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Nirmala Sitharaman: युवाओं को साधने की तैयारी में PSBs, सीतारमण ने सुझाए फ्री कोर्स से लेकर Yuva Kiosk तक के आइडिया

Nirmala Sitharaman, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी PSBs (Public Sector Banks) को युवाओं और खासकर Gen Z ग्राहकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। 18-19 अगस्त 2026 को आयोजित PSB Confluence 2026 के समापन सत्र में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों को अपनी पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर युवा ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग सेवाएं विकसित करनी होंगी।

Nirmala Sitharaman : कॉलेज कैंपस से बैंकिंग तक, Gen Z को जोड़ने के लिए सीतारमण ने PSBs को दिया नया रोडमैप

Nirmala Sitharaman, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी PSBs (Public Sector Banks) को युवाओं और खासकर Gen Z ग्राहकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। 18-19 अगस्त 2026 को आयोजित PSB Confluence 2026 के समापन सत्र में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों को अपनी पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर युवा ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग सेवाएं विकसित करनी होंगी। सीतारमण ने जोर दिया कि PSBs को सिर्फ बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छात्र जीवन से लेकर पहली नौकरी, उच्च शिक्षा, बिजनेस और निवेश तक युवाओं के साथ लंबे समय का संबंध बनाना चाहिए। उनका लक्ष्य है कि युवा भारतीयों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पहली और सबसे भरोसेमंद बैंकिंग पसंद बनें।

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‘सरकारी बैंक’ की पारंपरिक छवि बदलने की जरूरत

वित्त मंत्री ने PSBs की उस छवि पर चिंता जताई जिसमें युवा ग्राहक अक्सर निजी बैंकों को ज्यादा आधुनिक और आकर्षक मानते हैं। उन्होंने बैंकों से युवाओं से सीधे संवाद करने और यह समझने को कहा कि आखिर वे बैंकिंग सेवा में क्या चाहते हैं।सीतारमण के अनुसार, सरकारी बैंकों को ‘कूल’ और आधुनिक बनने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन इसके साथ बैंकिंग की गंभीरता, सुरक्षा और जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार से समझौता नहीं होना चाहिए। यानी युवाओं को आकर्षित करने के लिए बैंकिंग को आसान और आकर्षक बनाना है, लेकिन भरोसे और वित्तीय अनुशासन को बनाए रखना भी जरूरी है।

2 अक्टूबर से शुरू हो सकता है ‘Banking for Youth’ अभियान

वित्त मंत्री ने PSBs से 2 अक्टूबर 2026 से एक महीने का ‘Banking for Youth’ अभियान शुरू करने पर विचार करने को कहा है। इसमें खासतौर पर 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के युवाओं पर ध्यान दिया जाएगा। अभियान का मकसद युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से शुरुआती स्तर पर जोड़ना और उनके साथ लंबे समय का वित्तीय रिश्ता बनाना होगा। इस अभियान को केवल बैंक शाखाओं तक सीमित रखने के बजाय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य कैंपस तक ले जाने का सुझाव दिया गया है। यहां युवाओं को बैंक खाते, वित्तीय जागरूकता और बैंकिंग सेवाओं के बारे में सीधे जानकारी दी जा सकती है।

कॉलेज कैंपस में पहुंचे बैंक

सीतारमण ने कहा कि युवाओं के बैंक आने का इंतजार करने के बजाय बैंकों को खुद उनके बीच जाना चाहिए। कॉलेज और विश्वविद्यालय इसके लिए महत्वपूर्ण माध्यम हो सकते हैं।कैंपस में बैंकिंग जागरूकता कार्यक्रम, खाता खोलने की सुविधा और वित्तीय शिक्षा से जुड़े अभियान चलाए जा सकते हैं। इससे पहली बार बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने वाले युवाओं को शुरुआती स्तर पर ही सही जानकारी मिल सकेगी।इस रणनीति का उद्देश्य सिर्फ नए खाते बढ़ाना नहीं है, बल्कि युवाओं को बचत, क्रेडिट, निवेश और वित्तीय योजना की बुनियादी समझ देना भी है।

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‘Yuva Kiosk’ और ‘Yuva Banking Mitra’ की सलाह

वित्त मंत्री ने बैंक शाखाओं को भी युवाओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने का सुझाव दिया। इसके लिए शाखाओं में ‘Yuva Kiosk’ या ‘Yuva Banking Mitra’ जैसे विशेष केंद्र बनाए जा सकते हैं।इन केंद्रों पर एक समर्पित कर्मचारी युवा ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से बैंकिंग सेवाओं की जानकारी दे सकता है। मसलन, पहला बैंक अकाउंट, डिजिटल बैंकिंग, एजुकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड, निवेश या बिजनेस लोन से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे उन युवाओं को भी मदद मिल सकती है जो बैंकिंग की तकनीकी भाषा और प्रक्रियाओं को लेकर असमंजस में रहते हैं।

मुफ्त ऑनलाइन कोर्स और स्किल डेवलपमेंट

युवाओं को आकर्षित करने के लिए सीतारमण ने बैंकिंग सेवाओं के साथ फ्री ऑनलाइन लर्निंग कंटेंट उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। इसके लिए बैंक प्रतिष्ठित एजुकेशनल प्लेटफॉर्म और संस्थानों के साथ साझेदारी कर सकते हैं। इसमें स्किल डेवलपमेंट, वित्तीय साक्षरता, करियर और डिजिटल क्षमताओं से जुड़े कोर्स शामिल किए जा सकते हैं। इससे बैंक और युवा ग्राहक के बीच संबंध सिर्फ लेन-देन तक सीमित नहीं रहेगा।

फिटनेस और वेलनेस से जुड़े ऑफर

वित्त मंत्री ने युवाओं के लिए बैंकिंग को अधिक आकर्षक बनाने के लिए लाइफस्टाइल बेनिफिट्स का भी सुझाव दिया। इनमें फिटनेस सेंटर, योग केंद्र और विश्वसनीय मेंटल वेलनेस प्लेटफॉर्म के कूपन या वाउचर शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य बैंकिंग को युवाओं की रोजमर्रा की जरूरतों और लाइफस्टाइल से जोड़ना है। इससे PSBs को निजी बैंकों और फिनटेक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है।

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क्रेडिट स्कोर की जानकारी देना भी जरूरी

सीतारमण ने युवाओं के बीच क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा उम्र से ही जिम्मेदार क्रेडिट व्यवहार के बारे में जानें, ताकि भविष्य में उन्हें लोन या बिजनेस के लिए वित्तीय सहायता लेने में आसानी हो।बैंकों को युवाओं को अलग-अलग क्रेडिट उत्पादों, सरकारी ऋण योजनाओं और अच्छे क्रेडिट स्कोर के फायदे के बारे में समझाने की जरूरत है। खासकर ऐसे युवा जो भविष्य में स्टार्टअप या छोटा कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह जानकारी बेहद उपयोगी हो सकती है।

बैंकिंग सिर्फ पहली नौकरी तक सीमित न रहे

वित्त मंत्री ने PSBs को ‘लाइफसाइकिल बैंकिंग’ का नजरिया अपनाने की सलाह दी। इसका मतलब है कि बैंक किसी युवा के जीवन के अलग-अलग वित्तीय पड़ावों में उसके साथ जुड़ा रहे।पहला बैंक अकाउंट खोलने से लेकर पहली सैलरी, उच्च शिक्षा के लिए लोन, कारोबार शुरू करने के लिए फाइनेंस और पहला निवेश करने तक बैंक ग्राहक के साथ बना रहे। यह रणनीति बैंकों के लिए भी फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि कम उम्र में जुड़ा ग्राहक भविष्य में लंबे समय तक बैंक की सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है।

युवाओं के लिए अलग पोर्टल का सुझाव

सीतारमण ने Indian Banks Association (IBA) से युवाओं के लिए एक समर्पित बैंकिंग जागरूकता पोर्टल शुरू करने की संभावना तलाशने को भी कहा। इस पोर्टल पर युवाओं की जरूरत से जुड़ी बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय अवसरों की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। ऐसा प्लेटफॉर्म युवाओं को अलग-अलग बैंकिंग उत्पादों और सरकारी योजनाओं को समझने में मदद कर सकता है।

भारत की युवा आबादी बनी बड़ा अवसर

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। आने वाले वर्षों में युवा आबादी देश की बचत, निवेश, उपभोग, उद्यमिता और संपत्ति निर्माण को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभाएगी। ऐसे में वित्त मंत्री का जोर PSBs को अभी से इस ग्राहक वर्ग के लिए तैयार करने पर है। युवा ग्राहकों की डिजिटल आदतें पारंपरिक बैंकिंग से अलग हैं। वे तेज, सरल और 24 घंटे उपलब्ध सेवाओं की उम्मीद करते हैं। इसलिए PSBs के लिए तकनीक और व्यक्तिगत ग्राहक अनुभव को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।

PSBs के लिए नई चुनौती और अवसर

सीतारमण के सुझावों से साफ है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सामने सिर्फ युवा ग्राहकों की संख्या बढ़ाने की चुनौती नहीं है, बल्कि युवाओं का भरोसा जीतने की भी जरूरत है।अगर PSBs डिजिटल सुविधा, बेहतर ग्राहक सेवा, वित्तीय शिक्षा, युवा-केंद्रित उत्पाद और व्यक्तिगत मार्गदर्शन को एक साथ जोड़ पाते हैं तो वे युवा ग्राहकों के बीच अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं।

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