Shah Rukh Khan controversy: शाहरुख खान बांग्लादेशी खिलाड़ी चयन पर राजनीति और देशद्रोह के आरोप
शाहरुख खान को लेकर देशद्रोह जैसे शब्दों का इस्तेमाल, बीजेपी नेताओं के बयान और विपक्ष का पलटवार। खेल, सियासत और राष्ट्रवाद के बीच छिड़ी बड़ी बहस।
Shah Rukh Khan controversy: कोलकाता नाइट राइडर्स की बांग्लादेशी खिलाड़ी नियुक्ति पर राजनीतिक तापमान बढ़ा
Shah Rukh Khan controversy: बॉलीवुड अभिनेता और आईपीएल टीम मालिक Shah Rukh Khan एक बार फिर सियासी विवाद के केंद्र में आ गए हैं। एक बयान के बाद उन्हें “देशद्रोही” कहे जाने पर राजनीति गरमा गई है। यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें राष्ट्रवाद, खेल और राजनीतिक बयानबाज़ी की बहस जुड़ गई है।
बयान जिसने विवाद को जन्म दिया

एक धार्मिक संत और कुछ राजनीतिक नेताओं ने सार्वजनिक मंच से शाहरुख खान पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि देश में रहकर काम करने के बावजूद कुछ लोग राष्ट्रीय हितों के खिलाफ सोच रखते हैं।
इन बयानों के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
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बीजेपी पर उलटा सवाल, मोदी का नाम चर्चा में
इस बयानबाज़ी के बाद विपक्ष ने पलटवार करते हुए सवाल उठाए कि अगर किसी कलाकार या खिलाड़ी पर “देशद्रोह” जैसे शब्द लगाए जा सकते हैं, तो फिर सरकार की विदेश नीति और पड़ोसी देशों से रिश्तों को किस नजर से देखा जाएगा? विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के अंतरराष्ट्रीय संबंधों का जिक्र करते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक दोहरे मापदंड से जोड़ा।
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खेल और राजनीति आमने-सामने

इस विवाद में खेल जगत भी अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो गया। सवाल उठने लगे कि
– क्या खेल टीमों के फैसलों को देशभक्ति से जोड़ना सही है?
– क्या खिलाड़ियों या टीम मालिकों पर राष्ट्रीयता के पैमाने थोपे जाने चाहिए?
कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों का मानना है कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बंटा देश

इस मुद्दे पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आया।
एक वर्ग ने शाहरुख खान के खिलाफ बयान का समर्थन किया, तो दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत छवि पर हमला बता रहा है।देशद्रोह जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठे कि क्या ऐसे शब्दों का प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
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विवाद का सामाजिक असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाते हैं।
जब कला, खेल और मनोरंजन को देशभक्ति की कसौटी पर तौला जाता है, तो इसका असर सीधे सामाजिक सौहार्द पर पड़ता है।
निष्कर्ष
शाहरुख खान से जुड़ा यह विवाद अब एक व्यक्ति का मामला नहीं रह गया है।
यह बहस बन चुका है कि
– देशभक्ति की परिभाषा कौन तय करेगा?
– क्या असहमति या अलग सोच को देशद्रोह कहा जा सकता है?
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक मंचों के साथ-साथ आम जनता की बातचीत का भी बड़ा विषय बना रहेगा।
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