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सेहत

देर तक काम करना बन सकता है महिलाओं मे अवसाद का कारण

जाने क्यों हो जाती है महिलाये अवसाद का शिकार


महिलाओं में अवसाद का कारण

अगर हम 21 वीं सदी की बात करें तो महिलाएं  समाज में पुरुषों से कंधे से कन्धा मिलकर चलने को तैयार हैं और इसके लिए वो हर क्षेत्र में अव्वल बन  रही हैं। आजकल की महिलायें घरेलू काम-काज के बदले बाहर निकलकर ऐसे काम कर रही है है जिन  पर हक़ कभी सिर्फ पुरुषों को हुआ करता था। अगर हम विकास की बात करें तो ये एक अच्छी बात है लेकिन ऐसा करने से महिलाओ में अवसाद और तनाव की दर बढ़ती जा रही हैं।

क्या आप जानते है लंबे समय तक काम करने से महिलाओं को अधिक अवसाद होता है जबकि पुरुषों में ऐसा नहीं होता है। हाल ही में किए गए एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक तनाव और अवसाद से ग्रस्त रहती है और इसका कारण है उनका लम्बे समय तक काम करना। आंकड़ों के अनुसार, अगर कोई महिला एक सप्ताह में 55 घंटे से अधिक काम करती है तो वो अवसाद और तनाव की शिकार हो सकती हैं।

साल 2018  में नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में काम करने के लिए वर्किंग हॉर्स सबसे ज्यादा हैं। शहरों में लोग औसतन एक हफ्ते में 53-54 घंटे काम करते हैं और वही बात अगर हम गांवों की करें वो वहा एक सप्ताह में लगभग 46-47 घंटे काम किया जाता हैं। 

आइये जानते है नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

अध्ययन के अनुसार, प्रति सप्ताह 35-40 घंटे की काम करने वाली महिलाओं की तुलना में एक सप्ताह में 55 घंटे से अधिक काम करने वाली महिलाओं में
अधिक अवसाद ग्रस्तता वाले लक्षण दिखाई दिए।

• अध्ययन में, 55 घंटे से अधिक काम करने वाली महिलाओं में तनाव के अतिरिक्त अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी नजर आई।
• इसके विपरीत जिन पुरुषों ने 55 घंटे से अधिक लंबे समय तक काम किया, उनमे अवसाद और तनाव के लक्षण नहीं दिखाई दिए।
• इस अध्ययन में महिला और पुरुषों के बीच परिणामों में अंतर का कारण दोनों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को माना गया।
• जब महिलाएं समाज में अपनी पहचान स्थापित करने की कोशिश करती हैं और साथ ही उन्हें घर की जिम्मवारियों को भी उठाना होता है तो उन्हें अवसाद और तनाव रहता हैं।

लम्बे समय तक काम करने से एक महिला की मानसिक स्थिति में बदलाव आता है और वो अवसाद, तनाव से घिर जाती हैं इसके लिए हम आपको कुछ उपाय बताएँगे जिन्हे करने से आप अपनी पहचान स्थापित करने के साथ-साथ घर की जिम्मवारियों को भी उठा सकती हैं –

• लंबे समय तक काम के घंटे के बीच मस्तिष्क को कार्यशील रखने के लिए अपने काम के बीच छोटे -छोटे ब्रेक लेने की कोसिश  करें।
• अपने काम को  बोझ ना समझें और अपने काम से प्यार करें।
• जैसे ही आपको लगता है कि तनाव महसूस कर रहे है तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए कही घूमने जाएँ, मूवी देखें या हो सकें तो एक छोटा सा ट्रिप भी प्लान कर सकते हैं।
• रोजना उठकर अपने लिए समय निकालें और व्यायाम और मैडिटेशन करें।
• कम से कम 7 – 8 से घंटे की नींद लें, पौष्टिक और नुट्रिशयस डाइट लें।

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लाइफस्टाइल

तनाव से छूटकारा पाने के लिए, ये करें

     आज के वक्‍त हर कोई तनाव जैसी समस्‍या से जुझ रहा है


आज कल भागती दौड़ती जिन्‍दगी में हम अपने के वक्‍त ही नहीं दे पाते है।  ऑफिस में काम का प्रेशर और घर में जिम्‍मेदारी का बोझ। ऐसी जिन्‍दगी में हम अपने हसंने और मन पसन्‍द कामों के लिए वक्‍त नहीं निकल पाते और ये ही हमारे स्ट्रेस  यानि टेंशन का कारण बन जाता है। आज के वक्‍त हर कोई तनाव जैसी समस्‍या से जुझ रहा है। इसका  कब और कितनी जल्‍द लेवल  बढ़ जाता है, ये हम डेली रुटीन में सही तरीके से मैनेज भी नहीं कर पाते हैं।  तनाव जैसी समस्‍या से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जो हम जरूरत पड़ने पर आसानी से कर सकें।

तनाव

आज हम आप को बताएंगे कुछ ऐसे काम जो आप आसानी से कर सकते है। साथ ही उससे आपकीटेंशन  भी कम हो जाएगा।

  • जब आप  टेंशन महसूस करें तो सिर्फ पांच मिनट आंख बन्‍द कर के चुप-चाप बैठ जाएं। उस के बाद आप अच्‍छा महसूस करेंगी।
  • टेंशन होने पर तीन बार गहरी सांस यानि डीप ब्रीदिंग लें।
  • अगर आप ऑफिस में है और टेंशन महूसस कर रहे है तो थोड़ा ठंडा पानी पिएं। उस के आप अच्‍छा महूसस करेंगी।
  • हाथ – पैर फैलाकर दो से तीन तक स्‍ट्रेचिंग करें।
  • कुछ लोग तनाव में लाइट म्‍यूजिक सुना पसन्‍द करते है। गाने सुने से आप खुद को टेंशन  से दूर महूसस करते है।  इसलिए तनाव में अपने मनपसंद गाना सुन सकते है।
  • टेंशन में हम हसंना भूल जाते है, इसलिए तनाव के वक्‍त खूब हसंने की कोशिश करें।
  • एक हफ्ते में से एक दिन अपने उन दोस्‍तों के साथ बिताएं, जिनके साथ वक्‍त बिताना आप को अच्‍छा लगता है।
  • अगर आप को किताब पढ़ने का शौक है, तो आप किताब भी पढ़़ सकते है।

कुछ लोग तनाव दूर करने के लिए शराब और सिगरेट का सहरा लेते है, मगर ऐसा ना करें। सिगरेट और शराब ना पिएं , इससे तनाव दूर नहीं होता है।

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साहित्य और कविताएँ

आइए जाने किताबों को पढ़ने के फायदे

आइए जाने किताबों को पढ़ने के फायदे


आइए जाने किताबों को पढ़ने के फायदे:- आप के बहुत दोस्‍त होंगें लेकिन किताबें ए‍क व्यक्ति की सब से अच्छी दोस्त मानी जाती है। मगर कई लोगों को किताबें बोरिंग भी लगती है, वहीं दूसरी तरफ बहुत से लोगों को किताबें पढ़ना बहुत ही अच्छा लगता है। जिन लोगों को किताबें पढ़ना अच्छा लगता है उन्हें हर टॉपिक की किताबें पढ़ना अच्छा लगता है और वो हर टॉपिक की किताब पढ़ सकते है। वैसे तो किताबों से दोस्ती करने के लिए हमें बचपन से ही कहा जाता है। किताबों से दोस्ती करने से हमारे ज्ञान के भंडार में वृद्धि होती है। साथ ही हमारे व्यक्तित्व में भी निखार लाती है। इस दोस्‍ती से हमारे स्वास्थ्य पर भी कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते है।  चलिए आज हम आप को बताते है, किताबों को पढ़ने के फायदों के बारे में।

किताबें

किताबों को पढ़ने के फायदें

  • हर रोज किताबों को पढ़ने से आप का हर दिन खुशनुमा बना रहता है। जब भी आप फ्री हो तब किताबों को पढ़ सकते है। इस से आपका समय का सदुपयोग भी होता है और आप का समय भी आसानी से कट जाता है। इससे हम खाली वक्‍त में भी अच्‍छी बातें सोच पाते है।
  • किताब पढ़ने की आदत आप के दिमाग को लंबे वक्‍त के लिए जंवा रख सकती है। जिन लोगों का पेशा रचनात्मक कार्यों का होता है उन को किताबों जरूरी पढ़नी चाहिए। किताबें पढ़ने वालें लोगों का दिमाग अन्य लोगों की तुलना में ज्‍यादा होता है। साथ ही दिमाग करीब 32 प्रतिशत अधिक फ्रेश रहता है।
  • ऐसा माना जाता है, कि किताबों को पढ़ने वालों का आईक्यू लेवल अच्छा होता है। इस आदत से व्यक्ति रचनाशील बनता है और साथ ही सभी सवालों के जवाबों को सटिकता के साथ हल कर सकता है।
  • दरअसल, तनाव होने पर व्यक्ति के शरीर में हार्मोन में बदलाव होते है। किताबों को पढ़ने से व्यक्ति का मन शांत होता है और वह कार्टिसोल के स्तर को कम करता है। जिस से हम तनाव से दूर रहते है। इसलिए हमें किताबें पढ़नी चाहिए। तनाव दूर होने के साथ एक नए ज्ञान की प्राप्ति होती है।
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लाइफस्टाइल

फोबिया के प्रकार

फोबिया के प्रकार


फोबिया या भय एक विशेष वस्तु, पशु, पक्षी, प्राणी या गतिविधि के प्रति असामान्य डर को कहा जाता है। इसी हालात को सोचकर या देखकर डर जाना, उससे बचने की हर संभव कोशिश करना। उन हालात क्व आते ही, हाथ पैर फूल जाना – यही सब से एक फोबिया पीड़ित इंसान जूझता है।

फोबिया एक प्रकार का मानसिक रोग।

फोबिया के लक्षण।

फोबिया पीड़ित आम लोगो के जैसे ही होते है। उनके डर के बारे में तब बापट चलता है जब या तोह वह उस परिस्थिति में पड़ते है या अपने डर के बारे में किसी से बात करते है। फोबिया का दौरा पड़ने पर बहुत बेचैनी होती है। सिर दर्द, तनाव, बहुत पसीना आना, घबराहट होना, साँस की रफ़्तार तेज़ होना कुछ आम लक्षण है।

ऐसी स्थिति में, एक व्यक्ति को पेट खराब होना या शरीर में दर्द होना या रक्तचाप बढ़ने की शिकायत भी हो सकती है। ऐसे में उस व्यक्ति के साथ किसी भी बात के लिए ज़बरदस्ती करना हानिकारक हो सकता है।

कुछ आम फोबिया

१) अगोरफोबिया- भीड़ का डर
२) सोशल फोबिया- समाज का डर
३) विशिष्ट फोबिया- कुछ ख़ास चीज़ों से लगने वाला डर
1) एक्रोफोबिया- ऊँचाई का डर
2) क्लौस्ट्रॉफोबिया- घुटन या बंद होने का डर
3) हेमोफोबिया- खून या घाव होने का डर
4) नोमोफोबिया- फोन न होने का डर
5) ग्लोस्सोफोबिया- लोगो के सामने परफॉर्म करने का डर

 

 

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