krishna janmashtami : मथुरा-वृंदावन से परे, भारत की इन प्रमुख स्थलों पर भी मनाई जाती है कृष्ण जन्माष्टमी
krishna janmashtami केवल मथुरा-वृंदावन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत के कोने-कोने में इस पर्व की धूम रहती है। हर जगह की अपनी अनूठी परंपराएं और रीति-रिवाज इस पर्व को और भी खास बनाते हैं।
krishna janmashtami : मथुरा-वृंदावन के अलावा, इन जगहों पर भी धूमधाम से मनती है कृष्ण जन्माष्टमी
krishna janmashtami, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव, भारत भर में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि मथुरा और वृंदावन में इस पर्व की विशेष धूम रहती है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में भी यह त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हर क्षेत्र की अपनी विशिष्टता और परंपराएं हैं, जो इस पर्व को और भी रंगीन और आनंदमयी बनाती हैं।
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1. द्वारका, गुजरात
द्वारका भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि रही है और यहां कृष्ण जन्माष्टमी विशेष धूमधाम से मनाई जाती है। द्वारकाधीश मंदिर को इस अवसर पर भव्य रूप से सजाया जाता है। भक्तगण रातभर मंदिर में कीर्तन और भजन करते हैं, और मध्यरात्रि को भगवान के जन्म के समय शंखनाद और घंटियों की आवाज़ से पूरा वातावरण गूंज उठता है। यहां के मुख्य आकर्षणों में ‘माखनचोरी’ और ‘रासलीला’ जैसे कार्यक्रम शामिल होते हैं।
2. उदयपुर, राजस्थान
उदयपुर का जगदीश मंदिर भी जन्माष्टमी के अवसर पर आकर्षण का केंद्र बनता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का विशेष पूजन होता है। उदयपुर के महाराणा भी इस पर्व को पारंपरिक ढंग से मनाते हैं। खासतौर पर सजाई गई झांकियां और शोभायात्राएं शहर में घूमती हैं, जो इस पर्व को और भी खास बनाती हैं। यहां के लोग इस दिन व्रत रखते हैं और रात के समय विशेष आरती में शामिल होते हैं।
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3. पुरी, ओडिशा
जगन्नाथ मंदिर, पुरी में कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। यहां भगवान जगन्नाथ, जो कि भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, की पूजा की जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर, मंदिर में विशेष पूजा और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। पुरी में रथ यात्रा के बाद, जन्माष्टमी दूसरी सबसे बड़ी धार्मिक घटना मानी जाती है। भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान की आराधना करते हैं।
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5. महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में जन्माष्टमी का मुख्य आकर्षण ‘दही-हांडी’ होता है। यह आयोजन गोविंदा पथकों द्वारा किया जाता है, जिसमें वे मानव पिरामिड बनाकर ऊंची जगह पर लटकी हुई दही की हांडी को तोड़ते हैं। यह परंपरा भगवान कृष्ण के माखनचोरी की लीला को दर्शाती है। मुंबई, पुणे, और ठाणे जैसे शहरों में यह आयोजन बड़े धूमधाम से होता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।
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6. दिल्ली
दिल्ली में जन्माष्टमी का पर्व बहुत ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन दिल्ली के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और भव्य झांकियों का आयोजन किया जाता है। इस्कॉन मंदिर और बिरला मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों पर रातभर भजन-कीर्तन और नृत्य-नाटिका का आयोजन होता है। यहां की विशेषता यह है कि विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों द्वारा कृष्ण लीला और अन्य धार्मिक नाटकों का मंचन किया जाता है।
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