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Shiv Rudrashtakam: तुरंत फल देता है भगवान शंकर का श्री शिव रुद्राष्टकम, सात दिन लगातार पाठ करने से शत्रुओं पर प्राप्त होती है विजय

Shiv Rudrashtakam: श्री शिव रुद्राष्टकम का पाठ कर भी भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। 7 दिन तक ‘श्री शिव रुद्राष्टकम’ स्तुति का पाठ करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

Shiv Rudrashtakam: ‘श्री शिव रुद्राष्टकम’ का अर्थ और महत्व, पाठ करने से तुरंत प्रसन्न होते भोलेनाथ

हिंदू देवी-देवताओं में भगवान शंकर को देवों के भी देव महादेव कहा जाता है। अगर कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से भगवान भोलेनाथ की पूजा पाठ, भक्ति करता है तो उस पर शिव की कृपा बनी रहती है। कहा जाता है भगवान शिव को प्रसन्न करना सबसे ज्यादा आसान है। क्योंकि वे बहुत भोले हैं जिससे उनका नाम भोलेनाथ पड़ा। आपको बता दें कि भगवान शिव एक लोटा जल में ही प्रसन्न हो जाते हैं। वहीं बेल पत्र उन्हें अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि शिव को बुलाना है तो बेल पत्र सबसे अच्छा तरीका है। वे एक बेल पत्र पर भी दौड़े चले आते हैं। आप चाहें तो श्री शिव रुद्राष्टकम का पाठ कर भी भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। 7 दिन तक ‘श्री शिव रुद्राष्टकम’ स्तुति का पाठ करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। आज हम आपको अपने इस लेख में ‘श्री शिव रुद्राष्टकम’ का महत्व बताएंगे। Shiv Rudrashtakam

सोमवार के दिन सुबह उठकर किसी मंदिर में जाएं और उनका अभिषेक करें। फिर बेलपत्र चढ़ाकर जोर- जोर से भाव के साथ एक लय में रुद्राष्टक स्तोत्र का पाठ करें। अंत में आरती से पूजा समाप्त करें। ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और आपको आपकी इच्छा अनुसार फल प्रदान करते हैं। ‘शिव रुद्राष्टकम’ अपने-आप में अद्भुत स्तुति है। रामायण के अनुसार, मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने रावण जैसे भयंकर शत्रु पर विजय पाने के लिए रामेशवरम में शिवलिंग की स्थापना कर रूद्राष्टकम स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ किया था। परिणाम स्वरूप शिव की कृपा से रावण का अंत भी हुआ था।

‘श्री शिव रुद्राष्टकम’ का अर्थ और महत्व Shiv Rudrashtakam

श्री शिव रुद्राष्टकम गोस्वामी तुलसीदास द्वारा वर्णित है। यह भगवान रुद्र की स्तुति में एक भक्ति भजन है। रामचरितमानस के उत्तरकांड में रुद्राष्टकम की रचना भगवान रुद्र को शांत करने के लिए की। इस भजन ने भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्होंने ऋषि पर अपनी कृपा बरसाई। रुद्राष्टकम में भगवान रुद्र को प्रसन्न करने के लिए आठ श्लोक हैं। इस भजन का पाठ न केवल सुख और शांति लाता है बल्कि आपकी सांसारिक इच्छाओं को भी पूरा करता है।

यहां पढिए भगवान भोलेनाथ का यह प्रिय स्तोत्र और हिंदी अर्थ Shiv Rudrashtakam

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं,
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं,
चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्॥

हिंदी अर्थ- हे मोक्षरूप, विभु, व्यापक ब्रह्म, वेदस्वरूप ईशानदिशा के ईश्वर भगवान शिवजी को मैं नमस्कार करता हूं। निज स्वरूप में स्थित, भेद रहित, इच्छा रहित, चेतन, आकाश रूप शिवजी मैं बार-बार नमस्कार करता हूं।

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निराकार मोंकार मूलं तुरीयं,
गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकाल कालं कृपालुं,
गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥

हिंदी अर्थ- निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे परमेशवर भगवान शिव को मैं नमस्कार करता हूं।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं,
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा,
लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥

हिंदी अर्थ- जो हिमाचल के समान गौरवर्ण और गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा पाती है, जिनके सिर पर पवित्र नदी गंगाजी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीया का चंद्रमा और गले में सर्प सुशोभित है।

चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं,
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं,
प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ Shiv Rudrashtakam

हिंदी अर्थ- जिनके कानों में कुंडल शोभा पा रहे हैं। जिनके सुंदर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्न मुख, नीलकंठ और दयालु हैं। जो सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुण्डमाल पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ श्री शंकरजी को मैं भजता हूं।

प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं,
अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं,
भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥

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हिंदी अर्थ- प्रचंड, श्रेष्ठ तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, सूर्य के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकरजी को मैं बार-बार भजता हूं।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी,
सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी,
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥

हिंदी अर्थ- कलाओं से परे, कल्याण स्वरूप, प्रलय करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुरासुर के शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोह का हरण वाले, मन को मथ डालने वाले हे प्रभु, प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं,
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं,
प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥ Shiv Rudrashtakam

हिंदी अर्थ- जब तक मनुष्य श्री पार्वतीजी के पति के चरणकमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इस लोक में, न ही परलोक में सुख-शांति मिलती है और अनके कष्टों का भी नाश नहीं होता है। अत: हे समस्त जीवों के हृदय में निवास करने वाले महाप्रभु, प्रसन्न हो जाएं।

न जानामि योगं जपं नैव पूजा,
न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं,
प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो॥

हिंदी अर्थ- मैं न तो योग जानता हूं, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो, मैं तो सदा-सर्वदा आप को ही नमस्कार करता हूं। हे प्रभु बुढ़ापा तथा जन्म के दुख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दुखों से मेरी रक्षा कीजिए। हे शंभो, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।। Shiv Rudrashtakam

हिंदी अर्थ- जो भी मनुष्य इस स्तोत्र को भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर भोलेनाथ विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।

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vrinda

मैं वृंदा श्रीवास्तव One World News में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर कार्य कर रही हूं। इससे पहले दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स न्यूज पेपर में काम कर चुकी हूं। मुझसे vrindaoneworldnews@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।
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