Dyala Jimenez: रूस की लीगल बैटल में पूर्व CJI चंद्रचूड़ की एंट्री, यूक्रेन के Oschadbank से है मामला
Dyala Jimenez, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानूनी जगत में चर्चा में हैं। 12 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक (Oschadbank) के साथ चल रहे निवेश विवाद में अपना arbitrator नियुक्त किया है। यह मामला रूस-यूक्रेन संघर्ष से प्रभावित संपत्तियों और निवेश अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
Dyala Jimenez : रूस-यूक्रेन कानूनी जंग में पूर्व CJI चंद्रचूड़ की एंट्री, रूस ने दी बड़ी जिम्मेदारी
Dyala Jimenez, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानूनी जगत में चर्चा में हैं। 12 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक (Oschadbank) के साथ चल रहे निवेश विवाद में अपना arbitrator नियुक्त किया है। यह मामला रूस-यूक्रेन संघर्ष से प्रभावित संपत्तियों और निवेश अधिकारों से जुड़ा हुआ है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। चंद्रचूड़ को इस मामले में सीधे-सीधे रूस का “वकील” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह तीन सदस्यीय arbitral tribunal में रूस द्वारा नामित arbitrator हैं। यानी उनकी भूमिका किसी सामान्य अदालत में रूस की ओर से पैरवी करने वाले वकील की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया में रूस द्वारा चुने गए निर्णायक सदस्य की है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद यूक्रेन के सरकारी बैंक Oschadbank की ओर से लाया गया है। मामला रूस और यूक्रेन के बीच हुए 1998 Bilateral Investment Treaty (BIT) के तहत चल रही निवेश मध्यस्थता से संबंधित है।रिपोर्टों के मुताबिक, Oschadbank ने रूस के खिलाफ अपनी यूक्रेन में मौजूद संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को हुए कथित नुकसान को लेकर दावा किया है। ये संपत्तियां उन यूक्रेनी क्षेत्रों में स्थित थीं जो रूस की सैन्य कार्रवाई और उसके बाद के संघर्ष से प्रभावित हुए हैं। इस विवाद में बड़ी रकम का दावा होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में यह केवल दो पक्षों के बीच सामान्य कारोबारी विवाद नहीं है, बल्कि रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवादों की व्यापक श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है।
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डीवाई चंद्रचूड़ की क्या होगी भूमिका?
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने इस मामले में अपना arbitrator चुना है। अंतरराष्ट्रीय arbitration में आम तौर पर tribunal में कई सदस्य होते हैं और प्रत्येक पक्ष अपने-अपने arbitrator की नियुक्ति कर सकता है। इसके बाद tribunal विवाद से जुड़े दस्तावेजों, कानूनी दलीलों और सबूतों का अध्ययन करता है।इस मामले में तीन सदस्यीय tribunal की अध्यक्षता कोस्टा रिका की पूर्व व्यापार मंत्री और arbitrator Dyalá Jiménez करेंगी। उन्हें दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से चुना है। इसका मतलब यह है कि चंद्रचूड़ की भूमिका किसी एक पक्ष की राजनीतिक स्थिति का समर्थन करने के बजाय arbitration की प्रक्रिया में एक स्वतंत्र निर्णायक के रूप में होगी।
रूस ने चंद्रचूड़ को ही क्यों चुना?
डीवाई चंद्रचूड़ भारत के प्रमुख संवैधानिक न्यायविदों में से एक रहे हैं। वह 9 नवंबर 2022 से 10 नवंबर 2024 तक भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश रहे। इससे पहले वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में भी काम कर चुके हैं।उनका लंबा न्यायिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कानून की समझ उन्हें ऐसे जटिल विवादों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनाती है। चंद्रचूड़ ने Harvard Law School से भी उच्च शिक्षा हासिल की है और अपने करियर के शुरुआती दौर में अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े काम का अनुभव प्राप्त किया था।अंतरराष्ट्रीय arbitration में किसी पूर्व शीर्ष न्यायाधीश की नियुक्ति पक्षों को कानूनी विशेषज्ञता और न्यायिक अनुभव का लाभ दे सकती है।
पहले रूस के प्रस्ताव को कर चुके थे मना
इस घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह है कि रिपोर्टों के अनुसार रूस की ओर से चंद्रचूड़ से संपर्क पहले भी किया गया था। हालांकि, उन्होंने कथित तौर पर Wintershall Dea और Ukrenergo से जुड़े arbitration मामलों में रूस की ओर से भूमिका निभाने के प्रस्तावों को पहले स्वीकार नहीं किया था। बाद में Oschadbank विवाद में उन्होंने रूस द्वारा नामित arbitrator की भूमिका स्वीकार की। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण दोनों देशों से जुड़े कई निवेश और वाणिज्यिक विवाद अंतरराष्ट्रीय arbitration मंचों तक पहुंचे हैं।
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क्या चंद्रचूड़ रूस का पक्ष लेंगे?
यह सवाल इस खबर के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। लेकिन arbitration की भूमिका को सामान्य वकालत से अलग समझना जरूरी है।यदि कोई व्यक्ति किसी पक्ष का वकील होता है तो उसका काम अपने क्लाइंट के हित में कानूनी दलीलें पेश करना होता है। इसके विपरीत, arbitrator tribunal का हिस्सा होता है। उसे मामले में दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों पर विचार करना होता है।इसलिए चंद्रचूड़ का रूस द्वारा arbitrator नियुक्त किया जाना यह नहीं दर्शाता कि उन्होंने रूस के राजनीतिक या सैन्य रुख का समर्थन किया है। उनकी भूमिका कानूनी विवाद के समाधान की प्रक्रिया में होगी। इसी वजह से कई रिपोर्टों ने उन्हें “Russia’s arbitrator” कहा है, न कि सामान्य अर्थ में “Russia’s lawyer”।
तीन सदस्यीय tribunal करेगा मामले की सुनवाई
इस विवाद का फैसला तीन सदस्यीय arbitral tribunal करेगा। रूस की ओर से चंद्रचूड़ को चुना गया है, जबकि tribunal की अध्यक्षता Dyalá Jiménez करेंगी। तीसरे सदस्य की भूमिका भी tribunal की संरचना के तहत तय होती है।ऐसे मामलों में tribunal को निवेश संधि की शर्तों, संपत्तियों की स्थिति, कथित नुकसान, अधिकार क्षेत्र और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों पर विचार करना पड़ सकता है।यह प्रक्रिया सामान्य आपराधिक या संवैधानिक अदालत की सुनवाई से अलग होती है। यहां मुख्य फोकस निवेश संधि और अंतरराष्ट्रीय arbitration के नियमों पर रहता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़े कानूनी विवाद
फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर व्यापक सैन्य आक्रमण के बाद दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य टकराव के साथ-साथ कानूनी विवाद भी बढ़े हैं।युद्ध के दौरान कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की संपत्तियों को नुकसान, नियंत्रण में बदलाव और निवेश अधिकारों से जुड़े सवाल अंतरराष्ट्रीय arbitration और अदालतों तक पहुंचे हैं। Oschadbank का मामला भी इसी व्यापक कानूनी परिदृश्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे विवादों में फैसला आने में काफी समय लग सकता है क्योंकि पक्षों को बड़ी मात्रा में दस्तावेज और कानूनी सबूत पेश करने पड़ते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर?
डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति भारत के न्यायिक और कानूनी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के पूर्व CJI का किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश arbitration में शामिल होना भारतीय न्यायविदों की वैश्विक विशेषज्ञता को रेखांकित करता है।यह भी दिखाता है कि भारत के वरिष्ठ न्यायाधीशों का अनुभव देश की सीमाओं से बाहर अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान के क्षेत्र में भी उपयोगी माना जा रहा है।
चंद्रचूड़ का न्यायिक सफर
डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने लंबे करियर में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई की। वह 2016 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने और नवंबर 2022 में भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला।CJI के रूप में उनके कार्यकाल में संविधान, निजता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लैंगिक अधिकार और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़े कई फैसले आए। नवंबर 2024 में उनका कार्यकाल पूरा हुआ।अब अंतरराष्ट्रीय arbitration में उनकी नई भूमिका उनके न्यायिक करियर के बाद के पेशेवर सफर का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकती है।पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को रूस द्वारा यूक्रेन के सरकारी बैंक Oschadbank के साथ चल रहे निवेश विवाद में arbitrator नियुक्त किए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी जगत में काफी ध्यान खींचा है। यह मामला रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित संपत्तियों और निवेश अधिकारों से जुड़ा है और 1998 के रूस-यूक्रेन Bilateral Investment Treaty के तहत arbitration में चल रहा है।
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