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Namo Bharat 3.0: दिल्ली-मेरठ के बाद NCR में नमो भारत 3.0 की तैयारी

Namo Bharat 3.0, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र देश का सबसे बड़ा शहरी समूह है, जहां रोज़ाना लाखों लोग काम, शिक्षा और व्यापार के लिए शहरों के बीच आवाजाही करते हैं।

Namo Bharat 3.0 : दिल्ली-एनसीआर के 3 बड़े शहर नमो भारत से होंगे कनेक्ट

Namo Bharat 3.0, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र देश का सबसे बड़ा शहरी समूह है, जहां रोज़ाना लाखों लोग काम, शिक्षा और व्यापार के लिए शहरों के बीच आवाजाही करते हैं। ऐसे में तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के विस्तार के साथ यह सपना तेजी से साकार होता दिख रहा है। दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के बाद अब गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाला नया हाई-स्पीड नमो भारत कॉरिडोर पूरे एनसीआर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

आठ नमो भारत कॉरिडोर: एनसीआर के लिए टर्निंग प्वाइंट

योजना के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में कुल आठ नमो भारत कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। इन कॉरिडोरों के पूरा होने पर एनसीआर के 10 से अधिक शहर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। इससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी और लोग दिल्ली पर निर्भर हुए बिना आसपास के शहरों में रहकर भी आसानी से काम कर सकेंगे। यह नेटवर्क न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी संतुलित बनाएगा।

गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा कॉरिडोर को मिली मंजूरी

हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले लगभग 64 किलोमीटर लंबे नमो भारत RRTS कॉरिडोर के फाइनल एलाइनमेंट को मंजूरी दे दी है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं इसकी जानकारी सार्वजनिक की। इस कॉरिडोर का लगभग 52 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में और शेष उत्तर प्रदेश में होगा। यह कॉरिडोर गुरुग्राम के इफ्को चौक से शुरू होकर फरीदाबाद होते हुए नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक जाएगा।

ऑर्बिटल कनेक्टिविटी से बदल जाएगा एनसीआर का नक्शा

इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता ऑर्बिटल कनेक्टिविटी है। अभी तक एनसीआर के अधिकांश शहरों को जोड़ने का केंद्र दिल्ली ही रहा है। यानी गुरुग्राम से नोएडा या फरीदाबाद जाने के लिए यात्रियों को अक्सर दिल्ली होकर गुजरना पड़ता है। नया RRTS कॉरिडोर इस निर्भरता को खत्म करेगा और शहरों के बीच सीधी कनेक्टिविटी देगा। इससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और यात्रा समय भी घटेगा।

मेट्रो और रैपिड रेल का समानांतर मॉडल

हरियाणा सरकार गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच मेट्रो और रैपिड रेल के समानांतर मॉडल पर काम कर रही है। इसका मतलब है कि एक ही कॉरिडोर में अलग-अलग गति और दूरी की जरूरतों के अनुसार परिवहन विकल्प उपलब्ध होंगे। छोटी दूरी के लिए मेट्रो और लंबी दूरी के लिए हाई-स्पीड RRTS का उपयोग किया जा सकेगा। इससे यात्रियों को अधिक सुविधा और लचीलापन मिलेगा।

नोएडा एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी

फरीदाबाद को गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है। इससे फरीदाबाद, गुरुग्राम और अन्य एनसीआर शहरों को सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी मिल सकेगी। भविष्य में एयरपोर्ट तक तेज और सुगम पहुंच क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी।

दिल्ली-अलवर और दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर से जुड़ाव

प्रस्तावित गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा RRTS कॉरिडोर दिल्ली-अलवर और दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर से भी जुड़ेगा। ये दोनों कॉरिडोर सराय काले खां को प्रमुख हब बनाते हैं। इसका अर्थ है कि एनसीआर का यात्री किसी भी दिशा में आसानी से हाई-स्पीड नेटवर्क बदलकर यात्रा कर सकेगा। यह व्यवस्था एकीकृत क्षेत्रीय परिवहन प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम है।

यात्रा समय में भारी कमी

RRTS कॉरिडोर की अधिकतम गति लगभग 160 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है। ऐसे में गुरुग्राम से नोएडा या फरीदाबाद तक की यात्रा, जो वर्तमान में सड़क मार्ग से 1.5–2 घंटे तक लेती है, भविष्य में 30–40 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे रोजाना आने-जाने वाले लाखों लोगों का समय बचेगा और जीवन गुणवत्ता बेहतर होगी।

आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा प्रभाव रियल एस्टेट, उद्योग, रोजगार और निवेश पर पड़ता है। जिन शहरों तक तेज परिवहन पहुंचता है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ती हैं। गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा कॉरिडोर बनने से इन शहरों के बीच आर्थिक एकीकरण मजबूत होगा और नए औद्योगिक व आवासीय केंद्र विकसित होंगे।

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पर्यावरण और ट्रैफिक पर सकारात्मक असर

हाई-स्पीड सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी। इससे सड़क पर वाहनों की संख्या कम होगी, ट्रैफिक जाम घटेंगे और प्रदूषण में भी कमी आएगी। एनसीआर जैसे प्रदूषण-प्रभावित क्षेत्र के लिए यह परियोजना पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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भविष्य की शहरी योजना की दिशा

नमो भारत RRTS परियोजना केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि क्षेत्रीय शहरी योजना का आधार बन रही है। भविष्य में एनसीआर के शहरों का विकास परिवहन कॉरिडोर के आसपास केंद्रित होगा। इससे योजनाबद्ध शहरीकरण, बेहतर आवास और संतुलित जनसंख्या वितरण संभव होगा।दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर की सफलता के बाद गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा नमो भारत RRTS कॉरिडोर एनसीआर के परिवहन परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है। ऑर्बिटल कनेक्टिविटी, एयरपोर्ट लिंक, मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन और हाई-स्पीड यात्रा जैसे पहलू इसे भविष्य की स्मार्ट मोबिलिटी का मजबूत उदाहरण बनाते हैं। जब यह कॉरिडोर और अन्य प्रस्तावित नमो भारत मार्ग पूरे हो जाएंगे, तब दिल्ली-एनसीआर वास्तव में एकीकृत, तेज और आधुनिक महानगरीय क्षेत्र के रूप में उभरेगा।

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