भारत

क्या हुआ 14 साल पहले गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में , आइए जाने

गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में आज अदालत का अहम फैसला आ गया है। 24 को दोषी करार दिया गया है तो वही 36 को बरी किया गया है। गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड 28 फरवरी 2002 को हुआ था मतलब की 14 साल पहले। आइए समझते है , यह पूरा मामला क्या था।

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गुलबर्ग सोसाइटी

  • 28 फरवरी, 2002 में 29 बंगलों और 10 फ्लैट की गुलबर्ग सोसायटी पर हजारों की हिंसक भीड़ ने हमला किया था। गुलबर्ग सोसायटी में हमले करने से पहले गोधरा में एक ट्रेन की दो बोगी जला दी गई थी।
  • 20,000 से ज्यादा लोगों की हिंसक भीड़ के हमले में 69 लोग मारे गए थे जिसमें से 39 लोगों के शव मिल गए थे और बाकी 30 लापता लोगों को सात साल बाद मारा हुआ मान लिया था। पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री भी इस हमले में मारे गए थें।
  • हमले में लोगों को मारा गया था लेकिन ज्यादातर लोगों जिंदा जलाया गया था।
  • गुलबर्ग सोसायटी में सभी मुस्लिम रहते थे लेकिन एक पारसी परिवार भी रहता था। पूर्व कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी उसी सोसायटी में रहते थे।
  • इस हत्याकांड में 67 आरोपी हैं और अब तक 338 लोगों से ज्यादा की गवाही ली जा चुकी है।
  • 8 जून, 2006 को पुलिस को दी गई ज़किया जाफरी की एक फरियाद में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, कई मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों को ज़िम्मेदार बताया गया था । लेकिन पुलिस ने ज़किया जाफरी की फरियाद लेने से मना कर दिया और 7 नवंबर, 2007 को गुजरात हाईकोर्ट ने भी ज़किया जाफरी की फरियाद को एफआईआर मानकर जांच करवाने से मना कर दिया।
  • 2009 में ज़किया जाफरी की फरियाद की जांच करने का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को सौंपा दिया था और एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट 14 मई 2010 सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दी थी ।
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