लाइफस्टाइल

जाने क्या है reverse dieting, आखिर वजन घटाने वाली हर महिला को क्या पड़ती है इसकी जरूरत

जाने क्या है reverse dieting


आपने देखा होगा कि जब भी आप डाइट करते है तो आप अपना कैलोरी इनटेक कम कर देते है। लेकिन जैसे ही आपकी डाइट खत्म होती है तो आप फिर पहले की तरह खाने लग जाते है। बस यहीं काम आती है रिवर्स डाइटिंग, रिवर्स डाइटिंग (reverse dieting ) आपको बताती है कि डाइट खत्म होने के बाद भी आप अपने खाने में कैलोरीज़ को किस तरीके से शामिल कर सकते है। रिवर्स डाइटिंग आपको डाइटिंग खत्म होने के बाद आपको कुछ भी फालतू खाने से रोकती है। साथ ही साथ ये आपके मेटाबॉलिज़्म को भी बढ़ाती है। और आपकी बॉडी से हंगर हार्मोन्स को नॉर्मल करती है। रिवर्स डाइटिंग से बिंज ईटिंग या फिर रैपिड वेट रिगेन के रिस्क को कम करती है। और आपके कैलोरीज़ इनटेक को 1,200 प्रतिदिन तक सीमित किया जाता है जिसे कुछ वेट लूज़ भी किया जाता है। इसके बाद आपको सलाह दी जाती है कि आप अपनी पुरानी डाइट पर लौटने के बजाय रिवर्स डाइटिंग को फॉलो करें।

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Image source – Punjab Kesari

जाने रिवर्स डाइटिंग के साइड इफेक्ट्स

बहुत लोग ऐसे भी होते है जिन्हें रिवर्स डाइटिंग पसंद नहीं होती है क्योंकि रिवर्स डाइटिंग से शुरूआत में लो कैलोरी और स्ट्रिक्ट डाइट को अवॉयड किया जा सकता है। आपने देखा होगा कि लो कैलोरी डाइट से कुछ लोगों का वजन तो कम होता है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह शारीरिक और मानसिक साइड इफैक्ट का कारण बन जाता है। जिसे आपको न्यूट्रीशन की शॉर्टेज़, डिप्रेशन, थकान और खाने के बारे में ज्यादा ख्याल दिमाग में आने लगते है। साथ ही साथ कुछ लोंगो का कहना होता है कि कैलोरीज़ को काउंट करना आसान नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार 1200 कैलोरी डाइट और कैलोरीज़ को मॉनिटर करने से पेट का फैट बढ़ाने वाला स्ट्रेस हॉरमोन कोर्टिसोल लेवल बढ़ता है।

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बिना स्ट्रिक्ट डाइट के कैसे घटाएं वज़न

पहले के समय में लोग वज़न घटाने के लिए कैलोरीज़ इन और कैलोरीज़ आउट करने वाली ट्रेडीशनल इस्तेमाल करते थे लेकिन आज के समय में लोग डाइट पर फॉलो करते है। इसके लिए लोग फूड क्वालिटी, मील बैलेंस और टाइमिंग पर फोकस करते हैं। इसके साथ वो भूख लगने और फुलनेस सिगनल के साथ इमोशनल ईटिंग जैसे फैक्टर्स पर भी ध्यान देते हैं। प्रोसेस्ड फूड्स में भी वेट कंट्रोल पर असर करने वाले गट बैक्टीरिया दिखे हैं। इसीलिए सिर्फ ज्यादा सब्जियां और फाइबर खाने और इसके साथ खाने के टाइमिंग में फेरबदल कर आप बिना भूखे रहे वजन को कंट्रोल कर सकते हैं।

 

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