CWG 2026 से पहले मीराबाई चानू का बड़ा ऐलान, कहा- एशियन गेम्स है मेरा असली लक्ष्य
CWG 2026, भारतीय वेटलिफ्टिंग की स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2026 से पहले बड़ा बयान देकर खेल जगत में चर्चा छेड़ दी है। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता और विश्व चैंपियन मीराबाई ने साफ कहा है कि वह ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी पूरी ताकत नहीं झोंकेंगी।
CWG 2026 को लेकर मीराबाई चानू का मास्टर प्लान, एशियन गेम्स के लिए बचाएंगी दम
CWG 2026, भारतीय वेटलिफ्टिंग की स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2026 से पहले बड़ा बयान देकर खेल जगत में चर्चा छेड़ दी है। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता और विश्व चैंपियन मीराबाई ने साफ कहा है कि वह ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी पूरी ताकत नहीं झोंकेंगी। उनका सबसे बड़ा लक्ष्य 2026 के एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीतना है।मीराबाई का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में जुटी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर प्रतियोगिता महत्वपूर्ण होती है, लेकिन खिलाड़ियों को अपने शरीर और लंबे करियर को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकताएं तय करनी पड़ती हैं।
एशियन गेम्स पर पूरा फोकस
मीराबाई चानू ने कहा कि एशियन गेम्स का स्तर कॉमनवेल्थ गेम्स की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है। चीन, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, उज्बेकिस्तान और कजाखस्तान जैसे देशों के मजबूत वेटलिफ्टर वहां चुनौती पेश करते हैं। ऐसे में एशियन गेम्स में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है।उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य अपने प्रदर्शन को सही समय पर शिखर पर पहुंचाना है। इसी कारण वह अपनी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं की योजना उसी हिसाब से बना रही हैं।
CWG में भी करेंगी हिस्सा
हालांकि मीराबाई ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स को हल्के में नहीं ले रही हैं। वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी और अच्छा प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करेंगी, लेकिन उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम इस तरह तैयार किया गया है कि एशियन गेम्स के समय वह अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में रहें।उन्होंने कहा कि लगातार बड़े टूर्नामेंट खेलने से शरीर पर काफी दबाव पड़ता है। इसलिए फिटनेस और रिकवरी का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
भारतीय टीम को बड़ा झटका
इस बीच भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम को कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले बड़ा झटका भी लगा है। डोपिंग नियमों के उल्लंघन के कारण भारत के कोटे में कटौती कर दी गई है। इसके चलते टीम के एक खिलाड़ी को बाहर होना पड़ा है और अब भारतीय दल पहले से छोटा होगा। इसके बावजूद मीराबाई चानू टीम की सबसे अनुभवी और प्रमुख खिलाड़ी होंगी।
चोट से वापसी के बाद नई रणनीति
पिछले कुछ वर्षों में मीराबाई चानू चोटों से भी जूझती रही हैं। पेरिस ओलंपिक चक्र के दौरान उन्हें फिटनेस संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब वह पूरी तरह फिट होकर वापसी कर चुकी हैं और अपने शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालने से बचना चाहती हैं।उनका मानना है कि अगर खिलाड़ी पूरे सीजन में हर प्रतियोगिता में 100 प्रतिशत देने की कोशिश करता है तो बड़े टूर्नामेंट तक पहुंचते-पहुंचते उसकी ऊर्जा और फिटनेस प्रभावित हो सकती है।
अनुभवी खिलाड़ी का नजरिया
मीराबाई ने कहा कि अनुभव के साथ खिलाड़ी यह सीखता है कि कब कितना जोर लगाना है। उन्होंने बताया कि अब उनका लक्ष्य केवल एक प्रतियोगिता जीतना नहीं, बल्कि लंबे समय तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है।उनके अनुसार, एशियन गेम्स और उसके बाद होने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट भारत के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इसलिए तैयारी भी उसी स्तर की की जा रही है।
युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
मीराबाई चानू आज भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक हैं। उन्होंने अपने करियर में विश्व चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स, राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भारत का नाम रोशन किया है।उनकी मेहनत और अनुशासन के कारण देश में वेटलिफ्टिंग को नई पहचान मिली है। कई युवा खिलाड़ी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।
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कोचिंग स्टाफ भी सहमत
भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ का भी मानना है कि खिलाड़ियों की पीक परफॉर्मेंस सही समय पर आनी चाहिए। आधुनिक खेल विज्ञान में प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखकर ट्रेनिंग पीरियडाइजेशन की जाती है, ताकि खिलाड़ी सबसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे सके।मीराबाई की रणनीति भी इसी सिद्धांत पर आधारित मानी जा रही है।
प्रशंसकों की उम्मीदें बरकरार
हालांकि मीराबाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है, लेकिन भारतीय खेल प्रेमियों को उनसे पदक की उम्मीद अब भी है। उनकी तकनीक, अनुभव और मानसिक मजबूती उन्हें किसी भी प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार बनाती है।यदि वह फिट रहती हैं तो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए पदक जीत सकती हैं और उसके बाद एशियन गेम्स में इतिहास रचने की कोशिश करेंगी।मीराबाई चानू का यह फैसला बताता है कि आधुनिक खेलों में केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि सही रणनीति भी सफलता की कुंजी होती है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका अंतिम लक्ष्य एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीतना है। कॉमनवेल्थ गेम्स उनके लिए महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन वह अपनी पूरी तैयारी उस मंच के लिए बचाकर रखना चाहती हैं जहां प्रतिस्पर्धा सबसे कठिन होगी। भारतीय खेल प्रेमियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि क्या मीराबाई अपनी इस रणनीति को पदक में बदलने में सफल होती हैं।
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