Holika dahan rituals: फाल्गुन पूर्णिमा स्पेशल, होलिका दहन पर पूजा-पाठ, श्रीनाथ जी का हिंडोला और सत्यनारायण कथा
Holika dahan rituals, फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू पंचांग का एक बेहद पावन दिन माना जाता है। इसी दिन होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व केवल अग्नि प्रज्वलन तक सीमित नहीं है,
Holika dahan rituals : पूजा-विधान, श्रीनाथ जी के लिए हिंडोला और सत्यनारायण कथा
Holika dahan rituals, फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू पंचांग का एक बेहद पावन दिन माना जाता है। इसी दिन होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व केवल अग्नि प्रज्वलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कई धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इस दिन घर-घर में बालगोपाल और श्रीनाथ जी के लिए हिंडोला सजाया जाता है, वहीं कई लोग भगवान सत्यनारायण की कथा भी पढ़ते और सुनते हैं।
होलिका दहन का धार्मिक महत्व
होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप से जुड़ी है। अहंकारी राजा हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की हर कोशिश की। अंत में उसकी बहन होलिका, जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी। लेकिन ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि इस दिन अग्नि प्रज्वलित कर असत्य, अहंकार और नकारात्मकता का दहन किया जाता है।
फाल्गुन पूर्णिमा पर पूजा-पाठ का महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा को पूजा-पाठ करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन:
- भगवान विष्णु
- श्रीकृष्ण
- बालगोपाल
- श्रीनाथ जी
की आराधना विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
बालगोपाल और श्रीनाथ जी के लिए हिंडोला सजाने की परंपरा
ब्रज परंपरा में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन बालगोपाल और श्रीनाथ जी के लिए हिंडोला सजाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परंपरा भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी है।
हिंडोला सजाते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- झूले को फूलों और रंगीन वस्त्रों से सजाएं
- बालगोपाल या श्रीनाथ जी को हल्के रंगों के वस्त्र पहनाएं
- गुलाल, फूल और अबीर से वातावरण को भक्तिमय बनाएं
- भजन-कीर्तन करें और झूला झुलाएं
ऐसा माना जाता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
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होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन की पूजा संध्या काल या प्रदोष काल में की जाती है। पूजा विधि इस प्रकार है:
- होलिका के पास जल, रोली, अक्षत, फूल और कच्चा सूत अर्पित करें
- गेहूं की बालियां, चने और नारियल चढ़ाएं
- होलिका की सात परिक्रमा करें
- बुरे विचारों और नकारात्मकता को छोड़ने का संकल्प लें
इसके बाद होलिका में अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
भगवान सत्यनारायण की कथा का विशेष महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह कथा विशेष रूप से:
- आर्थिक समस्याओं
- पारिवारिक कलह
- मानसिक तनाव
से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है। कथा के दौरान पूरे परिवार को एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। इससे घर में एकता और सकारात्मकता बढ़ती है।
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होलिका दहन के दिन क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करें
- बुजुर्गों का आशीर्वाद लें
- जरूरतमंदों को दान करें
क्या न करें:
- किसी का अपमान या झगड़ा न करें
- नकारात्मक विचारों को मन में न रखें
- शराब और मांसाहार से परहेज करें
होलिका की राख का धार्मिक महत्व
होलिका दहन के बाद अगली सुबह उसकी राख को शुभ माना जाता है। इसे:
- माथे पर लगाने से नजर दोष से रक्षा होती है
- खेतों में डालने से फसल अच्छी होती है
- घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है
Holika Dahan Rituals केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का पर्व है। फाल्गुन पूर्णिमा पर पूजा-पाठ, बालगोपाल और श्रीनाथ जी के लिए हिंडोला सजाना और भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ना-सुनना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि अंततः सत्य और भक्ति की ही विजय होती है।
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