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अगर आप भी चाहते हैं सुरक्षित आंखें तो मोबाइल और लैपटॉप से थोड़ी दूर बनाएं

पोष्टिक भोजन का सेवन करें।


आंखें हमारे जीवन का सबसे अनमोल उपहार है। क्योंकि आंखों के द्वारा ही हमें दुनिया को देखते हैं। इसके अलावा भी कई काम करते हैं। हमारी खूबसूरती को चार चांद लगाती है हमारी आंखे। इस खुबसूरत चीज की हमें बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। नहीं तो ये आपको धोखा दे देगी है। अगर आप चाहते है कि आपकी सबसे खूबसूरत चीज है आपको धोखा न दें तो जरा इसका ख्याल रखें।

खूबसूरत आंखे

तो चलिए आपको बताते है किन-किन कारणों से आंखें खराब होती हैं

लगातार जांच करवाते रहें

अगर आप चाहते है आंखो में प्रॉब्लम न होतो लगातार इसकी जांच करवाते रहें। खासकर डायबिटीज वाले पैसेंट जरुर इलाज करवाएं। क्योंकि डायबिटीज का सीधा असर आंखो पर पड़ता है।

कम कमप्यूटर चलाएं

आज के आधुनिक युग लोग सारा-सारा दिन अपने फोन और लैपटॉप कमप्यूटर में व्यस्त रहते हैं। इनकी रोशनी का सही असर आंखो पर पड़ता हैं। इसलिए इनका प्रयोग कुछ संभल करें। साथ ही नियमित तौर पर नींद लें। क्योंकि नहीं सोने से भी आंखो पर बुरा असर पड़ता है।

पोषक तत्व खाएं

विटामिन ए की कमी के कारण आंखों में प्रॉब्लम होती है। इसलिए हमें खाने में पोषक तत्व से भरपूर आहार लेना चाहिए। जैसे हरी साग सब्जी और विटामिन ए से भरपूर दूध मक्खन, गाजर टमाटर, पपीता, अंडे, शुद्ध घी आदि का सेवन करना चाहिए। प्रत्येक दिन 8 से 9 गिलास पानी पीना आंखों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होता है।

नियमित रुप से सफाई करें

अगर आपकी आंखों मे जलन होती है, आंखों में सूजन होती है, पीलापन आना, धुंधला दिखने जैसी समस्याएं होती है। तो अपनी आंखों की बराबर सफाई करें। दिन में कम से कम 3-4 ठंडे पानी से धोखा चाहिए।

जूस पीएं

प्रतिदिन गाजर का जूस पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। सेब के सेवन और उसका जूस पीने से आंखों की ज्योति तेज होती है। इसके साथ ही अगर आप सुबह-सुबह नंगे पैर घास पर चलते हैं तो आपकी आंखें तेज होती है।

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कंडोम और इससे जुड़ी जानकारियां और मजेदार फैक्ट्स

कंडोम से जुडी कुछ ख़ास जानकारी


आजकल के समय में स्त्री-पुरुष दोनों के लिए कंडोम का उपयोग करना जरूरी है। वैसे तो सबको ही पता है की कंडोम का इस्तेमाल लोग किसलिए करते हैं। लेकिन फिर भी बता दें की ज्यादातर पुरुष और महिला गर्वधारण को रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करती हैं। वैसे तो मार्किट में गर्वधारण को रोकने के लिए कई तरह के पिल्स और नई-नई तरह की चीजें भी उपलब्ध है। ऐसे समय में जरुरी है की दोनों अपनी-अपनी जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रख कर गर्वनिरोध के सही तरीकों को जानें। ज्यादातर गर्वनिरोध की सारी जिम्मेदारी औरतों के ऊपर ही डाल दी जाती है, लकिन आज-कल के नए तकनीक के साथ पुरुष गर्वनिरोधक न सिर्फ अपनाने में आसन हैं बल्कि ये काफी कारगर भी है।

कंडोम

आज हम कंडोम से जुड़े कुछ खास बातों के बारे में बतायेंगे:-

  • सेक्स के दौरान हमेशा नए कंडोम का ही उपयोग करें। कंडोम की मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट को हमेशा ध्यान से पढ़ें।
  • कंडोम को कभी भी खीच कर या फुलाने की कोशिश न करें, क्यूंकि मैनुफैक्चर कंपनिया पहले से ही कई तरह के टेस्ट कर चुके होते हैं।
  • कंडोम को अप्लाई करने से पहले टिप पर स्पेस देना ना भूलें।
  • सेक्स शुरू करने के पहले ही कंडोम का अप्लाई करना अच्छा होता है। क्यूंकि सेक्स के दौरान ऐसा करना रिस्की हो सकता है।
  • इस बात को ध्यान में रखें की कंडोम सीधा या उल्टा खुल सकता है। इसीलिए ध्यान से सीधी तरफ से इसका उपयोग करे।
  • इस पर किसी और तरह का लुब्रिकेंट उपयोग न करें।
  • एक बार में हमेशा एक ही कंडोम का इस्तेमाल करें। कुछ लोग डबल सुरक्षा के लिए कभी-कभी दो-दो कंडोम का उपयोग करते हैं।
  • कंडोम के इस्तेमाल से आप किसी बीमारी या HIV जैसे रोगों से दूर रह सकते हैं।
  • डिस्चार्ज के बाद इसे सावधानी से फेंक दे ताकि सीमेन फैल ना सके।
  • हमेशा साधारण और बिना किसी फ्लेवर वाले कंडोम का इस्तेमाल करें। फ्लेवर सिर्फ एक मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है, इससे क्वालिटी और सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता।
  • आप डॉटेड कंडोम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अगर इच्छा हो तो।
  • कंडोम को पॉकेट में या धुप में रखने से बचें क्यूंकि ऐसा करने से कंडोम के ख़राब होने के ज्यादा चांसेस होते हैं।
कंडोम

कुछ अजीब लेकिन मजेदार फैक्ट्स कंडोम के बारे में:-

  • स्वीडन में एक टाइम था जब एक कंडोम एम्बुलेंस हुआ करता था, जिससे अगर किसी को जरुरत हो तो वो एक विशेष नंबर डायल करके बुलाते थे।
  • ज्यादातर मार्किट में मिलने वाले कंडोम की लाइफ 4 साल तक होती है, लेकिन अगर उन्हें किसी ठन्डे जगह पे रखा जाये तो।
  • 39% हाई स्कूल के स्टूडेंट्स को काफी अच्छे से पता होता है की कंडोम का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
  • इलेक्ट्रिसिटी के द्वारा भी कंडोम का जाँच किया जाता है जिससे अगर इसमें कोई छिद्र हो तो उसका पता लगाया जा सके।
  • लगभग 40% महिलाएं खुद ही कंडोम खरीदती हैं। इससे पता चलता हैं कि वो अपने हेल्थ और खुद को लेकर काफी जागरूक हैं। इसके लिए उन्हें अपने पार्टनर पर निर्भर होने की जरुरत नही है।
  • 80% से ज्यादा पुरुषों ने ये माना है की उन्हें कंडोम का इस्तेमाल करना नहीं पसंद।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन ज़माने में भी लोगों को कंडोम के बारे में पता था।
  • कंडोम सबसे सस्ता गर्वनिरोध है।

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पुश्तैनी आभूषणों को बेचना उचित या अनुचित

पुश्तैनी आभूषणों को बेचना


पुश्तैनी आभूषण हमारे वंश की अमूल्य धरोहर होते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी घर के बड़े बुजुर्ग अपनी भावी पीढ़ी को इस आशा से सौंपते है कि वो आने वाले समय में उसे सहेज कर रखेंगे और साथ ही इस परंपरा को आगे बढ़ाएँगे। पुश्तैनी आभूषण किसी भी परिवार के गौरव व समृद्धि का प्रतीक माने जा सकते हैं।

पुरातन समय में किसी भी शुभ अवसर व त्योहार पर सोना व चाँदी खरीदना शुभ माना जाता था जिससे घर में सुख समृद्धि व लक्ष्मी का वास होता था और वही परंपरा आज भी कायम है। रुपयों से ज्यादा हीरे-जवाहरात, सोना व चाँदी तथा उनके आभूषणों को खरीदना इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उनका लंबी अवधि के लिए संरक्षण करना आसान था।

पुश्तैनीआभूषण

पहले के समय में पारंपरिक घर, हवेली या महल होते थे जिसमें इन वस्तुओं का संरक्षण करने के लिए विशेष स्थान होता था, जहां उनकी हिफाज़त करने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था होती थी। बड़े-बड़े संयुक्त परिवार होते थे जिसमें अपना व परिवार का सांझा पुश्तैनी सामान संग्रह करना आसान होता था व सुरक्षित भी।

पर आज के युग में एकल परिवार की बढ़ोतरी, छोटे-छोटे मकानों में तंग व्यवस्था में पुश्तैनी आभूषण तो क्या इन्सानों की व्यवस्था करना भी मुश्किल है। जहां तक पुश्तैनी आभूषणों का प्रश्न है उन्हे सहेजना या उन्हे बेचना परिवार की आर्थिक स्थिति पर अधिक निर्भर करता है।

संभालनाऔरसुरक्षामुश्किल

कई बार कुछ आभूषण इस प्रकार के बने होते हैं कि उनकी महत्वता आज के परिवेश में बिलकुल गौण होती है और उनको संभालने का कोई औचित्य ही नहीं होता पर अपव्यय व ऐशो-आराम कि ज़िंदगी जीने के लिए भी अपनी पुश्तैनी धरोहरों को बेचना भी उचित नहीं होता।

आज के समय में पुश्तैनी आभूषणों को जितनी लंबी अवधि के संभाल कर रखा जाए उतना ही अच्छा है। बिखरते परिवारों में पुश्तैनी आभूषणों पर अपनी मिल्कियत के लिए जद्दोजहत उनका मूल्यांकन कम कर देता है। आज के दौर में आभूषणों को संभालना एक सफ़ेद हाथी को पालने के समान हो गया है व असुरक्षित भी।