Jantar Mantar Protest: विरोध प्रदर्शन के लिए नई जगह की मांग, जंतर-मंतर मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त
Jantar Mantar Protest, राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों और धरनों का प्रमुख केंद्र रहा है। हालांकि, अब इस मुद्दे पर एक नई कानूनी बहस शुरू हो गई है।
Jantar Mantar Protest : क्या बदल जाएगा प्रदर्शन का ठिकाना? जंतर-मंतर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
Jantar Mantar Protest, राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों और धरनों का प्रमुख केंद्र रहा है। हालांकि, अब इस मुद्दे पर एक नई कानूनी बहस शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थल घोषित करने की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए और राजधानी में प्रदर्शन के लिए अधिक व्यवस्थित एवं सुरक्षित स्थान तय किए जाएं।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर के आसपास अब रिहायशी इलाकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण संस्थानों की संख्या काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में लगातार धरना-प्रदर्शन होने से स्थानीय लोगों को ट्रैफिक जाम, शोर-शराबे और सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए जाएं कि वे विरोध-प्रदर्शनों के लिए नई और उपयुक्त जगहों की पहचान करें, जहां नागरिकों के मौलिक अधिकार और आम लोगों की सुविधा के बीच संतुलन बना रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि यह मामला संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा हुआ है। फिलहाल कोर्ट ने कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और सभी पक्षों से विस्तृत जवाब आने के बाद आगे की सुनवाई की जाएगी।
जंतर-मंतर क्यों है अहम?
दिल्ली का जंतर-मंतर वर्षों से विभिन्न संगठनों, कर्मचारी यूनियनों, छात्र समूहों और सामाजिक संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। संसद और केंद्रीय मंत्रालयों के नजदीक होने के कारण इसे प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण स्थान माना जाता रहा है।हालांकि, समय-समय पर यहां होने वाले प्रदर्शनों को लेकर ट्रैफिक, कानून-व्यवस्था और स्थानीय निवासियों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
विरोध प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है। लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है।सरकार सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और अन्य कारणों से उचित प्रतिबंध लगा सकती है। इसलिए अदालत को इस मामले में नागरिक अधिकार और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाना होगा।
पहले भी हो चुकी है सुनवाई
जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शनों को लेकर पहले भी कई बार अदालतों में सुनवाई हो चुकी है। अलग-अलग मामलों में अदालतों ने यह स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं, लेकिन इससे आम जनता के दैनिक जीवन पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए।इसी वजह से समय-समय पर दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति और स्थान को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किए जाते रहे हैं।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में मुख्य रूप से निम्न मांगें की गई हैं—
- जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने की नीति की समीक्षा।
- राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के लिए नए और पर्याप्त स्थानों की पहचान।
- स्थानीय नागरिकों के अधिकारों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के बीच संतुलन।
- सुरक्षा, ट्रैफिक और आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित होने से रोकने के लिए नई व्यवस्था।
क्या बदल सकता है?
यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई नया निर्देश जारी करता है, तो दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
संभावित बदलावों में शामिल हो सकते हैं—
- विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल तय करना।
- प्रदर्शन के लिए नई अनुमति प्रक्रिया।
- भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के नए नियम।
- ट्रैफिक और सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर नई नीति तैयार करना।
हालांकि, यह सभी संभावनाएं हैं। अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार के जवाब के बाद ही सामने आएगा।
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लोकतंत्र और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। वहीं दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि आम लोगों को असुविधा न हो और कानून-व्यवस्था भी बनी रहे। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विचार कर रहा है।
आगे क्या होगा?
अब केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को अदालत में अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें सुनेगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे के निर्देश जारी करेगा। फिलहाल जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मामला अभी विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है। जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान बनाए रखने या नई व्यवस्था लागू करने का फैसला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा। अदालत ने जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आने वाले समय में यह मामला राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले का आधार बन सकता है।
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