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Mommy brain: चीजें रखकर भूल जाती हैं? प्रेग्नेंसी में होने वाले ‘मॉमी ब्रेन’ को ऐसे समझें

Mommy brain, प्रेग्नेंसी महिलाओं के जीवन का ऐसा दौर है, जब शरीर में तेजी से कई तरह के बदलाव होते हैं। हार्मोनल बदलाव से लेकर नींद, मूड, भूख और ऊर्जा के स्तर तक, इस दौरान शरीर और दिमाग दोनों को नए बदलावों के साथ तालमेल बैठाना पड़ता है। इन्हीं बदलावों के बीच कई गर्भवती महिलाओं को

Mommy brain : गर्भावस्था में भूलने लगी हैं बातें तो जानें क्यों होता है ‘मॉमी ब्रेन’, क्या है इसका कारण?

Mommy brain, प्रेग्नेंसी महिलाओं के जीवन का ऐसा दौर है, जब शरीर में तेजी से कई तरह के बदलाव होते हैं। हार्मोनल बदलाव से लेकर नींद, मूड, भूख और ऊर्जा के स्तर तक, इस दौरान शरीर और दिमाग दोनों को नए बदलावों के साथ तालमेल बैठाना पड़ता है। इन्हीं बदलावों के बीच कई गर्भवती महिलाओं को ऐसा महसूस होता है कि वे छोटी-छोटी बातें भूलने लगी हैं, किसी काम को करने का इरादा याद नहीं रहता या जरूरी चीजें याद रखने में पहले से ज्यादा समय लगता है। इस अनुभव को आम बोलचाल में ‘मॉमी ब्रेन’, ‘बेबी ब्रेन’ या ‘प्रेग्नेंसी ब्रेन’ कहा जाता है।हालांकि यह कोई मेडिकल बीमारी या आधिकारिक बीमारी का नाम नहीं है। वैज्ञानिक शोध में प्रेग्नेंसी के दौरान याददाश्त और ध्यान में हल्के बदलावों के संकेत मिले हैं, लेकिन हर महिला में इनका असर एक जैसा नहीं होता। 2025 में प्रकाशित एक systematic review में 31 अध्ययनों और 3,000 से ज्यादा प्रतिभागियों के आंकड़ों की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि प्रेग्नेंसी का verbal memory और attention पर हल्का असर हो सकता है।

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क्या है ‘मॉमी ब्रेन’?

‘मॉमी ब्रेन’ कोई बीमारी नहीं बल्कि प्रेग्नेंसी के दौरान महसूस किए जाने वाले कुछ cognitive यानी मानसिक बदलावों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला अनौपचारिक शब्द है। इसमें चीजें भूलना, किसी बात को याद करने में थोड़ा ज्यादा समय लगना, ध्यान भटकना या किसी काम को याद रखने के लिए बार-बार खुद को याद दिलाना शामिल हो सकता है।उदाहरण के तौर पर, गर्भवती महिला कमरे में किसी चीज को लेने जाए और वहां पहुंचने के बाद भूल जाए कि उसे क्या लेना था। कभी फोन या चाबी रखकर तुरंत याद न आना भी इसी तरह के अनुभव का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, ऐसी घटनाएं सामान्य जीवन में किसी को भी हो सकती हैं और हर भूलने की समस्या को ‘मॉमी ब्रेन’ नहीं कहा जा सकता।

हार्मोनल बदलाव हो सकता है एक कारण

प्रेग्नेंसी में शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर काफी बदलता है। ये हार्मोन केवल गर्भावस्था और शरीर से जुड़े बदलावों को प्रभावित नहीं करते, बल्कि दिमाग और उसके काम करने के तरीके पर भी असर डाल सकते हैं।शोधकर्ताओं का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव brain function में होने वाले परिवर्तनों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, सिर्फ हार्मोन को ही ‘मॉमी ब्रेन’ का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे कई कारकों की भूमिका हो सकती है।

नींद की कमी भी बढ़ा सकती है भूलने की समस्या

प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छी और लगातार नींद लेना कई महिलाओं के लिए मुश्किल हो सकता है। बढ़ता हुआ पेट, बार-बार पेशाब आना, शरीर में असहजता, पैरों में ऐंठन या बेचैनी जैसी समस्याएं नींद को प्रभावित कर सकती हैं।जब नींद पूरी नहीं होती तो अगले दिन ध्यान केंद्रित करना और जानकारी को याद रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए किसी महिला को अगर प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा भूलने की शिकायत महसूस हो रही है तो इसके पीछे केवल हार्मोन ही नहीं, बल्कि sleep quality भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। हालिया systematic review ने भी नींद में बदलाव को संभावित योगदान देने वाले कारकों में शामिल किया है।

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तनाव और चिंता का भी पड़ता है असर

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के दिमाग में कई तरह के विचार चलते रहते हैं। बच्चे की सेहत, डिलीवरी, भविष्य, काम, परिवार और बदलती जिम्मेदारियों को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। लगातार तनाव या चिंता की स्थिति में ध्यान किसी एक काम पर बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।ऐसे में महिला को लग सकता है कि उसकी याददाश्त कमजोर हो रही है, जबकि कई बार असल समस्या information को ठीक तरह से ध्यान में दर्ज न कर पाना होती है। यानी अगर किसी बात पर ध्यान ही नहीं गया, तो बाद में उसे याद करना भी मुश्किल हो सकता है।

क्या तीसरी तिमाही में ज्यादा होता है?

कुछ अध्ययनों में subjective यानी खुद महसूस की गई भूलने की समस्या को प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में अधिक बताया गया है। हालांकि सभी वैज्ञानिक अध्ययनों के नतीजे एक जैसे नहीं हैं। 2025 की systematic review के मुताबिक प्रेग्नेंसी और cognitive changes के बीच संबंध के प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन अलग-अलग प्रकार की memory पर प्रभाव समान नहीं पाया गया। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर महिला को तीसरी तिमाही में निश्चित रूप से ज्यादा भूलने की समस्या होगी।

क्या इससे बुद्धि कम हो जाती है?

‘मॉमी ब्रेन’ को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि प्रेग्नेंसी से महिला की intelligence कम हो जाती है। उपलब्ध शोध इस तरह के निष्कर्ष का समर्थन नहीं करता।हालिया समीक्षा में cognitive function में हल्के बदलावों के संकेत मिले हैं, खासकर memory और attention से जुड़े कुछ क्षेत्रों में, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि महिला की बुद्धि या समझने की क्षमता खत्म हो रही है। कुछ शोधों में रोजमर्रा की जिंदगी पर इन बदलावों का प्रभाव भी सीमित या विवादित पाया गया है।

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‘मॉमी ब्रेन’ से बचने के लिए क्या करें?

अगर प्रेग्नेंसी के दौरान भूलने की समस्या महसूस हो रही है तो सबसे पहले खुद को दोष देने या परेशान होने की जरूरत नहीं है। रोजमर्रा के कामों के लिए मोबाइल reminders, notes और to-do lists का इस्तेमाल मददगार हो सकता है। जरूरी सामान को हमेशा एक ही जगह रखने की आदत भी छोटी-छोटी चीजें भूलने की परेशानी कम कर सकती है।इसके साथ ही पर्याप्त आराम, संतुलित भोजन, डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई physical activity और बेहतर sleep routine पर ध्यान देना जरूरी है। तनाव ज्यादा महसूस हो रहा हो तो परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना भी मदद कर सकता है।

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कब डॉक्टर से बात करना जरूरी है?

हल्की भूलने की समस्या प्रेग्नेंसी में हो सकती है, लेकिन अगर याददाश्त में बदलाव बहुत ज्यादा हो, रोजमर्रा के जरूरी काम प्रभावित होने लगें, व्यक्ति बार-बार महत्वपूर्ण बातें भूलने लगे या इसके साथ बहुत ज्यादा चिंता, उदासी, नींद की गंभीर समस्या या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से बात करना बेहतर है। खासकर अगर भूलने की समस्या अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए या महिला को लगे कि वह सामान्य तरीके से काम नहीं कर पा रही है, तो इसे केवल ‘मॉमी ब्रेन’ मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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डिलीवरी के बाद भी रह सकता है असर

‘मॉमी ब्रेन’ केवल प्रेग्नेंसी तक सीमित हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ अध्ययनों में cognitive changes डिलीवरी के बाद भी कुछ समय तक बने रहने के संकेत मिले हैं। 2025 की systematic review में शामिल अध्ययनों के आधार पर कुछ महिलाओं में memory-related बदलाव postpartum period में भी देखे गए, हालांकि सभी अध्ययनों में समान परिणाम नहीं मिले। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि बच्चे के जन्म के बाद नींद पूरी न होना, नई जिम्मेदारियां, लगातार बच्चे की देखभाल और मानसिक तनाव जैसी परिस्थितियां बनी रहती हैं। इसलिए इस दौरान भी पर्याप्त आराम और परिवार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

हर भूलने की समस्या को ‘मॉमी ब्रेन’ न समझें

प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ चीजें भूलना असामान्य नहीं हो सकता, लेकिन इसे हर बार pregnancy brain मानना भी सही नहीं है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि pregnancy से memory और attention में हल्के cognitive changes हो सकते हैं, लेकिन इनके कारण और प्रभाव व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकते हैं। इसलिए अगर प्रेग्नेंसी के दौरान कभी चाबी, फोन या कोई छोटी बात भूल जाएं तो घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है या आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, तो अपने डॉक्टर से चर्चा करना सबसे सुरक्षित कदम है।

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