सरकारी कार्यक्रमों में अब पूरा Vande Mataram अनिवार्य, सरकार का बड़ा फैसला
सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में Vande Mataram के सभी छह अंतरों को अनिवार्य रूप से शामिल करने का निर्णय लिया है। इस फैसले को सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
आधिकारिक आयोजनों में Vande Mataram के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे, नए निर्देश जारी
Vande Mataram: सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि अब सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में Vande Mataram को पूर्ण रूप से गाया जाएगा। यानी अब केवल शुरुआती पंक्तियां ही नहीं, बल्कि इसके सभी छह अंतरों को शामिल किया जाएगा।
Vande Mataram सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की कोशिश
सरकार का मानना है कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय भावना का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इस गीत ने आज़ादी की लड़ाई के दौरान लाखों लोगों में देशभक्ति और एकता की भावना जगाने का काम किया था। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सरकार अब चाहती है कि नई पीढ़ी भी इस गीत के पूरे भाव और उसके संदेश को समझ सके। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में कई युवा Vande Mataram की केवल शुरुआती पंक्तियों से ही परिचित हैं, जबकि इसके बाकी अंतरों में भी देश, प्रकृति और मातृभूमि के सम्मान का गहरा संदेश छिपा है। सरकारी कार्यक्रमों में पूरे गीत को शामिल करने का उद्देश्य लोगों को इस सांस्कृतिक विरासत से फिर से जोड़ना और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना भी माना जा रहा है।
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कार्यक्रमों के आयोजन में आएंगे नए बदलाव
सरकार के नए निर्देशों के बाद अब सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों के आयोजन के तरीके में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पहले जहां कई आयोजनों में Vande Mataram का केवल छोटा हिस्सा गाया जाता था, अब पूरे गीत को शामिल करना अनिवार्य होने से कार्यक्रमों के समय और प्रस्तुति की योजना में बदलाव करना पड़ेगा। आयोजकों को अब कार्यक्रम की शुरुआत या समापन के दौरान पर्याप्त समय सुनिश्चित करना होगा ताकि Vande Mataram को पूर्ण रूप से प्रस्तुत किया जा सके। इसके साथ ही स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और अन्य आधिकारिक आयोजनों में गीत के सही उच्चारण और प्रस्तुति पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिससे कार्यक्रम अधिक व्यवस्थित और गरिमामय बन सकें।
फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं
सरकार के इस फैसले के बाद देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि इससे देशभक्ति की भावना मजबूत होगी और नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीत के महत्व को समझने का मौका मिलेगा। उनके अनुसार, ऐसे निर्णय लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद करते हैं। वहीं कुछ सामाजिक और राजनीतिक समूहों ने इस फैसले पर अलग राय भी व्यक्त की है। उनका मानना है कि किसी भी सांस्कृतिक या राष्ट्रीय प्रतीक को अपनाने का तरीका संवाद और जागरूकता के जरिए होना चाहिए, ताकि सभी लोग इसे स्वेच्छा से स्वीकार करें।
आने वाले समय में दिखेगा फैसले का असर
सरकार के इस फैसले का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साफ तौर पर देखने को मिलेगा। जब आधिकारिक आयोजनों में नियमित रूप से Vande Mataram का पूरा संस्करण गाया जाएगा, तो लोगों, खासकर युवाओं में इसके प्रति जागरूकता और समझ भी बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि धीरे-धीरे यह बदलाव कार्यक्रमों की परंपरा का हिस्सा बन सकता है, जिससे लोगों का जुड़ाव राष्ट्रीय गीत और देश की सांस्कृतिक विरासत से और मजबूत होगा। साथ ही, इससे कार्यक्रमों में अनुशासन और भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ सकता है।
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