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Amit Shah: अमित शाह का कांग्रेस पर बड़ा वार, वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने पर उठाए सवाल

Amit Shah, देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की ओर से पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो छंद गाने के फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है।

Amit Shah : ‘तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् को बांटा’, अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया बड़ा आरोप

Amit Shah, देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की ओर से पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो छंद गाने के फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। 20 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान शाह ने कांग्रेस के इस फैसले को ‘देश विरोधी’ बताया और आरोप लगाया कि पार्टी एक बार फिर तुष्टीकरण की राजनीति की ओर लौट रही है।

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अमित शाह ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने का फैसला लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह रुख 1937 के उस फैसले से जुड़ा है, जब पार्टी ने वंदे मातरम् के गायन को लेकर बदलाव किया था।शाह ने दावा किया कि 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया और इससे देश के विभाजन की परिस्थितियां मजबूत हुईं। उनके मुताबिक, इसी दौर में दो राष्ट्र के सिद्धांत को ताकत मिली और बाद में देश का विभाजन हुआ।हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 1937 के कांग्रेस के फैसले और भारत के विभाजन के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध बताना अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इस मुद्दे पर इतिहास और राजनीति के अलग-अलग पक्ष मौजूद हैं।

1937 में क्या हुआ था?

वंदे मातरम् मूल रूप से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना है। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवादी भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। कांग्रेस के कार्यक्रमों में भी इसका इस्तेमाल लंबे समय तक होता रहा।1937 में कांग्रेस के भीतर वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को लेकर चर्चा हुई। उस समय पार्टी ने मुख्य रूप से शुरुआती दो छंदों के इस्तेमाल का फैसला किया। इसके पीछे धार्मिक भावनाओं और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने से जुड़े तर्क भी दिए गए थे।आज यही ऐतिहासिक फैसला राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। बीजेपी इसे कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी अपने पुराने ऐतिहासिक फैसले के अनुसार ही चल रही है।

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मोदी सरकार ने भी उठाया है मुद्दा

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने वंदे मातरम् से जुड़ी पुरानी स्थिति को सुधारने की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने वंदे मातरम् के पूर्ण स्वरूप को सरकारी कार्यक्रमों में सम्मान देने और उसके संपूर्ण गायन को बढ़ावा देने का फैसला किया है।शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी इस फैसले की अनदेखी कर रही है। उनके मुताबिक, वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की भावना से जुड़ा प्रतीक है। उन्होंने उन स्वतंत्रता सेनानियों का भी जिक्र किया जिन्होंने आजादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए और बलिदान दिया।

राहुल गांधी की कांग्रेस पर भी निशाना

अमित शाह ने अपने बयान में कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर तुष्टीकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है।बीजेपी का कहना है कि राष्ट्रगीत के पूर्ण स्वरूप के बजाय केवल दो छंदों को प्राथमिकता देना राष्ट्रीय भावना से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक समझौता है। पार्टी के कई अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस के CWC प्रस्ताव की आलोचना की है।

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर उसका रुख ऐतिहासिक निर्णय पर आधारित है और इसे तुष्टीकरण की राजनीति बताना सही नहीं है।कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और अन्य नेताओं के बीच वंदे मातरम् के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। पार्टी का कहना है कि उसने उसी ऐतिहासिक व्यवस्था को आगे बढ़ाया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी बीजेपी पर वंदे मातरम् के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विभिन्न नेताओं के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि देशभक्ति किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है।

गोवा की बैठक से भी जुड़ा विवाद

वंदे मातरम् को लेकर विवाद केवल CWC के फैसले तक सीमित नहीं है। हाल ही में गोवा में कांग्रेस की एक बैठक का वीडियो सामने आने के बाद भी बीजेपी ने पार्टी पर निशाना साधा था। दावा किया गया कि बैठक में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो छंद गाए गए और इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी के कई नेता मौजूद थे।बीजेपी ने इसे कांग्रेस की सोच का उदाहरण बताया। वहीं गोवा कांग्रेस के विधायक एल्टन डी’कोस्टा ने कहा कि कांग्रेस को किसी के सामने अपनी देशभक्ति साबित करने की जरूरत नहीं है।

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15 अगस्त के बाद बढ़ा विवाद

वंदे मातरम् को लेकर मौजूदा विवाद स्वतंत्रता दिवस के आसपास शुरू हुए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद और तेज हुआ। कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम् गाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए गए थे। कांग्रेस ने कुछ दावों को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी मुख्यालय में पूरा राष्ट्रगीत गाया गया था। इसके बाद गोवा की बैठक और CWC के रुख ने विवाद को फिर राजनीतिक बहस में ला दिया।

बीजेपी का कहना- अब तुष्टीकरण नहीं चलेगा

बीजेपी नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत है और इसके सम्मान में किसी तरह की कटौती नहीं होनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है।अमित शाह ने भी कहा कि देश में अब तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने कांग्रेस के फैसले को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जोड़ते हुए पार्टी की आलोचना की और लोगों से इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख का विरोध करने की अपील की।

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मुद्दे पर आगे भी जारी रह सकती है सियासत

वंदे मातरम् का मुद्दा अब केवल गीत के गायन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ 1937 का कांग्रेस का ऐतिहासिक फैसला, स्वतंत्रता आंदोलन, धार्मिक भावनाएं, राष्ट्रवाद और तुष्टीकरण की राजनीति जैसे कई सवाल जुड़ गए हैं।एक तरफ बीजेपी कांग्रेस के मौजूदा फैसले को उसके पुराने रुख से जोड़कर हमला कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे ऐतिहासिक परंपरा और समावेशी दृष्टिकोण से जोड़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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