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बेवजह नहीं है उबासी लेना: ये 4 बातें आपको जान लेनी चाहिए

उबासी को ना करें नज़रंदाज़, साइंटिफिक रिजन्स सुनकर हो जायेंगे हैरान


उबासी को अमूमन मामूली ही समझा जाता है लेकिन इसे एक आम चीज की तरह समझना शायद गलती हो सकती है। उबासी लेते समय आपका शरीर आपसे बहुत कुछ कहता है। जब सुबह-सुबह कोई ऑफिस आए और सीट पर बैठते ही उबासी लेने लगे तो इसका मतलब सिर्फ इसी चीज से निकाला जाता है कि उसने अपनी नींद कम्पलीट नहीं की है और उसे नींद आ रही है। चाहे या तो आप अगर किसी कॉलेज के लेक्चर के दौरान या फिर किसी डिनर डेट पर उबासी ले रहा हो तब भी हर बार यही माना जाता है कि उस इंसान को नींद आ रही है, लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है?

उबासी लेना

लेकिन इन सब में साइंस का कुछ अलग कहना है। कभी ऐसा हुआ है किसी बेहद करीबी इंसान से मिलने गए हों हाथ मिलाते ही आपने उबासी ली हो और थोड़ी देर बाद आपके दोस्त को भी उबासी आ गई हो? सीधी सी बात यह है कि अगर वाकई उबासी लेने का कनेक्शन सिर्फ नींद से है तो इन सब का मतलब एक तो नहीं हो सकता है।

आइये जानते है आखिर क्या कहना चाहता है आपका शरीर आपसे?

  1. नजदीकी नाता

अगर आप किसी इंसान के ज्यादा करीब हैं और उसे अगर उबासी आएगी तो आपको भी आएगी औए ये बड़ा ही कॉमन एजेंडा है। ये किसी छूत की बीमारी की तरह ही है। अगर आपके दिल के करीब कोई इंसान है और उससे आप मिल रहे हैं और उसे किसी भी कारण से उबासी आती है तो आप भी उसका भरपूर साथ निभाएंगे। ऐसा अक्सर पति-पत्नी के मामले में भी होता है।

सन 2011, की एक रिसर्च में यह बात सामने आयी थी कि परिवार वालों, दोस्तों के मामले में ये सबसे ज्यादा होती है और अगर कोई अपरिचित होता है तो इसका कोई असर नहीं होता।

  1. दिमाग कूल होना चाहता है

उबासी तभी आती है जब दिमाग को ठंडक चाहिए होती है। ये हाल ही में की गई वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो कहती है कि इससे दिमाग को कुछ ताजा हवा मिलती है और वो ठंडा होता है।

सन 2011 की स्टडी ये भी कहती है कि नींद के वक्त दिमाग ज्यादा काम करता है। जब किसी को नींद चाहिए होती है या किसी वजह से वो कम सोया होता है तो दिमाग का तापमान बढ़ जाता है। उस समय में इंसान को कुछ ज्यादा उबासी आती है जिससे दिमाग भी थोड़ा ठंडा होता है।

उबासी लेना
  1. जितनी बड़ी उबासी, उतना बड़ा दिमाग

हाल में ही की गई रिपोर्ट, जिसे बायोलॉजी लेटर्स के नाम से पब्लिश किया गया है। ये रिपोर्ट बताती है कि स्तनधारियों के शरीर में जितना भारी दिमाग होगा, उतनी ही बड़ी उबासी ली जाएगी। कारण साफ है दिमाग को ठंडा करने के लिए और कुछ सेल्स या न्यूरॉन्स को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है काम करने के लिए।

इसके अलावा, जब भी शरीर को लगेगा कि ऑक्सीजन की कमी हो रही है तब-तब उबासी आएगी।

  1. हार्ट अटैक की निशानी

अगर दिल की कोई समस्या होने वाली है या हो चुकी है, हार्ट अटैक आने वाला है या फिर कोई ट्यूमर है तब इंसान को जरूरत से ज्यादा उबासी आएगी। वास्तव में ये थोड़ा डरावना है लेकिन  घबराए नहीं, क्यूंकि ये तब होगा जब इतनी उबासी आएगी जो जीवन में कभी नहीं आई होगी।

हार्ट अटैक के समय कई मांसपेशियां एक्टिव हो जाती है। इसमें से एक नस दिमाग से लेकर नीचे पेट तक को जाती है। इस रिएक्शन के कारण इंसान को जरूरत से ज्यादा उबासी आती है। इसके अलावा भी ऐसी बीमारियां जैसे माइग्रेन, घबराहट, ट्यूमर आदि में भी उबासी आती है।

अब अगर कभी आप बोर हो रहे हों या उबासी आए तो सोचने के लिए बहुत कुछ होगा कि आखिर ये हो क्यों रहा है और अपने बॉडी पे एक बार ध्यान जरुर दें।

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सिरदर्द के बारे मे कितना जानते है आप?

सिरदर्द के बारे मे आप क्या- क्या जानते है?


सिरदर्द के बारे मे आप क्या- क्या जानते है? सिरदर्द से तात्पर्य है सिर के एक या उससे अधिक हिस्सो मे साथ ही गर्दन के पिछले भाग मे हल्के से लेकर तेज पीङा का अनुभव होना । सिर दर्द के कई पैटर्न और कई कारण होते है। हालांकि, ज्यादातर सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी की वजह से नही होता है।

सिरदर्द

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शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसने सिरदर्द अनुभव न किया हो। आज की भाग दौङ की जिदंगी मे सिरदर्द होना आम बात है। कभी अधूरी नींद के कारण, तनाव, दांत से दर्द, आखों की समस्या या वातावरण के कारण भी सिरदर्द हो सकता है।

सिर मे दर्द क्यो होता है?

सिर दर्द का कोई एक कारण नही होता ये बहुत तरीकें से होता है जैसे-

तनाव से होने वाला सिरदर्द- जीवन मे 90 प्रतिशत सिरदर्द के मामले तनाव से होता है। दिमाग की ओर खून का प्रवाह कम हो जाता है। इसलिए सिर के चारो ओर दर्द होता है।

सिर मे दर्द क्यो होता है?

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माइग्रेन- माइग्रेन सिर्फ दुखदायी दर्द नही है। कुछ लोगो को बिना सिरदर्द के भी माइग्रेन होता है। माइग्रेन क्यो होता है यह अभी तक पता नही चला। अब तक हुई खोज यह कहती है कि, यह किसी आनुवाशिक असामान्यता से उपजी तात्रिंका तंत्र की बीमारी है।

साइनस सिरदर्द- कई बार माइग्रेन को गलती से साइनस सिरदर्द समझ लिया जाता है। साइनस सिरदर्द तब होता है जब आपके साइनस मे संक्रमण हो जाता है उससे जलन होने लगती है।

सिरदर्द को ऐसे दे मात-

  • तनाव कम करे तनावरहित जीवन के लिए योग और ध्यान करें।
  • तनाव, चिंता या क्रोध जैसी भावनाओं को दबाने से सिरदर्द हो सकती है।
  • संतुलित आहार लेना चाहिए। ज्यादा समय तक भूखा ना रहे।
  • पानी की कमी भी सिरदर्द की एक वजह है। इसकलिए दिनभर मे कम से कम 7 से 8 गिलास पानी अवश्य पीये
  • रोजाना एक समय पर सोने और उठने की आदत डाले कम से कम 6 घंटे की अच्छी नींद ले।
  • ज्यादा समय तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करने या गेम्स न खेले।
  • हमेशा अच्छा सोचे और अच्छे लोगो के साथ रहे। कोई नशा न करें।

सिर दर्द यह एक आम समस्या है पर यह किसी रोग का संकेत भी हो सकता है। अगर आपको बार -बार सिरदर्द होता है तो घर पर कोई दवा लेने से बेहतर है कि आप एक बार डाक्टर को दिखाए। बार सिरदर्द किसी बङी बीमारी का प्रथम लक्षण हो सकता है।

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