Story of Dulla Bhatti: ढुल्ला भट्टी की कथा इतिहास, महत्व और रोचक कहानी
Story of Dulla Bhatti:लोहड़ी क्यों मनाई जाती है और ढुल्ला भट्टी की कथा का क्या महत्व है? जानें Lohi 2026 की परंपरा, इतिहास, ढुल्ला भट्टी की कहानी और इस त्योहार से जुड़ी खास बातें।
Story of Dulla Bhatti:लोहड़ी का इतिहास और ढुल्ला भट्टी की अमर कथा
Story of Dulla Bhatti लोहड़ी पंजाब और उत्तर भारत का प्रमुख त्योहार है, जिसे हर साल जनवरी में सर्दियों की विदाई और नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व का सबसे खास हिस्सा ढुल्ला भट्टी की कथा है, जिन्हें लोकनायक और गरीबों का रक्षक माना जाता है। लोहड़ी के मौके पर गाए जाने वाले लोकगीतों में उनकी बहादुरी और न्यायप्रियता का गुणगान किया जाता है। यही वजह है कि लोहड़ी केवल त्योहार नहीं, बल्कि पंजाब की सांस्कृतिक पहचान भी है।
ढुल्ला भट्टी की कथा और इसका खास महत्व
पंजाब के मशहूर त्योहार लोहड़ी में ढुल्ला भट्टी की कहानी क्यों जुड़ी हुई है?
भारत का त्योहार लोहड़ी हर साल जनवरी में धूमधाम से मनाया जाता है। यह मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, उत्तर भारत और सिख समुदाय का प्रिय पर्व है। लोहड़ी को सर्दियों के मौसम की विदाई और नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है। इस त्योहार का जश्न खासतौर पर ढुल्ला भट्टी नामक वीर और लोकनायक की कथा के साथ जुड़ा हुआ है।
लोहड़ी का इतिहास और महत्व
लोहड़ी का संबंध प्राचीन कृषि संस्कृति से है और यह प्रभात सूर्य के पुनः उपलब्ध होने, अंधकार से उजाले की ओर संक्रमण का प्रतीक है। यह दिन सर्दियों की रातों के बाद सामाजिक मेलजोल, गानों और आग के चारों ओर बैठकर गीते-बजते हुए मनाया जाता है। लोग इस दिन गन्ना, मूंगफली, तिल और रेवड़ी जैसे व्यंजन बनाते हैं और बच्चों को मुंह मीठा खिलाते हैं।
कथा जो दिल जीत लेती है
ढुल्ला भट्टी एक लोकनायक और साहसी व्यक्ति थे जिनकी कथा पंजाब की लोककथाओं में सदियों से सुनाई जाती है। कहा जाता है कि मुगल काल में जब स्थानीय लोगों पर अत्याचार बढ़े हुए थे, तब ढुल्ला भट्टी ने अपने शूरवीर स्वभाव और न्यायप्रियता से कई लोगों की मदद की।
सबसे लोकप्रिय कहानी उनकी बहादुरी की है, जिसमें उन्होंने मुगल सुल्तानों द्वारा बंदी बनाई गई लड़कियों को बचाया था और उनकी शादी करवाई थी। इस वजह से लोग उन्हें एक रक्षक और नायक के रूप में याद करते हैं।
लोहड़ी के अवसर पर ढुल्ला भट्टी का गीत
लोहड़ी पर गाए जाने वाले लोकगीतों में ढुल्ला भट्टी की वीरता की कहानियाँ गायी जाती हैं। बच्चे और बड़े मिलकर आग के चारों ओर नाचते-गाते हैं और ढुल्ला भट्टी को श्रद्धांजलि देते हैं। गीत के माध्यम से ढुल्ला भट्टी की मशहूर पंक्तियाँ और गुणगान भी आज तक जीवित हैं।
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लोहड़ी कैसे मनाई जाती है?

- आग जलाना: रात के समय आग के चारों ओर इकट्ठा होना
- भांगड़ा और गिद्दा नृत्य: ढोल की थाप पर नृत्य
- खास व्यंजन: गजक, तिल, मूंगफली, रेवड़ी आदि तैयार करना
- भेट देना: आग में तिल, गुड़ और अनाज डालना शुभ माना जाता है
- परिवार और दोस्त: एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाई देना
तारीख और शुभ मुहूर्त
लोहड़ी 2026, 13 जनवरी 2026 को धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन घरों में खुशियों का माहौल और उत्सव की उमंग देखते ही बनती है। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं और नववर्ष की शुरुआत का आनंद लेते हैं।
लोहड़ी का आधुनिक महत्व
आज लोहड़ी केवल एक कृषि त्योहार नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक मेलजोल, सांस्कृतिक पहचान और परिवार की एकता का प्रतीक बन चुका है। युवा पीढ़ी इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं और लोककला तथा संगीत को संरक्षित रखते हैं।
निष्कर्ष
लोहड़ी का त्योहार सर्दियों की ठिठुरन से लेकर नये उमंगों और खुशियों की शुरुआत तक का प्रतीक है। ढुल्ला भट्टी की कथा इस उत्सव को एक वीर कथा और लोकविश्वास से जोड़ती है, जिससे यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा की जीवंत धरोहर बन जाता है।
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