Parliament session: संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट! लोकसभा में 19%, राज्यसभा में 39% ही हुआ काम, रिजिजू ने विपक्ष पर साधा निशाना
Parliament session संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार, 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। 20 जुलाई से शुरू हुए इस 19 बैठक वाले सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला।
Parliament session : लोकसभा में 19% और राज्यसभा में 39% काम! संसद का मानसून सत्र खत्म, जानें क्यों नहीं हो सकी ज्यादा चर्चा
Parliament session संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार, 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। 20 जुलाई से शुरू हुए इस 19 बैठक वाले सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला। कई मुद्दों पर विपक्ष ने जोरदार विरोध और नारेबाजी की, जबकि सरकार ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और चर्चा से बचने का आरोप लगाया। सत्र खत्म होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि कामकाज के लिहाज से सरकार ने विधायी काम आगे बढ़ाया, लेकिन बहस और चर्चा के लिहाज से सत्र संतोषजनक नहीं रहा।
लोकसभा में सिर्फ 19 प्रतिशत काम
मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता महज 19 प्रतिशत रही। यानी सदन के लिए निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा हंगामे, स्थगन और राजनीतिक गतिरोध की वजह से प्रभावी चर्चा में इस्तेमाल नहीं हो सका।रिजिजू ने सत्र के अंतिम दिन पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लोकसभा में निर्धारित समय के मुकाबले केवल 19 प्रतिशत काम हो सका। उन्होंने इसे संसद के लिए चिंताजनक स्थिति बताया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लोकसभा में कोई विधायी काम हुआ ही नहीं। सरकार ने कई विधेयकों को आगे बढ़ाया और कुछ महत्वपूर्ण कानूनों को मंजूरी भी मिली। लेकिन चर्चा के लिए उपलब्ध समय काफी सीमित रहा।
राज्यसभा की उत्पादकता 39 प्रतिशत
राज्यसभा का प्रदर्शन लोकसभा से बेहतर रहा, लेकिन वहां भी कामकाज पूरी क्षमता से नहीं हो पाया। रिजिजू के मुताबिक राज्यसभा की उत्पादकता 39 प्रतिशत रही।राज्यसभा में विपक्ष के कुछ दलों के वॉकआउट के बावजूद कुछ विपक्षी सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया। यही वजह रही कि उच्च सदन की उत्पादकता लोकसभा की तुलना में लगभग दोगुनी रही। फिर भी 39 प्रतिशत उत्पादकता को सामान्य संसदीय कामकाज के लिहाज से अच्छा प्रदर्शन नहीं माना जा सकता।
12 विधेयक पारित होने का दावा
रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र में 12 विधेयक पारित किए गए, इसलिए विधायी काम के लिहाज से सरकार इसे पूरी तरह विफल सत्र नहीं मानती। हालांकि, उन्होंने खुद स्वीकार किया कि चर्चा के लिहाज से सत्र अच्छा नहीं रहा।सबसे बड़ी चिंता यह रही कि इन 12 विधेयकों में से केवल एक विधेयक पर दोनों सदनों में चर्चा हो सकी। इसका अर्थ है कि कई विधेयक पर्याप्त बहस के बिना पारित हुए, जिस पर विपक्ष ने भी सवाल उठाए।
रिजिजू ने विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
सत्र समाप्त होने के बाद किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष लगातार सदन में हंगामा करता रहा।रिजिजू ने कहा कि उनके संसदीय अनुभव में यह पहली बार देखने को मिला कि विपक्ष उस समय भी चर्चा से पीछे हट रहा था, जब सरकार बहस के लिए तैयार थी। उन्होंने कांग्रेस पर सदन की कार्यवाही अनुचित तरीके से बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार नारेबाजी और व्यवधान युवा सांसदों के लिए सही उदाहरण नहीं है।
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विपक्ष का पलटवार, सरकार को बताया जिम्मेदार
जहां सरकार ने सत्र के कम कामकाज के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया, वहीं विपक्ष ने इस आरोप को खारिज कर दिया। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सरकार खुद महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचती रही।कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्र पर सदन की कार्यवाही बाधित होने की जिम्मेदारी डालते हुए आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के लिए तैयार नहीं थी। उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में चर्चा से जुड़े रुख पर सवाल उठाया। इस तरह सत्र खत्म होने के बाद भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे।
किन मुद्दों पर हुआ हंगामा?
मानसून सत्र के दौरान कई मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इनमें NEET से जुड़ा विवाद, छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मुद्दे शामिल थे।इन मामलों पर विपक्ष सरकार से चर्चा और जवाब की मांग करता रहा। दूसरी तरफ सरकार का आरोप था कि जब वह चर्चा के लिए तैयार हुई तो विपक्ष ने नारेबाजी और विरोध का रास्ता अपनाया। यही गतिरोध धीरे-धीरे पूरे सत्र की पहचान बन गया।
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FCRA संशोधन विधेयक भी रहा चर्चा में
मानसून सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी राजनीतिक विवाद का कारण बना। विपक्षी दलों ने विधेयक के प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई और इसे अल्पसंख्यक तथा सामाजिक संगठनों से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में देखा।सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर जोर दिया। विधेयक को आगे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने का प्रस्ताव भी सामने आया।
19 बैठक में खत्म हुआ मानसून सत्र
इस बार का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चला और इसमें कुल 19 बैठकें हुईं। आखिरी दिन लोकसभा को स्पीकर ओम बिरला ने और इसके बाद राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।सत्र के अंतिम दिन संसद में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की सभी छह कड़ियां भी बजाई गईं। यह कदम भी इस सत्र की प्रमुख घटनाओं में शामिल रहा।
क्या कम उत्पादकता लोकतंत्र के लिए चिंता है?
संसद का मुख्य उद्देश्य सिर्फ विधेयक पारित करना नहीं है। संसद में विधेयकों पर चर्चा, सवाल-जवाब, सरकार की जवाबदेही और जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।अगर सदन का बड़ा हिस्सा हंगामे और स्थगन की वजह से प्रभावित होता है तो सांसदों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता। दूसरी ओर, विपक्ष का तर्क है कि विरोध और सरकार से जवाब मांगना भी संसदीय लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।इसलिए उत्पादकता के आंकड़े केवल सत्ता पक्ष या विपक्ष की जीत-हार नहीं बताते, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि संसद में चर्चा और संवाद के लिए कितना समय उपलब्ध रहा।
सरकार ने क्या हासिल किया?
सरकार की ओर से देखा जाए तो सत्र में कई विधायी काम आगे बढ़े। रिजिजू ने कहा कि कुल 12 विधेयक पारित हुए। सरकार के लिए यह एक सकारात्मक पक्ष है।लेकिन दूसरी तरफ, सिर्फ विधेयक पारित होना पर्याप्त नहीं है। यदि उन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई, तो संसदीय प्रक्रिया की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। खुद रिजिजू ने माना कि चर्चा के लिहाज से सत्र अच्छा नहीं रहा।
आगे क्या होगा?
अब मानसून सत्र समाप्त होने के बाद सरकार और विपक्ष दोनों अगले संसदीय सत्र की तैयारियों में जुटेंगे। मौजूदा सत्र में जिस तरह राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला, उसके बाद आने वाले सत्र में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष चर्चा और विधायी कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए किसी सहमति तक पहुंच पाते हैं।विपक्ष जहां सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांगता रहेगा, वहीं सत्ता पक्ष के लिए चुनौती होगी कि वह महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा सुनिश्चित करे और सदन को प्रभावी तरीके से चलाए।मानसून सत्र 2026 कम उत्पादकता और लगातार राजनीतिक टकराव के लिए याद किया जाएगा। रिजिजू के मुताबिक लोकसभा में केवल 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत काम हुआ। सरकार ने 12 विधेयक पारित किए, लेकिन दोनों सदनों में केवल एक विधेयक पर चर्चा हो सकी। सरकार ने इसके लिए मुख्य रूप से विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा से भागता रहा।
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