पॉलिटिक्स

स्वामी ने कईयों को दिखाया राजनीति से बाहर का रास्ता

जहां एक फोन कॉल ने सुब्रमण्यम स्वामी की जिदंगी को पूरी तरह से राजनीतिमय बना दिया, वहीं आज स्वामी ने कईयों को राजनीति के बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

2जी स्पेक्ट्रम हो या अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला हो, चाहे रघुराम राजन हो या अरविंद सुब्रमण्यम हो जिसकी पीछे पड़ गए उसे बाहर का रास्ता दिखाकर ही सांस लिया है।

स्वामी जितना राजनीति में निपुण उतना ही अर्थशास्त्र में भी है। महज 24 साल की उम्र में सिर्फ साढ़े तीन साल में पीएचडी पूरी वाले स्वामी हर मामले में निपुण है।  जब उनका विरोधी सोचता है कि वह बच गया वहीं वह उसे पकड़ते है और तब तक नहीं छोड़ते जबकि पूरा फैसला न जाए।

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तो चलिए आज आपको बताते है स्वामी से जुड़ी राजनीतिक बातें बताते हैं

  • लंबी समय तक राजनीति से दूर रहने के बाद जब स्वामी ने दोबारा से राजनीति में एंट्री की तो 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मोबाइल स्पेक्ट्रम बैंड के अवैध आवंटन पर ए.राजा पर मुकद्दमा चलाने की अनुमति मांगकर 2जी घोटाले का पर्दाफाश किया था। सिर्फ पर्दाफाश नहीं किया ब्लकि ए. राजा को जेल तक की शक्ल दिखा दी।
  • अगस्ता वेस्टलैंड डील मामले में भी स्वामी ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया था। अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले को उजागर करने भी बहुत हद तक सुब्रमण्यम का हाथ था। इसी साल बजट सत्र के दौरान जब अगस्त वेस्टलैंड पर चर्चा शुरू हुई थी तो स्वामी जैसे ही घुसखोरी के बारे में बोलने लगे तो कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने उन्हें गलत भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया था. वह उससे पीछे नहीं हटे और अब भी जब कभी मौका मिलता है कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हैँ।
  • आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन के पीछे तो जैसे हाथ धोकर पड़े कि उन्हें मजबूरन कार्यकाल खत्म होने से पहले ही यह घोषणा कर दी वह दूसरी बार पदभार नहीं संभालेगें। स्वामी ने पीएम को चिट्ठी लिखकर रघुराम राजन के खिलाफ सीबीआई के अंतर्गत एसआईटी से जांच की मांग की थी। स्वामी ने आरोप लगाया था कि आरबीआई ने स्माल फाइनेंस बैंक(एसएफबी) को लाइसेंस देने में धांधली की है। स्वामी का कहना था कि जिन संस्थाओं बैक लाइसेंस के लिए आवेदन किया और जिन्हें भी यह मिल है उनमें से जिन संस्थाओं को लाइसेंस दिया गया है उनमें से किसी ने भी शर्तों को पूरा नहीं किया है। जिससे पता चलता है कि यह भ्रष्टाचार। बस इसी के बाद भ्रष्टाचार के खिलाए खड़े हो गए और करवा दिया बाहर।
  • इन सबके बाद अब बारी है आई है बीजेपी सरकार के आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम की जिसको भी वह बाहर का रास्ता दिखाना चाहते है। मजेदार बात यह है कि अरविंद के सपोर्ट में तो सरकार के वरिष्ठ नेता भी हैं। लेकिन स्वामी का कहना है कि जब भी समय आने पर वह सच्चाई साबित करके सांस लेगें। स्वामी का कहना है कि अरविंद ने अमेरिकी कांग्रेस से भारत के खिलाफ कारवाई करने को कहा था। अब देखना यह है कि स्वामी अरविंद को बाहर का रास्ता दिखा पाते है कि नहीं।
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