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Halim seeds: हलीम के बीज खाने से पहले जान लें ये बात, भीगोकर या उबालकर खाने में क्या है ज्यादा फायदा?

Halim seeds, आजकल डाइट में छोटे-छोटे बीजों को शामिल करने का चलन बढ़ रहा है। इन्हीं में से एक है हलीम के बीज, जिन्हें गार्डन क्रेस सीड्स, अलीव या हलीव के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय घरों में इनका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से लड्डू, दूध और दूसरी रेसिपीज में किया जाता रहा है।

Halim seeds : आयरन से भरपूर हलीम के बीज, लेकिन खाने का तरीका भी है जरूरी; भीगोकर या उबालकर?

Halim seeds, आजकल डाइट में छोटे-छोटे बीजों को शामिल करने का चलन बढ़ रहा है। इन्हीं में से एक है हलीम के बीज, जिन्हें गार्डन क्रेस सीड्स, अलीव या हलीव के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय घरों में इनका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से लड्डू, दूध और दूसरी रेसिपीज में किया जाता रहा है। हलीम के बीजों में आयरन, प्रोटीन, फाइबर और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते है लेकिन सवाल यह है कि हलीम के बीजों को भिगोकर खाना ज्यादा फायदेमंद है या उबालकर? खासकर अगर आपका उद्देश्य इनके आयरन का बेहतर उपयोग करना है, तो उपलब्ध शोध के आधार पर उबालने का तरीका दिलचस्प नजर आता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उबले हुए बीज हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य रूप से बेहतर हैं। आइए जानते हैं हलीम के बीजों को खाने का सही तरीका और इससे जुड़ी जरूरी बातें।

हलीम के बीजों में क्यों होता है आयरन?

हलीम यानी गार्डन क्रेस सीड्स को पोषक तत्वों से भरपूर बीज माना जाता है। इनमें आयरन के साथ प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग खाद्य डेटाबेस और अध्ययनों में इनके आयरन की मात्रा अलग-अलग बताई गई है, इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले बहुत बड़े आयरन आंकड़ों को बिना स्रोत के सही मानना ठीक नहीं है। एक शोध में गार्डन क्रेस सीड्स को प्रोसेस करने के अलग-अलग तरीकों—जैसे भिगोना, उबालना और भूनना—का पोषण पर प्रभाव देखा गया। इसमें पाया गया कि प्रोसेसिंग से बीजों के पोषक तत्वों और कुछ एंटी-न्यूट्रिएंट्स में बदलाव आया।

भिगोकर खाने के क्या फायदे हैं?

हलीम के बीजों को पानी में भिगोने पर इनके ऊपर एक जेली जैसी परत बन जाती है। यही वजह है कि इन्हें सीधे खाने की तुलना में भिगोकर खाना कई लोगों को ज्यादा आसान लगता है। भिगोने से बीज नरम हो जाते हैं और इन्हें चबाना और पचाना भी अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।कुछ शोधों में भिगोने से पोषण संबंधी गुणों में सुधार और कुछ एंटी-न्यूट्रिएंट्स में कमी के संकेत मिले हैं। 2023 के एक अध्ययन में 12 घंटे भिगोने के बाद भूनने की प्रक्रिया से फाइटेट और ऑक्सलेट जैसे एंटी-न्यूट्रिएंट्स में कमी देखी गई। इसलिए अगर आपको हलीम के बीज सीधे खाना मुश्किल लगता है, तो उन्हें रातभर भिगोकर सुबह सेवन करना एक आसान तरीका हो सकता है।

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क्या उबालने से आयरन ज्यादा उपलब्ध होता है?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आती है। 2016 में प्रकाशित एक अध्ययन में गार्डन क्रेस सीड्स पर अलग-अलग प्रोसेसिंग विधियों का परीक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि उबालने वाले नमूनों में आयरन की ionizable मात्रा और in-vitro bioavailability सबसे ज्यादा थी। उबालने से कुछ एंटी-न्यूट्रिएंट्स में भी कमी आई और स्टार्च तथा प्रोटीन की इन-विट्रो पाचन क्षमता बेहतर हुई। इस आधार पर अगर सवाल सिर्फ आयरन की जैव-उपलब्धता का है, तो उपलब्ध इस शोध में उबले हुए हलीम के बीजों ने भिगोए हुए बीजों की तुलना में बेहतर परिणाम दिखाए।लेकिन इसे यह कहकर नहीं समझना चाहिए कि हर परिस्थिति में उबालना ही सबसे अच्छा तरीका है। अध्ययन प्रयोगशाला परिस्थितियों में किया गया था और वास्तविक शरीर में आयरन का अवशोषण व्यक्ति की पूरी डाइट, स्वास्थ्य और आयरन की स्थिति पर निर्भर करता है।

तो हलीम के बीज कैसे खाएं?

अगर आप इन्हें नियमित डाइट में शामिल करना चाहते हैं, तो एक आसान तरीका है कि बीजों को पानी में भिगोकर नरम करें और फिर इन्हें किसी पौष्टिक भोजन के साथ लें। वहीं अगर आप उपलब्ध शोध के आधार पर आयरन की जैव-उपलब्धता पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, तो हल्का उबालना भी विकल्प हो सकता है।2023 के अध्ययन में भिगोने के बाद रोस्टिंग वाले संयोजन से भी पोषण संबंधी फायदे और एंटी-न्यूट्रिएंट्स में कमी देखी गई थी। यानी केवल एक ही प्रक्रिया को ‘सर्वश्रेष्ठ’ कहना सही नहीं होगा।

नींबू के साथ खाना हो सकता है बेहतर विकल्प

पौधों से मिलने वाला आयरन मुख्य रूप से non-heme iron होता है, जिसका शरीर में अवशोषण पशु स्रोतों के heme iron से अलग होता है। इसलिए आयरन वाले पौधों के खाद्य पदार्थों के साथ विटामिन C से भरपूर चीजें लेना उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, भिगोए या पकाए हुए हलीम के बीजों को नींबू, आंवला या किसी अन्य विटामिन-C युक्त खाद्य पदार्थ के साथ डाइट में शामिल किया जा सकता है। विटामिन C पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में मदद कर सकता है।

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कितनी मात्रा में खाना चाहिए?

हलीम के बीज पोषक जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें बहुत ज्यादा मात्रा में खाना शुरू कर दिया जाए। एक सामान्य डाइट में छोटी मात्रा से शुरुआत करना बेहतर है। उदाहरण के तौर पर इन्हें दूध, दही, दलिया, स्मूदी या घर में बने लड्डू में शामिल किया जा सकता है।अगर आप पहली बार हलीम ले रही हैं, तो कम मात्रा से शुरुआत करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें। किसी विशेष बीमारी, दवा या चिकित्सकीय स्थिति में नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

क्या हलीम से आयरन की कमी पूरी हो सकती है?

यह बात समझना बहुत जरूरी है कि हलीम के बीज आयरन वाली डाइट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ इन्हीं पर निर्भर रहकर आयरन की कमी या एनीमिया का इलाज नहीं करना चाहिए।अगर किसी व्यक्ति की जांच में हीमोग्लोबिन या फेरिटिन कम पाया गया है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार कारण की पहचान और उचित उपचार जरूरी है। केवल घरेलू खाद्य पदार्थों से गंभीर आयरन की कमी को ठीक करने की कोशिश करने से इलाज में देरी हो सकती है।

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भिगोना या उबालना—किसे चुनें?

अगर सवाल है ‘भिगोकर या उबालकर?’, तो उपलब्ध शोध में उबालने से आयरन की bioavailability के बेहतर संकेत मिले हैं वहीं भिगोना भी उपयोगी विकल्प है, खासकर जब उद्देश्य बीजों को नरम करना, पाचन आसान बनाना और रोजाना डाइट में इन्हें शामिल करना हो। 2023 के शोध में भिगोने के बाद रोस्टिंग से एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम होने और पोषण संबंधी गुणों में सुधार के संकेत मिले। इसलिए हलीम के बीजों को भिगोकर या उचित तरीके से पकाकर खाना दोनों ही विकल्प हो सकते हैं। अगर आपका खास उद्देश्य आयरन का बेहतर उपयोग है, तो इन्हें विटामिन C वाले खाद्य पदार्थ के साथ लेना भी महत्वपूर्ण है।हलीम के बीज छोटे जरूर हैं, लेकिन पोषण के लिहाज से इन्हें डाइट में जगह दी जा सकती है। आयरन की उपलब्धता के लिहाज से उबालने पर बेहतर परिणाम मिलने का शोध मौजूद है, जबकि भिगोने से बीज नरम होते हैं और कुछ पोषण संबंधी बदलाव भी देखे गए हैं।

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