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Rudraksha Wearing Rules In Sawan: सावन के महीने में इस विधि से धारण करें रुद्राक्ष, बरसेगी भोलेनाथ की कृपा, जानें कैसे हुई थी रुद्राक्ष के पेड़ की उत्पत्ति

Rudraksha Wearing Rules In Sawan: भगवान शिव को प्रिय माने जाने वाले, रुद्राक्ष को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने से सहायक माना जाता है। इसलिए बहुत से लोग रुद्राक्ष धारण करते हैं. लेकिन रुद्राक्ष धारण करने का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसको सही विधि से धारण किया जाए।

Rudraksha Wearing Rules In Sawan: रुद्राक्ष पहनने से मिलते हैं ये फायदे, गलती से भी ना करें ये काम, रुक जाएगी भोलेनाथ की कृपा

भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना 22 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सावन माह का समापन रक्षाबंधन के दिन 19 अगस्त को होगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। यही कारण है कि इस महीने में शिवजी के भक्त भोलेनाथ की भक्ति में लीन रहते हैं। इस महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक किया जाता है। Rudraksha Wearing Rules In Sawan सावन के महीने में शिवजी का प्रिय रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है। मान्यता है कि नियम पूर्वक रुद्राक्ष धारण करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही भोलेशंकर की कृपा प्राप्त होती रहती है। रुद्राक्ष पहनने के ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व हैं। रुद्राक्ष भी एक प्रकार का रत्न ही है। माना जाता है कि रुद्राक्ष धारण करने से शारीरिक और मानसिक स्थिति अच्छी रहती है। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे कि रुद्राक्ष पहनने की सही विधि क्या है और इसे धारण करने के क्या लाभ हैं। तो आइए जानते हैं विस्तार से-

सावन में धारण करें रुद्राक्ष Rudraksha Wearing Rules In Sawan

रुद्राक्ष को धारण करने के लिए सावन का महीना सबसे अच्छा माना जाता है। इसलिए यदि आप रुद्राक्ष धारण करने की सोच रहे हैं तो पूर्ण लाभ के लिए सावन के माह में ही रुद्राक्ष धारण करें। रुद्राक्ष को सोमवार के दिन शुक्ल पक्ष में धारण करना बहुत शुभ माना जाता है। रुद्राक्ष को धारण करने से पहले उसकी शुद्धि और प्राण प्रतिष्ठा करना आवश्यक होता है। इसे सोमवार के दिन, विशेषकर श्रावण मास में, धारण करना शुभ माना जाता है। धारण करने के पहले कुछ विधियों का पालन करना चाहिए।

रुद्राक्ष धारण करने के नियम

शुद्धिकरण Rudraksha Wearing Rules In Sawan

सबसे पहले रुद्राक्ष का शुद्धीकरण करना आवश्यक होता है। इसके लिए एक कटोरी में 1 चम्मच दही, शहद, गंगा जल, तुलसी के पत्ते और घी लें। अब इस कटोरी में 10 मिनट के लिए रुद्राक्ष को रख दें। ऐसा करने से रुद्राक्ष सक्रिय और शुद्ध होता है। अब भोलेनाथ से प्रार्थना करें। प्रार्थना के बाद रुद्राक्ष को इस मिश्रण से निकालकर गंगाजल से धो लें।

पूजा Rudraksha Wearing Rules In Sawan

अब रुद्राक्ष की पूजा भगवान शिव के मंत्रों से करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करते हुए रुद्राक्ष की प्राण प्रतिष्ठा करें।

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धारण Rudraksha Wearing Rules In Sawan

अब आपका रुद्राक्ष शुद्ध, सक्रिय और प्राण प्रतिष्ठित हो चुका है और यह धारण करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। अब इस रुद्राक्ष को सफेद या लाल धागे में पिरोकर, गले में या हाथ में धारण करें।

ऐसे हुई थी रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति Rudraksha Wearing Rules In Sawan

ज्योतिष शास्त्र में रुद्राक्ष का महत्व रत्नों की भांति ही है। जिस प्रकार रत्नों के माध्यम से कुण्डली के ग्रह-योगों को जातक के अनुकूल करने का प्रयत्न किया जाता है, उसी प्रकार रुद्राक्ष के द्वारा ग्रह-योगों को अनुकूल किया जाता है। रुद्राक्ष को साक्षात् शिव स्वरूप कहा गया है। रुद्राक्ष भगवान शिव को अतिप्रिय है। इसके दर्शन, स्पर्श तथा जप करने से समस्त पापों का हरण स्वतः ही हो जाता है। रुद्राक्ष की उत्पत्ति के सम्बन्ध में कहा जाता है कि भगवान शंकर जी के आंसुओं की बूंदें गिरने से पृथ्वी पर रुद्राक्ष का वृक्ष उत्पन्न हुआ।

रुद्राक्ष पहनने से मिलते हैं ये फायदे Rudraksha Wearing Rules In Sawan

रुद्राक्ष को भगवान शिव का आभूषण माना गया है। ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक शांति मिलती है। इसके साथ ही कई रोग दूर होते हैं। वहीं हार्ट से लेकर हाई बीपी के मरीजों को रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि रुद्राक्ष पहनने वाला दीर्घायु होता है। इसे धारण करने से ओज और तेज में भी वृद्धि होती है।

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रुद्राक्ष पहनने के नियम Rudraksha Wearing Rules In Sawan

  • रुद्राक्ष पहनते समय धागे के रंग का बहुत ध्यान रखना चाहिए। इस कभी भी काले रंग के धागे में नहीं पहनना चाहिए। इसे या तो पीले रंग के धागे या फिर लाल रंग के धागे में ही पहनना चाहिए। रुद्राक्ष बहुत पवित्र होता है। इसे गलती से भी गंदे हाथ से नहीं छूना चाहिए। इसे हमेशा स्‍नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर ही धारण करें। रुद्राक्ष पहनते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप जरूर करें।
  • याद रखें कि अगर आप रुद्राक्ष की माला पहनते हैं तो उसमें मनकों की संख्‍या विषम होनी चाहिए। 27 मनकों से कम की रुद्राक्ष की माला नहीं पहननी चाहिए। गलती से भी किसी और का रुद्राक्ष अपने गले में ना पहनें और ना ही अपना रुद्राक्ष किसी और को दें।
  • अगर कहीं पर किसी व्‍यक्ति की मृत्‍यु हुई हो वहां रुद्राक्ष पहनकर नहीं जाना चाहिए। अगर किसी शोक सभा में जाना जरूरी है तो अपना रुद्राक्ष घर पर ही उतार कर जाएं। Rudraksha Wearing Rules In Sawan
  • रुद्राक्ष कभी भी ऐसी जगह पर पहनकर नहीं जाना चाहिए जहां पर मांस- मदिरा का सेवन होता हो। जो लोग मांसहार का सेवन करते हैं उन लोगों के रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार जिस भी व्यक्ति को रुद्राक्ष धारण करना उसे पहले धूम्रपान और मांसाहार छोड़ देना चाहिए।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को रुद्राक्ष नहीं धारण करना चाहिए। अगर किसी महिला को रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी गई है तो उसे बच्चे के जन्म के बाद सूतक काल समाप्त होने तक रुद्राक्ष उतार देना चाहिए।
  • अगर आप रुद्राक्ष धारण करते हैं तो उसे सोते समय उतार दें। सोते समय आप इसे उतार कर तकिए के नीचे रख सकते हैं। तकिए के नीचे रुद्राक्ष रख कर सोने से बुरे सपने आने बंद हो जाते हैं।

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vrinda

मैं वृंदा श्रीवास्तव One World News में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर कार्य कर रही हूं। इससे पहले दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स न्यूज पेपर में काम कर चुकी हूं। मुझसे vrindaoneworldnews@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।
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