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Atiq Ahmed Son Death: अबान अहमद की मौत: जेल में बंद उमर और अली ने अंतिम विदाई के लिए मांगी कोर्ट से अनुमति

Atiq Ahmed Son Death, माफिया से नेता बने दिवंगत अतीक अहमद के परिवार में एक और दुखद घटना के बाद कानूनी हलचल तेज हो गई है।

Atiq Ahmed Son Death : अबान अहमद की मौत के बाद भावुक हुए उमर और अली, जनाजे में शामिल होने के लिए कोर्ट से लगाई गुहार

Atiq Ahmed Son Death, माफिया से नेता बने दिवंगत अतीक अहमद के परिवार में एक और दुखद घटना के बाद कानूनी हलचल तेज हो गई है। अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत के बाद उसके दोनों बड़े भाई उमर अहमद और अली अहमद, जो अलग-अलग जेलों में बंद हैं, अपने छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं। परिवार की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में विशेष अनुमति (पैरोल/अस्थायी रिहाई) की मांग की गई है, ताकि दोनों भाई अंतिम संस्कार में शामिल होकर अपने छोटे भाई को अंतिम विदाई दे सकें।

सड़क हादसे में हुई अबान अहमद की मौत

गुरुवार को झांसी में हुए भीषण सड़क हादसे में अबान अहमद की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, अबान अपने कुछ साथियों के साथ एसयूवी कार से यात्रा कर रहा था, तभी तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित होकर हाईवे के डिवाइडर से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि अबान और उसके साथी सोनू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है।

भाई से मिलने जा रहा था अबान

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, अबान अहमद झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था। रास्ते में यह हादसा हो गया। इस घटना ने पहले से ही कई त्रासदियों का सामना कर चुके अतीक अहमद के परिवार को एक और बड़ा झटका दिया है।

हाई कोर्ट से लगाई बड़ी गुहार

अबान की मौत के बाद परिवार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की है कि जेल में बंद उमर अहमद और अली अहमद को मानवीय आधार पर अस्थायी राहत दी जाए, ताकि वे अपने छोटे भाई के जनाजे में शामिल हो सकें।परिवार का कहना है कि अंतिम संस्कार में शामिल होना प्रत्येक व्यक्ति का संवैधानिक और मानवीय अधिकार है। इसलिए अदालत से विशेष अनुमति देने का अनुरोध किया गया है। मामले पर अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

कौन हैं उमर और अली?

अतीक अहमद के बड़े बेटे उमर अहमद लखनऊ जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ अपहरण और रंगदारी समेत कई मामलों में कार्रवाई चल रही है। वहीं अली अहमद झांसी जिला जेल में बंद हैं। वह उमेश पाल हत्याकांड समेत कई मामलों में आरोपी हैं और न्यायिक हिरासत में हैं।

परिवार पर लगातार आईं त्रासदियां

अतीक अहमद के परिवार ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार कई बड़े हादसे और हत्याएं देखी हैं।

  • अप्रैल 2023 में उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी असद अहमद पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।
  • इसके दो दिन बाद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई।
  • अब अगस्त 2026 में सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।

इन घटनाओं के बाद अब परिवार में जीवित बेटों में अहजम, उमर और अली ही बचे हैं, जिनमें उमर और अली फिलहाल जेल में बंद हैं।

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प्रशासन की रहेगी कड़ी निगरानी

यदि हाई कोर्ट उमर और अली को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देता है, तो उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस अभिरक्षा में ले जाया जा सकता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर अदालत सीमित समय के लिए पुलिस सुरक्षा के साथ अस्थायी अनुमति देती है और इसके लिए कई शर्तें भी लागू की जाती हैं।हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।

कानूनी पहलू

भारतीय कानून के तहत विशेष परिस्थितियों में कैदियों को पैरोल या कस्टडी पैरोल दी जा सकती है। किसी करीबी रिश्तेदार की मृत्यु जैसी परिस्थितियों में अदालत या संबंधित प्रशासन मानवीय आधार पर अस्थायी राहत देने पर विचार कर सकता है। हालांकि यह राहत स्वतः नहीं मिलती, बल्कि मामले की गंभीरता, सुरक्षा जोखिम और कैदी के खिलाफ लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाता है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट भी देख सकती है, क्योंकि दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।

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पूरे मामले पर सबकी नजर

अबान अहमद की मौत के बाद एक बार फिर अतीक अहमद का परिवार सुर्खियों में है। एक ओर परिवार अपने सबसे छोटे सदस्य को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जेल में बंद उमर और अली अपने भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए अदालत से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत ने अतीक अहमद के परिवार को एक और गहरा सदमा दिया है। इसके बाद उमर और अली द्वारा जनाजे में शामिल होने के लिए हाई कोर्ट में लगाई गई गुहार ने इस मामले को नया कानूनी मोड़ दे दिया है। अब सभी की नजर अदालत के फैसले पर टिकी है कि क्या दोनों भाइयों को मानवीय आधार पर अंतिम विदाई में शामिल होने की अनुमति मिलती है या नहीं।

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