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Explained: ‘मित्रों’ नहीं ‘फ्रेंड्स’, पोर्ट्रेट एंगल और सेल्फी कैमरा! कैसे PM मोदी ने तीन मिनट में खेला Gen Z दांव?

Explained: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2 मिनट 55 सेकंड के वीडियो में 'मित्रों' की जगह 'फ्रेंड्स', सेल्फी कैमरा, वर्टिकल वीडियो और आसान भाषा का इस्तेमाल क्यों किया गया? जानिए Gen Z को ध्यान में रखकर अपनाई गई इस नई रणनीति का पूरा विश्लेषण।

Explained: ‘मित्रों’ नहीं, ‘फ्रेंड्स’… PM मोदी के 3 मिनट के वीडियो में छिपी Gen Z तक पहुंचने की पूरी रणनीति

Explained: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाल ही में जारी हुआ करीब 2 मिनट 55 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह वीडियो सिर्फ अपने संदेश की वजह से नहीं, बल्कि उसके प्रस्तुतीकरण और स्टाइल के कारण भी सुर्खियों में है। ‘मित्रों’ की जगह ‘फ्रेंड्स’ शब्द का इस्तेमाल, मोबाइल के सेल्फी कैमरे से रिकॉर्डिंग, वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट और आसान भाषा इन सभी बदलावों को विशेषज्ञ Gen Z यानी नई पीढ़ी से जुड़ने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।

‘मित्रों’ की जगह ‘फ्रेंड्स’ क्यों कहा?

प्रधानमंत्री मोदी अपने सार्वजनिक संबोधनों में अक्सर ‘मेरे प्यारे देशवासियों’ या ‘मित्रों’ शब्द से शुरुआत करते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने वीडियो की शुरुआत ‘Friends’ कहकर की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सोच-समझकर किया गया कदम हो सकता है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रण वाली भाषा का अधिक इस्तेमाल करती है। ऐसे में ‘फ्रेंड्स’ जैसे शब्द उन्हें ज्यादा सहज और परिचित लगते हैं।

मोबाइल कैमरा और वर्टिकल वीडियो ने खींचा ध्यान

इस वीडियो का सबसे अलग पहलू इसका कैमरा सेटअप रहा। आमतौर पर प्रधानमंत्री के संदेश प्रोफेशनल स्टूडियो, राष्ट्रीय प्रतीकों और हाई-क्वालिटी कैमरों के साथ रिकॉर्ड किए जाते हैं। लेकिन इस बार वीडियो में सेल्फी कैमरे का उपयोग, वर्टिकल फ्रेम और साधारण बैकग्राउंड देखने को मिला। यह वही स्टाइल है, जिसमें इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और अन्य सोशल मीडिया वीडियो बनाए जाते हैं। इससे वीडियो ज्यादा व्यक्तिगत और सहज महसूस होता है।

वीडियो की लंबाई भी रही खास

वीडियो की अवधि करीब 2 मिनट 55 सेकंड रखी गई। डिजिटल कंटेंट की दुनिया में यह समय काफी अहम माना जाता है क्योंकि छोटे और तेज़ गति वाले वीडियो युवाओं का ध्यान अधिक आकर्षित करते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की अवधि को प्रभावी माना जाता है।

वीडियो की टाइमिंग भी बनी चर्चा का विषय

प्रधानमंत्री का यह वीडियो ऐसे समय जारी हुआ जब महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम और चर्चाएं चल रही थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीडियो की टाइमिंग भी रणनीतिक हो सकती है, ताकि सरकार का संदेश पहले से लोगों तक पहुंचे और सार्वजनिक विमर्श की दिशा तय की जा सके।

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वीडियो में दिखीं कई छोटी लेकिन अहम बातें

वीडियो को ध्यान से देखने पर कई ऐसी बातें सामने आती हैं जो इसे पारंपरिक सरकारी संदेशों से अलग बनाती हैं।

  • ‘मित्रों’ की जगह ‘फ्रेंड्स’ शब्द का इस्तेमाल।
  • सेल्फी कैमरे से रिकॉर्डिंग।
  • इंस्टाग्राम रील्स जैसा वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट।
  • साधारण बैकग्राउंड और सामान्य रोशनी।
  • आसान और सीधी भाषा।
  • लगभग तीन मिनट की छोटी अवधि।

इन सभी तत्वों ने वीडियो को अधिक अनौपचारिक और सोशल मीडिया फ्रेंडली बना दिया।

क्या Gen Z को प्रभावित कर पाएगी यह रणनीति?

इस सवाल पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। कुछ का मानना है कि युवाओं की पसंद और डिजिटल व्यवहार को समझते हुए यह एक प्रभावी संचार रणनीति हो सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वीडियो की प्रस्तुति बदलने से युवा मतदाताओं की सोच पर बड़ा असर पड़ेगा या नहीं, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। हालांकि, इतना जरूर माना जा रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं से संवाद स्थापित करने के लिए राजनीतिक संचार का तरीका तेजी से बदल रहा है और यह वीडियो उसी बदलाव का संकेत माना जा सकता है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी का यह वीडियो केवल एक सामान्य संदेश नहीं, बल्कि डिजिटल युग में बदलती राजनीतिक संचार शैली का उदाहरण भी माना जा रहा है। ‘फ्रेंड्स’ जैसे संबोधन, सेल्फी कैमरा, वर्टिकल वीडियो और आसान भाषा के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश साफ नजर आती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह नई रणनीति वास्तव में Gen Z के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर पाती है।

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