Greater Noida transport, गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट सिर्फ 40 मिनट दूर! NCRTC ने तैयार किया बड़ा प्लान, जानें कितने स्टेशन होंगे
Greater Noida transport, दिल्ली-NCR में सार्वजनिक परिवहन को और तेज, सुविधाजनक और आपस में जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। गाजियाबाद से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर को लेकर NCRTC की नई योजना चर्चा में है।
Greater Noida transport : NCR में ट्रांसपोर्ट का नया गेमचेंजर! गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर में 11 नमो भारत और 18 मेट्रो स्टेशन
Greater Noida transport, दिल्ली-NCR में सार्वजनिक परिवहन को और तेज, सुविधाजनक और आपस में जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। गाजियाबाद से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर को लेकर NCRTC की नई योजना चर्चा में है। करीब 72.4 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का उद्देश्य गाजियाबाद को सीधे जेवर एयरपोर्ट से जोड़ना है। रिपोर्टों के मुताबिक इस रूट पर नमो भारत और मेट्रो सेवाओं के लिए कुल 23 स्टेशनों की योजना सामने आई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली-NCR के यात्रियों को जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा। NCRTC के प्रस्ताव में तेज रफ्तार नमो भारत सेवा के साथ स्थानीय यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मेट्रो कनेक्टिविटी को भी शामिल किया गया है।
72 किलोमीटर से ज्यादा लंबा होगा कॉरिडोर
प्रस्तावित गाजियाबाद-जेवर RRTS कॉरिडोर की लंबाई करीब 72.44 किलोमीटर बताई जा रही है। यह लाइन गाजियाबाद के मौजूदा नमो भारत स्टेशन से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा के रास्ते जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचेगी। इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR के बड़े हिस्से को जेवर एयरपोर्ट से जोड़ना है। इससे गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने का तेज विकल्प मिल सकता है।
11 नमो भारत और 18 मेट्रो स्टेशनों की योजना
नई रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित नेटवर्क में 11 नमो भारत स्टेशन और 18 मेट्रो स्टेशन शामिल करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस तरह पूरे कॉरिडोर पर कुल 23 स्टेशन होंगे, जिनमें कुछ स्थानों पर दोनों सेवाओं के बीच इंटरचेंज की सुविधा विकसित की जा सकती है। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि नमो भारत मुख्य रूप से लंबी दूरी और क्षेत्रीय यात्रा को तेज करने के लिए इस्तेमाल होगा, जबकि मेट्रो सेवा स्थानीय इलाकों के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी देने में मदद करेगी।NCRTC खुद नमो भारत को क्षेत्रीय परिवहन प्रणाली के तौर पर विकसित कर रहा है, जबकि मेट्रो सेवाएं शहरों के भीतर छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए ज्यादा उपयोगी होती हैं। दोनों प्रणालियों को जोड़ने से यात्रियों को एक बड़े ट्रांजिट नेटवर्क का फायदा मिल सकता है।
40 मिनट में गाजियाबाद से जेवर पहुंचने का दावा
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसकी यात्रा समय में कमी होगी। रिपोर्टों के मुताबिक गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक की यात्रा करीब 40-50 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है। कुछ रिपोर्टों में लगभग 40 मिनट का यात्रा समय बताया गया है, हालांकि अंतिम समय कॉरिडोर के डिजाइन, स्टॉपेज और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा। वर्तमान में सड़क मार्ग से गाजियाबाद से जेवर तक पहुंचने में ट्रैफिक और समय के हिसाब से काफी अंतर हो सकता है। ऐसे में तेज गति वाली क्षेत्रीय रेल सेवा यात्रियों के लिए अधिक भरोसेमंद विकल्प बन सकती है।
180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की डिजाइन स्पीड
नमो भारत कॉरिडोर को तेज रफ्तार क्षेत्रीय परिवहन के लिए डिजाइन किया जाता है। गाजियाबाद-जेवर परियोजना के लिए भी करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड की जानकारी सामने आई है। हालांकि डिजाइन स्पीड और वास्तविक परिचालन गति अलग हो सकती है। NCRTC के मौजूदा नमो भारत नेटवर्क में भी तेज गति, कम यात्रा समय और नियमित ट्रेन फ्रीक्वेंसी को प्रमुख विशेषताओं के तौर पर विकसित किया गया है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर इसका उदाहरण है, जिसे NCR में क्षेत्रीय यात्रा को तेज बनाने के लिए तैयार किया गया है।
जेवर एयरपोर्ट के लिए बनेगा बड़ा कनेक्टिविटी लिंक
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास के साथ उसके आसपास मजबूत सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की जरूरत लगातार बढ़ रही है। एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए केवल सड़क नेटवर्क पर्याप्त नहीं होगा, इसलिए हाई-स्पीड रेल, मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक परिवहन विकल्पों को जोड़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में अहम परियोजना हो सकता है। इससे गाजियाबाद के अलावा ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों को एयरपोर्ट से बेहतर कनेक्शन मिल सकता है।
DPR स्टेज में पहुंच चुका है प्रोजेक्ट
फिलहाल यह परियोजना निर्माण के चरण में नहीं पहुंची है। गाजियाबाद-जेवर RRTS कॉरिडोर Detailed Project Report यानी DPR चरण में है। NCRTC की ओर से परियोजना की विस्तृत तकनीकी और वित्तीय योजना तैयार की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक कॉरिडोर की अनुमानित लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। हालांकि अंतिम लागत और निर्माण की समयसीमा सरकार की मंजूरी तथा DPR को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।
किन इलाकों को मिलेगा फायदा?
इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और जेवर के यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा दिल्ली और NCR के दूसरे हिस्सों से आने वाले यात्रियों को इंटरचेंज के जरिए जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने का नया विकल्प मिल सकता है।गाजियाबाद पहले से ही दिल्ली-मेरठ नमो भारत नेटवर्क से जुड़ा है। इसलिए भविष्य में गाजियाबाद से जेवर तक नया कॉरिडोर बनने पर यात्रियों के लिए क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क का दायरा काफी बढ़ सकता है।
रोजाना आने-जाने वालों के लिए भी उपयोगी
जेवर एयरपोर्ट को सिर्फ हवाई यात्रियों के लिए नहीं बल्कि आसपास तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय विकास बढ़ने के साथ रोजाना यात्रा करने वालों की संख्या भी बढ़ सकती है।ऐसे में सिर्फ एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के बजाय नौकरी, कारोबार और शिक्षा के लिए यात्रा करने वाले लोगों को भी इस कॉरिडोर से फायदा मिल सकता है।
रियल एस्टेट और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा
बड़े परिवहन कॉरिडोर का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहता। बेहतर कनेक्टिविटी के साथ स्टेशन के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां, आवासीय परियोजनाएं और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर भी यमुना एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। रिपोर्टों में इस परियोजना से क्षेत्रीय आर्थिक विकास और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट की संभावनाओं का उल्लेख किया गया है।
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अभी करना होगा मंजूरी का इंतजार
हालांकि यात्रियों को अभी इस कॉरिडोर पर सफर करने के लिए इंतजार करना होगा। फिलहाल परियोजना DPR स्तर पर है और इसके बाद विभिन्न स्तरों पर मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति, टेंडर और निर्माण जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।इसलिए 40 मिनट का यात्रा समय और 11 नमो भारत-18 मेट्रो स्टेशनों की योजना फिलहाल प्रस्तावित परियोजना का हिस्सा है, इसे मौजूदा सेवा या अंतिम रूप से स्वीकृत टाइमटेबल नहीं माना जाना चाहिए।
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क्या बदलेगा दिल्ली-NCR का ट्रांसपोर्ट नेटवर्क?
अगर यह कॉरिडोर प्रस्तावित स्वरूप में विकसित होता है तो दिल्ली-NCR में क्षेत्रीय परिवहन का नेटवर्क और मजबूत होगा। गाजियाबाद से मेरठ की दिशा में पहले से मौजूद नमो भारत नेटवर्क और भविष्य के गाजियाबाद-जेवर कनेक्शन के बीच यात्रियों को लंबी दूरी की तेज रेल सेवा का फायदा मिल सकता है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि जेवर एयरपोर्ट केवल सड़क मार्ग पर निर्भर नहीं रहेगा। नमो भारत और मेट्रो जैसी सेवाओं के जरिए एयरपोर्ट को NCR के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ने की कोशिश दिल्ली-NCR की परिवहन व्यवस्था को नया रूप दे सकती है।
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