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Mallikarjun Shuddhikaran Controversy: हल्द्वानी में खरगे के मंच का ‘शुद्धिकरण’! गंगाजल छिड़कने पर संसद तक पहुंचा विवाद

Mallikarjun Shuddhikaran Controversy, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़ा एक विवाद इन दिनों उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Mallikarjun Shuddhikaran Controversy : हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

Mallikarjun Shuddhikaran Controversy, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़ा एक विवाद इन दिनों उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद उसी स्थान पर कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम किए जाने और गंगाजल छिड़के जाने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। खरगे ने गुरुवार को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए इसे अपने प्रति भेदभाव से जोड़कर सवाल खड़े किए। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

हल्द्वानी में क्या हुआ था?

मामला 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी में आयोजित कांग्रेस की एक बड़ी रैली से जुड़ा है। इस रैली को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संबोधित किया था। रैली के लिए जिस रामलीला मैदान के मंच का इस्तेमाल किया गया था, उसके बाद कुछ हिंदू संगठनों की ओर से वहां कथित तौर पर हवन और शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान गंगाजल का छिड़काव किया गया और हवन किया गया। आयोजन से जुड़े लोगों की ओर से दावा किया गया कि रैली के दौरान कुछ आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे और रामलीला मंच जैसे सांस्कृतिक स्थल पर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाना उचित नहीं था। यही घटना बाद में राजनीतिक विवाद में बदल गई।

गंगाजल छिड़कने पर क्यों मचा बवाल?

शुद्धिकरण के दौरान गंगाजल का छिड़काव किए जाने की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे गंभीर मुद्दा बनाया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि खरगे की जातिगत पहचान को निशाना बनाने वाला कदम था।वहीं दूसरी ओर, कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में किया गया अनुष्ठान बताया। उनका कहना है कि मंच का इस्तेमाल ऐसे राजनीतिक कार्यक्रम के लिए किया गया था जिसमें कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इस वजह से दोनों पक्षों की व्याख्या अलग-अलग है।

राज्यसभा में खरगे ने उठाया मामला

हल्द्वानी की घटना का सबसे बड़ा राजनीतिक असर तब देखने को मिला जब मल्लिकार्जुन खरगे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कथित शुद्धिकरण की घटना पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि क्या उन्हें अछूत समझा जा रहा है।खरगे ने इसे अपनी जातिगत पहचान से जोड़ते हुए कहा कि उनके मंच का शुद्धिकरण किया गया। उन्होंने इस घटना को लेकर गंभीर आपत्ति जताई और इसे सामाजिक भेदभाव की मानसिकता से जोड़ा। खरगे के इस बयान के बाद संसद में भी मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।

जेपी नड्डा ने क्या कहा?

राज्यसभा में उठे इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के अनुसार नड्डा ने कहा कि अगर भाजपा से जुड़े किसी व्यक्ति की इस घटना में भूमिका है तो इसकी जांच की जाएगी।उन्होंने इस तरह की गतिविधि से पार्टी को अलग करते हुए कहा कि भाजपा ऐसी कार्रवाई का समर्थन नहीं करती। नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित करने वालों का भाजपा से वास्तव में कोई संबंध था या नहीं। इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि अब राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ घटना में शामिल लोगों की पहचान और उनके राजनीतिक संबंधों की जांच की मांग भी सामने आ रही है।

भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने

घटना के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तीखे आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि किसी नेता के कार्यक्रम के बाद मंच का ‘शुद्धिकरण’ करना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है।दूसरी ओर भाजपा की तरफ से इस घटना को पार्टी की आधिकारिक नीति से जोड़ने से इनकार किया गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन ने ऐसा किया है तो उसके लिए पूरी पार्टी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।इस तरह हल्द्वानी का यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस बनाम भाजपा की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित करने वालों का क्या कहना है?

रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम से जुड़े हिंदू संगठनों ने अपने कदम को धार्मिक और सांस्कृतिक आधार पर उचित बताया है। उनका दावा है कि रामलीला मैदान का मंच धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा है और वहां राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर उन्हें आपत्ति थी। संगठन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस की रैली के दौरान कुछ ऐसे नारे लगाए गए जिन्हें वे आपत्तिजनक मानते हैं। इसी के विरोध में हवन और गंगाजल छिड़कने का कार्यक्रम किया गया। हालांकि, इस कार्रवाई की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद है।

जातिगत भेदभाव का मुद्दा क्यों जुड़ गया?

मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि मल्लिकार्जुन खरगे दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने राज्यसभा में इसी संदर्भ में अपनी आपत्ति दर्ज कराई और सवाल उठाया कि क्या उनके वहां जाने के बाद स्थान को ‘शुद्ध’ करने की जरूरत समझी गई।कांग्रेस ने इसी आधार पर घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। हालांकि भाजपा ने इस आरोप को स्वीकार नहीं किया है और घटना में पार्टी की भूमिका की जांच कराने की बात कही है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि शुद्धिकरण कार्यक्रम का उद्देश्य सीधे तौर पर खरगे की जाति को निशाना बनाना था। इस संबंध में अलग-अलग पक्षों के दावे हैं और जांच के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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उत्तराखंड की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। कांग्रेस ने राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं और खरगे की हल्द्वानी रैली भी इसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा थी। ऐसे समय में हल्द्वानी का यह विवाद कांग्रेस को भाजपा पर हमला करने का एक नया मुद्दा देता है। वहीं भाजपा के सामने चुनौती यह है कि वह घटना से खुद को अलग रखते हुए स्थानीय स्तर पर उठे विवाद को संभाले।यानी यह मामला आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।

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क्या होगी आगे की कार्रवाई?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है। जेपी नड्डा की ओर से जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद यह पता लगाया जा सकता है कि शुद्धिकरण कार्यक्रम किस संगठन ने आयोजित किया, उसमें कौन लोग शामिल थे और क्या उनका किसी राजनीतिक दल से प्रत्यक्ष संबंध था। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि रैली के दौरान कथित आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के आरोपों में कोई कार्रवाई होती है या नहीं।Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Controversy ने उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। हल्द्वानी में 8 अगस्त को खरगे की रैली के बाद उसी स्थान पर कथित हवन और गंगाजल छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’ किए जाने से कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव का मामला बताया है। खरगे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया।

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