IVF Treatment: सिर्फ महिलाओं की नहीं, पुरुषों की प्रजनन समस्याओं से भी बढ़ रही है IVF की जरूरत
IVF Treatment, जब भी IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) यानी टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक की बात होती है, तो अक्सर लोगों का ध्यान महिलाओं की प्रजनन संबंधी समस्याओं पर जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में पुरुषों में बढ़ती प्रजनन (Male Fertility) संबंधी समस्याएं भी IVF की बढ़ती जरूरत का एक बड़ा कारण बन रही हैं।
IVF Treatment : पुरुषों की इन प्रजनन समस्याओं के कारण लेनी पड़ सकती है IVF की मदद
IVF Treatment, जब भी IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) यानी टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक की बात होती है, तो अक्सर लोगों का ध्यान महिलाओं की प्रजनन संबंधी समस्याओं पर जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में पुरुषों में बढ़ती प्रजनन (Male Fertility) संबंधी समस्याएं भी IVF की बढ़ती जरूरत का एक बड़ा कारण बन रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बांझपन (Infertility) केवल महिलाओं से जुड़ी समस्या नहीं है। उपलब्ध शोध बताते हैं कि लगभग आधे मामलों में पुरुषों से जुड़े कारण भी पूरी तरह या आंशिक रूप से जिम्मेदार हो सकते हैं। ऐसे में सही समय पर जांच और उपचार कराना बेहद जरूरी है।
क्या है IVF?
IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी सहायक प्रजनन तकनीक (Assisted Reproductive Technology) है, जिसमें महिला के अंडाणु (Egg) और पुरुष के शुक्राणु (Sperm) को प्रयोगशाला में निषेचित (Fertilize) किया जाता है। इसके बाद बने भ्रूण (Embryo) को महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है, ताकि गर्भधारण हो सके।यह तकनीक उन दंपतियों के लिए एक प्रभावी विकल्प हो सकती है, जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में कठिनाई हो रही हो।
पुरुषों की प्रजनन समस्याएं क्यों बढ़ रही हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या में गिरावट देखी गई है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—
- धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन
- मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता
- अत्यधिक तनाव और खराब नींद
- असंतुलित खानपान
- मधुमेह और हार्मोनल समस्याएं
- पर्यावरण प्रदूषण और रसायनों का संपर्क
- बढ़ती उम्र
- कुछ संक्रमण या आनुवंशिक कारण
इन कारणों से शुक्राणुओं की संख्या (Low Sperm Count), उनकी गतिशीलता (Poor Motility) या आकार (Abnormal Morphology) प्रभावित हो सकते हैं, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
किन परिस्थितियों में IVF की जरूरत पड़ सकती है?
हर दंपति को IVF की आवश्यकता नहीं होती। डॉक्टर पूरी जांच के बाद ही इसकी सलाह देते हैं। IVF या अन्य सहायक तकनीकों की जरूरत इन परिस्थितियों में पड़ सकती है—
- शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम होना
- शुक्राणुओं की गतिशीलता कम होना
- शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी
- बार-बार गर्भधारण में असफलता
- महिला में फैलोपियन ट्यूब की समस्या
- एंडोमेट्रियोसिस
- अस्पष्ट (Unexplained) बांझपन
- बढ़ती उम्र के कारण प्रजनन क्षमता में कमी
कुछ मामलों में IVF के साथ ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) तकनीक का भी उपयोग किया जाता है, जिसमें एक स्वस्थ शुक्राणु को सीधे अंडाणु के भीतर प्रविष्ट कराया जाता है।

क्या केवल महिलाओं की जांच पर्याप्त है?
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भधारण में कठिनाई होने पर केवल महिला की जांच कराना पर्याप्त नहीं है। दंपति दोनों की जांच जरूरी होती है।पुरुषों के लिए डॉक्टर आमतौर पर सीमन एनालिसिस (Semen Analysis), हार्मोन जांच और आवश्यकता पड़ने पर अन्य परीक्षणों की सलाह देते हैं। वहीं महिलाओं के लिए ओव्यूलेशन, हार्मोन और प्रजनन अंगों की जांच की जाती है।
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क्या जीवनशैली बदलने से फर्क पड़ता है?
कई मामलों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से पुरुषों की प्रजनन क्षमता में सुधार देखा जा सकता है। विशेषज्ञ निम्नलिखित आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं—
- संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
- नियमित व्यायाम करें।
- धूम्रपान और शराब से दूरी रखें।
- पर्याप्त नींद लें।
- तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करें।
- वजन नियंत्रित रखें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट या दवाओं का सेवन न करें।
हालांकि, यदि समस्या गंभीर हो, तो केवल जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त नहीं हो सकता और चिकित्सा उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।
IVF को लेकर फैली गलतफहमियां
समाज में IVF को लेकर कई मिथक भी प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए—
- मिथक: IVF सिर्फ महिलाओं की समस्या के लिए होता है।
सच्चाई: पुरुषों से जुड़ी प्रजनन समस्याओं में भी IVF या ICSI की जरूरत पड़ सकती है। - मिथक: IVF हमेशा पहली बार में सफल हो जाता है।
सच्चाई: सफलता की संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे उम्र, स्वास्थ्य और समस्या का कारण। - मिथक: बांझपन की समस्या हमेशा महिला में होती है।
सच्चाई: पुरुष और महिला, दोनों ही समान रूप से इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
यदि दंपति नियमित असुरक्षित संबंधों के बावजूद—
- एक वर्ष तक (यदि महिला की उम्र 35 वर्ष से कम है), या
- छह महीने तक (यदि महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है)
गर्भधारण नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें प्रजनन विशेषज्ञ (Fertility Specialist) से सलाह लेनी चाहिए।आज के समय में IVF की बढ़ती जरूरत केवल महिलाओं की प्रजनन समस्याओं के कारण नहीं, बल्कि पुरुषों में बढ़ रही प्रजनन संबंधी चुनौतियों से भी जुड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांझपन को किसी एक व्यक्ति की समस्या मानने के बजाय दंपति दोनों की स्वास्थ्य स्थिति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। समय पर जांच, सही उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई मामलों में गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है। यदि आवश्यकता हो, तो IVF जैसी आधुनिक तकनीकें भी कई परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो सकती हैं।
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