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Sheikh Hasina: निर्वासन खत्म! दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना, कोर्ट में करेंगी आत्मसमर्पण

Sheikh Hasina, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन के बाद पहली बार अपने भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह इस साल

Sheikh Hasina : ‘मेरी मौत भी अपनी मिट्टी पर हो’, शेख हसीना के बयान से मची हलचल

Sheikh Hasina, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन के बाद पहली बार अपने भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह इस साल दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के सामने स्वेच्छा से सरेंडर करेंगी, भले ही उन्हें गिरफ्तारी या मौत का सामना क्यों न करना पड़े। हसीना ने भावुक अंदाज में कहा, “अगर मौत आए तो वह मेरी अपनी मिट्टी पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।”

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दिसंबर में लौटने का किया ऐलान

भारत में निर्वासन का जीवन बिता रहीं 78 वर्षीय शेख हसीना ने एक साक्षात्कार में कहा कि वह दिसंबर में अपने कई वरिष्ठ अवामी लीग नेताओं के साथ बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना और कानूनी प्रक्रिया का सामना करना है। यह पहली बार है जब उन्होंने अपनी वापसी के लिए सार्वजनिक रूप से निश्चित समयसीमा बताई है।

गिरफ्तारी और मौत का खतरा स्वीकार

Sheikh Hasina ने माना कि बांग्लादेश लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके बावजूद वह वापस लौटने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगी।उन्होंने कहा, “वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं, लेकिन मुझे वापस जाना ही होगा। अगर मौत आए तो वह मेरी अपनी धरती पर आए।”

अवामी लीग नेताओं के साथ लौटेंगी

Sheikh Hasina ने बताया कि वह अकेले नहीं लौटेंगी, बल्कि उनकी पार्टी अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ बांग्लादेश आएंगे और अदालत के सामने पेश होंगे। उनके अनुसार, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दमन हो रहा है और इसी वजह से उन्होंने वापस लौटने का फैसला लिया है।

मौत की सजा का सामना कर रहीं हसीना

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना फिलहाल बांग्लादेश की अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा का सामना कर रही हैं। उन पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, हसीना ने सभी आरोपों को राजनीतिक बताते हुए खारिज किया है और कहा है कि उन्होंने कोई गैरकानूनी आदेश नहीं दिया।

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2024 के आंदोलन के बाद छोड़ना पड़ा था देश

साल 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन तेजी से हिंसक हो गया था। कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद वह देश छोड़कर भारत आ गईं और तब से यहीं रह रही हैं।

भारत में निर्वासन के दौरान क्या करती रहीं?

निर्वासन के दौरान शेख हसीना लगातार अपनी पार्टी के नेताओं और समर्थकों के संपर्क में रहीं। उन्होंने बताया कि वह ऑनलाइन बैठकों के जरिए पूरे देश में पार्टी संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार, अवामी लीग अभी भी बांग्लादेश की बड़ी राजनीतिक ताकत है और वह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी भूमिका निभाना चाहती है।

जनता को फैसला करने देने की बात

Sheikh Hasina ने कहा कि अगर उनकी सरकार ने गलत काम किए हैं तो इसका फैसला अदालत या विरोधी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की जनता करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होना चाहिए और उन्हें अपने पक्ष को रखने का अवसर मिलना चाहिए।

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अवामी लीग पर प्रतिबंध पर जताई नाराजगी

पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी पार्टी अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल को प्रतिबंधित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके अनुसार, पार्टी के हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

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क्या होगा उनकी वापसी का असर?

विश्लेषकों का मानना है कि अगर शेख हसीना वास्तव में दिसंबर में बांग्लादेश लौटती हैं, तो देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उनकी वापसी से राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है, लेकिन इससे उनके खिलाफ चल रहे मामलों की कानूनी प्रक्रिया भी निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। साथ ही, भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया

Sheikh Hasina के इस बयान पर फिलहाल बांग्लादेश की सरकार या भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इससे पहले बांग्लादेश की ओर से उनके प्रत्यर्पण की मांग की जा चुकी है, जिस पर भारत ने कहा था कि वह अनुरोध पर विचार कर रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चर्चा

Sheikh Hasina के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह वास्तव में अदालत के सामने आत्मसमर्पण करती हैं, तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होगी। दूसरी ओर, उनके समर्थक इसे साहसिक कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक रणनीति मान रहे हैं।Sheikh Hasina का दिसंबर में बांग्लादेश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का ऐलान देश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। गिरफ्तारी और मौत की आशंका के बावजूद उन्होंने अपनी मातृभूमि लौटने की इच्छा जताते हुए कहा कि अगर उनकी मृत्यु भी हो, तो वह अपनी ही मिट्टी पर हो। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दिसंबर में उनका यह ऐलान वास्तव में हकीकत बनता है या नहीं और बांग्लादेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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