से के टूटने की आशंका जताई जा रही है। इसके कारण बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल प्रवाह नदी की घाटी में पहुंचा और फ्लैश फ्लड में बदल गया। प्रभावित क्षेत्र में सड़क और बिजली जैसी जरूरी सुविधाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

165 शव बरामद, बढ़ सकती है मृतकों की संख्या

बचाव दलों ने अब तक 165 शव बरामद किए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के बाद मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा है, जिससे राहतकर्मियों को तलाशी अभियान में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, नेपाल में 826 लोग लापता हैं और 73 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, नेपाल और चीन के प्रभावित इलाकों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 बताई जा रही है।

300 भारतीयों के लापता होने की खबर

इस प्राकृतिक आपदा ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 300 भारतीय पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा और दूसरे पर्यटन मार्गों पर थे। भारतीय नागरिकों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों के नागरिक भी प्रभावित क्षेत्र में मौजूद थे। भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों से उन लोगों का विवरण साझा करने को कहा है, जो बाढ़ प्रभावित इलाकों में गए थे और जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसमें नाम, संपर्क नंबर और अन्य जरूरी जानकारी शामिल है, ताकि संबंधित परिवारों और सरकारी एजेंसियों के बीच संपर्क बेहतर बनाया जा सके।

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कई सड़कें और पुल तबाह

बाढ़ की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक प्रभावित इलाकों तक पहुंचना है। तेज पानी और मलबे ने कई सड़कों और पुलों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। कुछ इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। इसके कारण लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश करने में परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर जमीन और सड़कें मलबे से ढक गई हैं। ऐसे में बचाव दलों को पहले रास्ते साफ करने पड़ रहे हैं, जिसके बाद प्रभावित गांवों और बस्तियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

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हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन

नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। जहां सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है, वहां हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। अब तक दर्जनों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, भारत समेत पड़ोसी देशों से भी आपातकालीन सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। बचाव अभियान के दौरान प्रशासन की प्राथमिकता उन इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना है, जहां संचार व्यवस्था बाधित है। इसके साथ ही लापता लोगों की सूची तैयार कर उनके परिवारों तक जानकारी पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरे की चिंता

इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लेशियरों में बदलाव, तेजी से बर्फ पिघलना और चरम मौसम की घटनाएं पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ा सकती हैं। हालांकि इस विशेष घटना के सटीक कारणों और इसमें ग्लेशियर की भूमिका को लेकर वैज्ञानिक आकलन अभी जारी है। नेपाल और चीन दोनों ही प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। दूसरी ओर, भारत भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार जानकारी जुटा रहा है।

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राहत अभियान के बीच बढ़ी उम्मीद

नेपाल की इस त्रासदी में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने के बावजूद राहत अभियान लगातार जारी है। बचाव दल मलबे में जीवन के संकेत तलाश रहे हैं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। आने वाले घंटों में लापता लोगों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक पहुंचना, मलबा हटाना और लापता लोगों की पहचान करना है। 165 मौतों और करीब 1,500 लोगों के लापता होने वाली यह आपदा नेपाल और पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक गंभीर मानवीय संकट बन गई है। बचाव एवं राहत अभियान के आगे बढ़ने के साथ ही नुकसान की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।

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