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काम की बात करोना

लॉकडाउन और बेरोजगारी: कोरोना काल में हुए कई सपने खाक

क्या बेरोजगारी से जल्दी निजात मिल पाएगी?


साल 2020 लगभग हर व्यक्ति के लिए पहाड़ की तरह हो गया है. एक-एक दिन लोगों के ऊपर कहर की तरह टूट रहे हैं. कहीं कोरोना होने का खौफ है तो कहीं रोटी खाने की तंगी, कहीं जान बचाने की  जद्दोजहद तो कहीं नौकरी. हर कोई बस अपने को बचाने की केशिश में है. इसी बचाने की तलाश में तो कई लोग अपनी जान दे दे रहे हैं. महामारी के बाद अब  बेरोजगारी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है. देश में बेरोजगारी का 45 साल का रिकॉर्ड तो पहले ही टूट गया था. स्थिति यह हो गई की बेरोजगारी दर 6.5 तक पहुंच गई . इस हिसाब से देश का एक बड़ा हिस्सा पहले ही जॉब से महरुम था और उसकी तलाश कर रहा था. हालात पहले ही बुरे थे और अब कोरोना ने इसको गर्त में पहुंचा दिया है. बेरोजगारी के मामले में अभी सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है. लेकिन खबरों में  सर्वे कंपनियों के द्वारा कुछ आंकड़े पेश किए जा रहे हैं. जिसके आधार पर कोविड 19 के दौरान बेरोजगारी का मोटा-मोटा आकलन किया जा सकता है. वैसे बेरोजगारी दर हमेशा काम ढूंढने वाले के आंकडे के अनुसार पेश की जाती है. लेकिन जो लोग रेहडी, खोमचा, रोड़ के किनारे सामान बेचकर अपना गुजारा करते थे क्या उनका अनुमान लगा पाना अभी संभव है. लॉकडाउन में कितने ही लोग अपने घर वापस चले गए कई लोगों की तो पूंजी भी खत्म हो गई होगी. क्या ये लोग दोबारा इतना पैसा जुटा पाएंगे कि अपना कामधंधा शुरु कर सके.

कोरोना के दौरान बढ़ती बेरोजगारी 

कोरोना महामारी ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को बिगाड़ दिया है. भारत भी इससे अछूता नहीं रहा हैं. जनवरी की पहली तिमाही में जीडीपी दर मात्र 3.1% थी. लॉकडाउन की शुरुआत 24 मार्च से  हुई इसके साथ ही नौकरियों के जाने का सिलसिला भी शुरु हो गया. नौकरी चले जाने के गम में कई लोगों ने जान भी दे दी. लेकिन बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ती गई. कोरोना के दौरान ही सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी(सीएमईआई) के आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी की दर अप्रैल और मई में 20 से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई. राज्यों में क्रमशः बेरोजगारी दर लॉकडाउन के दौरान ही बढ़ी है. सबसे ज्यादा झारखंड में. जहां मई महीने में बेरोजगारी दर 59.2 थी, जिसके अनुसार यहां 10 में से 6 लोग बेरोजगार है, बिहार में 44.9, पंजाब में 30. 7 फीसदी है. वहीं दसूरी ओर तमिलनाडू में गिरावट देखी गई है अप्रैल महीने में बेरोजगारी की गिरावट 16.8 फीसदी थी. जबकि जून में बेरोजगारी सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई. सीएमईआई के अनुसार जून के पहले सप्ताह में नौकरी खोने वालों की तादात 8 प्रतिशत तक चली गई है. वहीं दैनिक जागरण की एक खबर के अनुसार लॉक डाउन के बाद से लोगों को पलायन शुरु हो गया. जिसके कारण लोगों ने नौकरी की तलाश करना भी बंद किया है. लेकिन वहीं दूसरी ओर देखा गया है कि बीए, एमए किए लोग मनेरगा में मजदूरी करने को मजबूर है. शहरों में जहां नौकरी करते थे वहां से निकाल दिया और अब उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है.

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नौकरियों में कटौती

बेरोजगारी तो पहले ही थी  लेकिन महामारी ने लोगों को पूरी तरह से तोड़ दिया है. कोरोना के दौरान लाखों की संख्या में लोगों को अपनी नौकरियां से महरुम होना पड़ा. खबरों की माने तो मीडिया कंपनी हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपने 27 प्रतिशत स्टॉफ को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. भडास वेबसाइट की खबर के अनुसार देश के नंबर वन हिंदी दैनिक अखबार दैनिक जागरण ने अपने गया संस्करण में लगभग डेढ दर्जन स्टॉफ से इस्तीफा ले लिया . इस्तीफा लेने वाला मामला सिर्फ यहीं नहीं हुआ है कई मीडिया संस्थाओं में लोगों से जबर्दस्ती इस्तीफा लिखवाया जा रहा है. दैनिक जागरण से निकाले गए लोगों का कहना है कि सारी जवानी यहां दे दी अब जब बच्चों का भविष्य संवारने का मौका आया तो नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.

कैब कंपनी ओला ने कोरोना के दौरान अपने 1400 स्टॉफ की छटनी की बात कही. अगर छटनी की बात की तो निकाला भी जरुर होगा क्योंकि लॉकडाउन के बाद से ही कैब की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी. फूड इंडस्ट्री का भी लगभग यही हाल है. फूड डिलीविरी कंपनी स्विगी ने अपने 1,100 स्टॉफ को तीन महीने के सैलरी देकर काम से निकाल दिया. यह तो अधिकारिक तौर पर जानाकारी दी गई . अनाधिकारिक तौर पर कई लोगों को नौकरियों से निकाला गया है.जिनके बारे में हमें रोज कहीं न कहीं से जानकारी मिलती है. इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी है जो कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे थे.  लॉकडाउन के दौरान उनका कॉन्ट्रेक्ट खत्म हो गया और दोबारा जॉब मिलनी मुश्किल हो गई. तो यह लोग भी अबे बेरोजगार हो गए. 

लॉकडाउन, तनाव, बेरोजगाजी और आत्महत्या

लॉकडाउन के बाद एक के बाद एक जाती नौकरियों ने लोगों को तनाव की तरफ ढकेल दिया.  इसी तनाव के कारण ही कई लोगों ने आत्महत्या कर ली. ज्यादातर आत्महत्या का एक ही कारण है  नौकरी जाना. सटीक आंकडे तो बता पाना मुश्किल है. लेकिन जानकारों की माने तो 2008 की बेरोजगारी के बाद आएं आत्महत्या के आंकडो से अब के आंकडे ज्यादा हो सकते है. 13 मई को टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के अनुसार चंडीगंड में 47 दिनों में 12 लोगों ने आत्महत्या कर ली. इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस में 20 मई को छपी एक खबर के अनुसार गुजरात के सूरत में 20 साल लड़के ने नौकरी जाने के कारण आत्महत्या कर ली. लड़का आसाम का रहने वाला था.  तनाव में आकर उसने पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली. 

महामारी के दौरान लॉक डाउन और नौकरी का चला जाना एक-एक करके लोगों को तनाव की तरफ खींचता जा रहा है. यूनाईट न्यूज ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार बोकारो के एक युवक ने लॉक डाउन में फंस जाने और बाद में नौकरी चले जाने के कारण आत्महत्या कर ली. खबर के अनुसार संजय पाठक लॉकडाउन से पहले अपने भाई के घर बोकारो आया था. लेकिन अचानक हुए लॉकडाउन के कारण वह गिरिडीह प्लांट में काम करने वापस नहीं जा सका. इसके बाद उसकी नौकरी चली गई. नौकरी चले जाने के बाद वह अपने परिवार के लिए चितिंत होने लगा. धीरे-धीरे तनाव का शिकार होने लगा और एकदिन फांसी लगा ली. आत्महत्या और तनाव की कड़ी में सिर्फ मजदूर या रेहडी लगाने वाली ही नहीं है ब्लकि इसकी जद में तो बड़ी-बड़ी मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने वाले लोग भी आ चुके हैं. कुमुदी ऑनलाइन की खबर के अनुसार आईटी कंपनी में काम करने वाली वीना जोसेफ ने नौकरी चली जाने के कारण आत्महत्या कर ली. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा जब बेरोजगारी के कारण लोग तनाव में आकर आत्महत्या कर ले रहे हैं. साल 2000 से 2011 के बीच देखा गया कि विश्व के अन्य-अन्य हिस्सों में बेरोजगारी के कारण आत्महत्या का प्रतिशत 20% बढ़कर 30% हो गया था. इसलिए जरुरी है इस बुरे वक्त में मजबूती के साथ एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़े ताकि किसी को अपनी जान न देनी पड़ी.

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How to be stress-free – तनाव मुक्त जीवन के लिए 5 मंत्र

How to be stress-free – ये 5  मंत्र रखेंगे आपको तनाव मुक्त


How to be stress-free? कैसे बनाये जीवन को तनाव मुक्त?

आजकल की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में लोग कब तनाव में आ जाते है, उन्हें खुद ही नहीं पता होता। कभी काम तो कभी घर परिवार से जुड़ी कई बाते आपको शरीरीक और मानसिक तनाव देकर आपको थका देती है। कभी वयक्ति सफलता के पीछे इतना अधिक भाग दौड़ करता है कि वो तनाव में आ जाता हैं। माँ-बाप बच्चों के भविष्य को लेकर तनाव में, बच्चे एक्साम्स और पढाई को लेकर, यंग लोग अपने रिलेशनशिप को लेकर तनाव में, बड़े करियर बनाने और पैसा कमाने के चक्कर में तनाव में, कोई शादी को लेकर तनाव में, बुढ़ापे में बीमारी के शरीर से तनाव आदि से तनाव कब ज़िंदगी का एक हिस्सा बन जाता है, किसी को ज्ञात नहीं होता हैं।

आइये हम आपके लिए तनाव से दूर रहने और एक खुशहाल ज़िंदगी जीने के लिए कुछ मंत्र बताएँगे जो आपके लिए बहुत उपयोगी होंगे  

1. टेक्नोलॉजी के यंत्रो जैसे मोबाइल और लैपटॉप से दूरी

एक शोध के अनुसार मोबाईल फोन आने के बाद हमारे जीवन में तनाव का बढ़ना लाजमी होता हैं। तनाव की समस्या को ज्यादा बढ़ाने में फ़ोन एक ट्रिगर का काम करता हैं। अगर तनाव में समय के लिए अपने फ़ोन और टेक्नोलॉजी के यंत्रों जैसे लैपटॉप, टीवी आदि से दुरी बनायें। घर से बाहर निकलें और परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताएं।

2. “मी टाइम  – Me time”  यानि अपने लिए निकालें  

एक दिन में 24 घण्टे होते है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्रतिदिन आप अपने लिए इसमें से कितना समय निकलते हैं। जी हाँ, यह बहुत जरुरी हैं कि रोजाना से आप अपने लिए समय निकालें। इस समय का उपयोग आप अपने लिए सोचें, ‘मी टाइम’ का सही इस्तेमाल करें। इस समय में व्यायाम करें, मैडिटेशन करें। घर और ऑफिस की चिंता से दूर रहें। मन को एकदम शांत रखें और दिमाग को परेशानियों से मुक्त रहें।

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3. अधिक से अधिक खुश रहने की कोशिश करें

जब व्यक्ति दुखी होता होता है तो तनाव से वो घिर जाता हैं। उसे मानसिक तनाव होता हैं। मानसिक तनाव को दूर करने के लिए कुछ ऐसा करने जिससे आपको ख़ुशी मिलें जैसे म्यूजिक सुनें, कही घूमकर आएं, दोस्तों से मिलें, परिवार के साथ समय बिताएं, कोई अच्छी किताब पड़ें।

4. सुबह जल्दी उठकर पार्क जाएँ

कहते है खुली हवा में साँस लेने से मानसिक और शारीरिक तनाव से नुक्ती मिलती हैं। अगर आप सुबह उठकर रोजना से पार्क जायेंगे और वहां जाकर टहलेंगे तो आपका तनाव ख़तम हो जायेगा। सुबह के वक्त रनिंग करें, ताजा हवा में खुलकर सांस लें और हो सकें तो थोड़ी देर पार्क में बैठकर मैडिटेशन करें।

5. सही लाइफस्टाइल चुने  

हमारी लाइफस्टाइल का हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ता हैं। इसके लिए हमें सही समय पर सोना और सही समय पर उठान चाहिए, अधिक से अधिक पोष्टिक भोजन खाना चाहिए और योग, व्यायाम आदि को रोजाना करना चाहिए। हम अच्छे लाइफस्टाइल को अपनाकर तनाव मुक्त हो सकते हैं।

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कुछ ऐसे टिप्स जिससे आप फील करेंगे तनावमुक्त

लाइफ में रहे हमेशा फ्रेश और रिलैक्स्ड


आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में कई बार आप खुद के अन्दर तनाव महसूस करते हैं। ऑफिस में पुरे दिन काम करने के बाद जब घर जाते हैं तो वह पूरी तरह थक जाते है। ऐसे में आपकी पूरी बॉडी में पैन और स्ट्रेच सा महसूस होता है। इससे निजात पाने के लिए और खुद को रिलेक्स करने के लिए हमे रिचार्ज होना जरूर है, इसलिए इन टिप्स को जरूर अपनायेंऐसे में आप कई काम नहीं कर पाते जो जरुरी होते है, वहीँ कई काम इसलिए ताल देते है की कहीं आप लेट ना हो जायें। ये कुछ खास टिप्स जो आपके दिमाग को हमेशा फ्रेश रखेगा।

फ्रेश लेडी

आइये जानते हैं कुछ उपाय जिससे आप खुद को फ्रेश रख सकते हैं :-

  • कोशिश करें कि घर में जूते-चप्पल का उपयोग ना करें। इससे आपके पैरों के रक्त संचार में सुधार होगा। तनाव ग्रस्त नसों को राहत मिलेगी और आपका स्ट्रेस छूमंतर हो जाएगा।
  • ऑफिस से घर आने पर आरामदेह कपड़े पहनें। पैर,हाथ व मुंह अच्छी तरह धोएं और आधे घंटे के लिए अपने घर की छत पर या पार्क में टहलने के लिए जाएं। घर में लॉन हैं तो घास पर नंगे पैर जरूर टहलें।
  • सुबह-सुबह जब आप ऑफिस जाने के लिए तैयार होते हैं, आपके बाल गिले होते हैं और जल्दी नहीं सूखते। ऐसे में इन्हें ड्राई करने के लिए बालों में कॉटन टी शर्ट लपेटकर थोड़ी देर छोड़ दोजिये क्योंकि ये तौलिए के मुकाबले जल्दी आपके बालों को सुखा देती है। इसके साथ ही आप ब्लो-ड्रॉय का इस्तेमाल भी कर सकती है।
हैप्पी पीपल
  • आपकी आंखों की पलके हल्की हैं तो उन्हें घना दिखाने के लिए उस पर बेबी पाउडर लगाकर फिर उसके बाद मस्करा के तीन कोट लगाएं। इसके बाद आप देखेंगे कि पलके घनी लगने लगी।
  • अगर दिखना है ऑल टाइम फ्रेश तो डियोडरन्ट का सहारा लेना छोड़ दें। बल्कि सुबह ऑफिस के लिए तैयार होते वक्त अपने आर्मपिट पर थोड़ा सा बेकिंग सोडा छिड़क लें। ऐसा करने से पूरा दिन आप पसीने की बदबू से दूर रहेंगे।
  • पर्सनल और ऑफिसियल लाइफ को अलग-अलग तरीकों से हैंडल करें। अपने मोबाइल और लैपटॉप को घर पर आते ही साइड में कर दें और अपनी फैमिली को टाइम दें। घर वापस आने के बाद 15 – 20 मिनट के लिए झपकी लें और आराम करें। घर आने पर शांति और ख़ुशी के कुछ पल अपने परिवार के सदस्यों के साथ बिताएं। अपने ऑफिस के कामों का प्रेशर अपने पर्सनल लाइफ में ना लायें। इससे आपके शरीर एवं आंखों का तनाव दूर होगा और शरीर को नई ऊर्जा मिलेगी।
  • ऑफिस से घर आने के बाद गनगुने पानी से फ्रेश हो जायें या अच्छी तरह से नहा लें। इससे आपकी नसें तनाव मुक्त हो जाएगी और आपको आराम एवं शांति महसूस होगी।
  • जिन चीजों को करने में आपके मन को प्रसन्नता मिलती हैं उसके बारे में सोचें और अपने आप को प्रसन्न रखने की कोशिश करें। तन और मन को स्वस्थ रखने के लिए खुश रहना आवश्यक हैं।

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सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए करे ये काम

सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के तरीके


अगर आप कैलोरी के प्रति सचेत है और अधिक वजन कम करने के लिए स्वास्थ्यवधक भोजन ग्रहण करते है। एक दिलचस्प शोध मे यह पता चला है कि कम खाने से न लोगो का वजन कम करने मे मदद मिलती है और तनाव को कम करता है जिससे सेक्स लाइफ बेहतर हो जाती है।

सेक्स टिप्स

कम कैलोरी ग्रहण करने वाले समूह के लोगों की नींद बेहतर हुई है और उनका वजन भी घट गया है। मोटापे के शिकार लोग अगर कम कैलोरी ले तो उनकी नींद और यौन प्रणाली बेहतर होती है।

ऐसे मे लोग अपने पार्टनर को शारीरिक सुख की अनुभूति नही करा पाते है। लेकिन आदतों को अपनी जीवनशैली मे शामिल कर सेक्स लाइफ को बेहतर बनाया जा सकता है।

तनाव खराब सेक्स लाइफ का एक प्रमुख कारण है। इसके लिए काफी हद तक हमारा लाइफ स्टाइल जिम्मेदार है। तनाव से बचने के लिए दिन के कामो का सही प्रबंध करे और ऑफिस और घर को अलग रखें। नियमित योग कर भी तनाव से बचा जा रहा है।

एक्सरसाइज

सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के तरीके

  •  हेल्दी सेक्सुअल जीवन व अच्छे सेक्स के लिए सकारात्मक सोच जरुरी होती है।
  • सेक्स लाइफ का भरपूर आनन्द लेने के लिए शरीर का फिट रहना भी जरुरी है। इसलिए हर रोज एकसरसाइज करें।
  • इसके अलावा यदि आप चाहें, तो जाँगिंग भी कर सकती है, क्योकि जागिंग करने से भी बेहतर सेक्स मे मदद मिलती है और शरीर फिट रहता है।
  • दो टोबलस्पून आवंले के रस मे एक एक टीस्पून सूखे आवंले का चूर्ण और शहद मिलाकर दिन मे दो बार ले इससे सेक्स पावर बढ़ती है।
  • गुलाबी, लाल, बैंगनी व जामूनी रंग की प्रकति गरम होती है, ये रंग सेक्स पावर बढाती है इसलिए अपने बेडरुम मे इन रंगो का अधिक से अधिक इस्तेमाल करे।
  • अच्छी सेक्स लाइफ का केवल तन से ही लेना देना नही रहता, बल्कि आपकी मन व संतुष्टि भी मायने रखती है।

जरुरी टिप्स

  • हफ्ते मे दो-तीन बार सेक्स करने से रोगप्तिरोधक क्षमता बढ. जाती है।
  • एंकलबोन के नीचे ऐडी मे सर्कुलर मसाज करने से सेक्सुअल उतेजना बढती है।
  • ध्यान रखे कि सेक्स के बीच गैप होना भी जरुरी है, खासतौर पर कोई इंफेक्सन पीरियडस, सेक्सुअल प्राब्लम्स आदि होने पर सेक्स नही करना चाहिए।
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सिरदर्द के बारे मे कितना जानते है आप?

सिरदर्द के बारे मे आप क्या- क्या जानते है?


सिरदर्द के बारे मे आप क्या- क्या जानते है? सिरदर्द से तात्पर्य है सिर के एक या उससे अधिक हिस्सो मे साथ ही गर्दन के पिछले भाग मे हल्के से लेकर तेज पीङा का अनुभव होना । सिर दर्द के कई पैटर्न और कई कारण होते है। हालांकि, ज्यादातर सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी की वजह से नही होता है।

सिरदर्द

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शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसने सिरदर्द अनुभव न किया हो। आज की भाग दौङ की जिदंगी मे सिरदर्द होना आम बात है। कभी अधूरी नींद के कारण, तनाव, दांत से दर्द, आखों की समस्या या वातावरण के कारण भी सिरदर्द हो सकता है।

सिर मे दर्द क्यो होता है?

सिर दर्द का कोई एक कारण नही होता ये बहुत तरीकें से होता है जैसे-

तनाव से होने वाला सिरदर्द- जीवन मे 90 प्रतिशत सिरदर्द के मामले तनाव से होता है। दिमाग की ओर खून का प्रवाह कम हो जाता है। इसलिए सिर के चारो ओर दर्द होता है।

सिर मे दर्द क्यो होता है?

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माइग्रेन- माइग्रेन सिर्फ दुखदायी दर्द नही है। कुछ लोगो को बिना सिरदर्द के भी माइग्रेन होता है। माइग्रेन क्यो होता है यह अभी तक पता नही चला। अब तक हुई खोज यह कहती है कि, यह किसी आनुवाशिक असामान्यता से उपजी तात्रिंका तंत्र की बीमारी है।

साइनस सिरदर्द- कई बार माइग्रेन को गलती से साइनस सिरदर्द समझ लिया जाता है। साइनस सिरदर्द तब होता है जब आपके साइनस मे संक्रमण हो जाता है उससे जलन होने लगती है।

सिरदर्द को ऐसे दे मात-

  • तनाव कम करे तनावरहित जीवन के लिए योग और ध्यान करें।
  • तनाव, चिंता या क्रोध जैसी भावनाओं को दबाने से सिरदर्द हो सकती है।
  • संतुलित आहार लेना चाहिए। ज्यादा समय तक भूखा ना रहे।
  • पानी की कमी भी सिरदर्द की एक वजह है। इसकलिए दिनभर मे कम से कम 7 से 8 गिलास पानी अवश्य पीये
  • रोजाना एक समय पर सोने और उठने की आदत डाले कम से कम 6 घंटे की अच्छी नींद ले।
  • ज्यादा समय तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करने या गेम्स न खेले।
  • हमेशा अच्छा सोचे और अच्छे लोगो के साथ रहे। कोई नशा न करें।

सिर दर्द यह एक आम समस्या है पर यह किसी रोग का संकेत भी हो सकता है। अगर आपको बार -बार सिरदर्द होता है तो घर पर कोई दवा लेने से बेहतर है कि आप एक बार डाक्टर को दिखाए। बार सिरदर्द किसी बङी बीमारी का प्रथम लक्षण हो सकता है।

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एजुकेशन

कैसे करे परीक्षाओं के तनाव को कम?

अगर आपको भी है परीक्षाओं का तनाव, तो ज़रूर पढ़ें ये बातें


इस संसार में कम ही बच्चे ऐसे होंगे जिन्हें परीक्षाओं की चिंता नही होती होगी। एक होशियार बच्चे को भी परीक्षाओं की चिंता अवश्य होती है। उन्हें भी डर होता है की ना जाने परिणाम कैसे आएँगे। थोड़ा बहुत परीक्षाओं का तनाव या चिंता ठीक भी होती है क्योंकि यह हमें हमारे लक्ष्य की और बढ़ने के लिए प्रेरित करता है किंतु जिन विद्यार्थियों को परीक्षा के नाम का बुखार चढने लगता है हमारे पास उनके लिए कुछ सलाह हैं जिनसे वे अपना तनाव  आसानी से कम के सकते हैं।

हम सभी जानते हैं की परीक्षाएँ किस स्तर तक का तनाव उत्पन्न कर सकती हैं और जिसके कारण हम परीक्षाओं में उतने अच्छे अंक नही ला पाते। ऐसे तनाव के कुछ संकेत हैं – थकान महसूस होना, सोने में मुश्किल होना, भूख ना लगना, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द रहना, बातों को भूलना इत्यादि। अगर आप भी ऐसे लक्षण अपने अंदर देख रहे हैं तो आपको ज़रूरत है अपने तनाव के लिए कुछ करने की।

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कैसे करें तनाव कम:-

  1. पढ़ते समय ऐसी परिस्थिति को पहचानना सीखें जिसमें आप कुछ पढ़ रहे है परंतु वह याद नही हो रहा ऐसे समय में 10 मिनट का ब्रेक लीजिए। अर्थात् आप यह ना सोचे की 6 या 4 घंटे लगातार पढ़ेंगे। अच्छे से पढ़ने के लिए ब्रेक भी आवश्यक है।
  2. अपनी क्षमताओं की उपमा अपने दोस्तों से ना करें। हर किसी का पढ़ने का तरीक़ा अलग होता है। बस यह ध्यान में रखें की जिस तरीक़े से आप पढ़ रहें हैं वह आपके लिए उचित है या नही।
  3. भोजन सही समय पर खाए और घर का बना अच्छा भोजन खाए। इससे आपके दिमाग़ को भी शक्ति मिलेगी और आपको भी। केवल चाय या कॉफ़ी पर आश्रित ना रहें।
  4. अच्छे से सोयें। यदि आप अपनी नींद क़ुर्बान कर के पढ़ रहें है तो यह बिलकुल भी अच्छा फ़ैसला नही होगा क्योंकि इससे केवल आपका ही नुक़सान होगा। इससे आपकी तबियत ख़राब होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  5. व्यायाम करें। कोई भी चीज़ व्यायाम के जितना जल्दी हमें तनाव मुक्त नही करती। तो इसे अपने टाइम टेबल में शामिल ज़रूर कर लें।
  6. बुरी आदतों को अलविदा कहें। सिग्रेट और शराब से तनाव कम नही होता। यह हमारे स्वास्थ्य को तो ख़राब करत ही हैं और साथ ही साथ तनाव भी बढाती हैं।
  7. यदि आप परीक्षा के दौरान अच्छा महसूस नही के रहे तो लम्बी और गहरी सांसें लें इससे दिमाग़ में आने वाले ख़याल कुछ देर तक रुक जाते हैं।

ये सभी बातें तनाव कम करने में बहुत सहायक होंगी। इनकी मदद से आप परीक्षाओं में अच्छे अंक ला पाएँगे और वो भी बिना किसी तनाव के।

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