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Diesel Prices: महंगाई का नया झटका! पेट्रोल-डीजल 11 रुपये तक महंगा, क्या कहती है सरकार?

Diesel Prices, देशभर में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब प्रीमियम डीजल भी महंगा हो गया है। तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार रात 12 बजे से प्रीमियम डीजल के दामों में लगभग 1.50

Diesel Prices : पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा बदलाव, 11 रुपये तक बढ़े दाम

Diesel Prices, देशभर में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब प्रीमियम डीजल भी महंगा हो गया है। तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार रात 12 बजे से प्रीमियम डीजल के दामों में लगभग 1.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि लागू कर दी है। इससे पहले 100 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखा गया था। कंपनियों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की विनिमय दर में कमजोरी के कारण यह निर्णय लेना पड़ा।

उपभोक्ताओं पर सीधा असर

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट कंपनियां, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर और कृषि क्षेत्र से जुड़े किसान प्रीमियम डीजल का इस्तेमाल बेहतर माइलेज और इंजन परफॉर्मेंस के लिए करते हैं। अब कीमत बढ़ने से उनकी परिचालन लागत में इजाफा होगा। माना जा रहा है कि इसका प्रभाव मालभाड़े और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। दिल्ली में प्रीमियम डीजल की कीमत अब लगभग 95 से 96 रुपये प्रति लीटर के बीच पहुंच गई है। हालांकि यह सामान्य डीजल की तुलना में अधिक कुशल माना जाता है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर सकती हैं।

नई दरें क्या हैं?

सरकारी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अपने प्रीमियम ईंधन उत्पादों की नई कीमतें जारी कर दी हैं। कंपनी के अनुसार:

  • एक्सपी100 (100 ऑक्टेन पेट्रोल) की कीमत 149 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।
  • एक्स्ट्रा ग्रीन प्रीमियम डीजल की कीमत 91.49 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 92.99 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू हो चुकी हैं। इस बढ़ोतरी से साफ है कि प्रीमियम सेगमेंट के ईंधन पर महंगाई का असर अधिक पड़ा है।

कितनी हुई कुल बढ़ोतरी?

ताजा संशोधन के तहत एक्सपी100 पेट्रोल में करीब 11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जो हाल के समय में एक बड़ा उछाल माना जा रहा है। वहीं प्रीमियम डीजल की कीमत में लगभग 1.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि प्रीमियम ईंधन की कीमतें आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से ज्यादा प्रभावित होती हैं, क्योंकि इनका उत्पादन और वितरण सीमित स्तर पर होता है और इनकी लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है।

पहले भी बढ़े थे दाम

यह पहली बार नहीं है जब प्रीमियम ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ हो। इससे पहले 20 मार्च को सरकारी तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 से 2.35 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। हालांकि उस समय सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। फिलहाल भी सामान्य पेट्रोल और डीजल की दरों को स्थिर रखा गया है, जिससे आम वाहन चालकों को कुछ राहत मिली है। लेकिन प्रीमियम ईंधन का उपयोग करने वाले ग्राहकों को लगातार बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में अस्थिरता बनी हुई है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट से आयात लागत बढ़ जाती है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में और संशोधन देखने को मिल सकते हैं।

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प्रीमियम ईंधन की खासियत

प्रीमियम पेट्रोल और डीजल को बेहतर इंजन परफॉर्मेंस, उच्च ऑक्टेन रेटिंग और कम उत्सर्जन के लिए जाना जाता है। एक्सपी100 जैसे ईंधन हाई-परफॉर्मेंस और लग्जरी वाहनों के लिए खास तौर पर डिजाइन किए जाते हैं। वहीं एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल बेहतर माइलेज और इंजन की लंबी उम्र के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी के बाद उपभोक्ता यह सोचने पर मजबूर हो सकते हैं कि क्या अतिरिक्त खर्च के मुकाबले मिलने वाला लाभ उनके लिए वाजिब है या नहीं।

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आगे क्या?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक परिस्थितियों और मुद्रा विनिमय दर के आधार पर ईंधन की कीमतों में और बदलाव संभव हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं को नई दरों के साथ तालमेल बिठाना होगा। कुल मिलाकर, प्रीमियम ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम जनता और उद्योगों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। यदि महंगाई का यह सिलसिला जारी रहा, तो इसका व्यापक असर देश की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा के खर्च पर पड़ सकता है।

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