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जानें नवरात्रि के नौ दिनों में किसे और क्या दान करें

हिंदुओं के प्रमुख पर्वों में से एक मुख्य पर्व है नवरात्रि! नवरात्रि यानि नौ रातें।


नौ रातों और दस दिनों के समूह को  नवरात्रि कहते हैं और ये दस दिन  बहुत ही विशेष माने जाते हैं। नवरात्रि शब्द से नव अहोरात्रों ( विशेष रातें) का बोध होता है। इन 10 दिनों में देवी के नौ रूपों की उपासना की जाती है और दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा दो शब्दों से बना है दश (यानी 10) और हरा, अर्थात जो हमारी दस बुराईयों को हर ले। दशहरे को विजयदशमी भी कहते हैं। यानि 9 दिन मां की शक्ति की उपासना करके हर एक दिन अपनी एक कुरीति, एक बुराई, को त्याग कर दसवें दिन खुद की बुराइयों पर विजय प्राप्त करने के उपरांत ही विजय दशमी का त्योहार मनाया जाता है। भक्त जन अपनी बुराइयों को त्याग कर इतना हल्का महसूस करते है कि हर्षोल्लास में झूमने व नाचने गाने लगते है।

भारत का, या यूं कहे कि हिंदुओं का हर त्योहार ऋतु के अनुरूप बनाया जाता है। प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करके उनको खुश करने के उपरांत साधक अपने पितरों की शरणागति होता है और पितृ पक्ष में उनका आशीर्वाद लेता है।  फिर शक्ति साधना की ओर अग्रसर होता है। शक्ति साधना के उपरांत ही धन धान्य की देवी को प्रसन्न करके सुख स्मृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करता है।

खुद में बुराई ढूंढना ठीक वैसा ही है जैसा लोहे के चने चबाना।  हमारी बुद्धि हमारी हर गलती पर इस तरह से तर्क वितर्क करती है मानो हम सब से सुगढ़हैं,  सबसे ज्ञानवान है। जब हम अपने को सुधारने के लिए सज्ज हो जाते हैं और स्वयं को जानने की तीव्र इच्छा में हमें जागृत होती है, तब हमें अंदर से प्रेरणा आती है और हम नवाह यज्ञ की विधि को जानना व ढूंढना शुरू करते हैं। हमें यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि “हम अपने भाग्य के स्वयं ही विधाता हैं”। जब तक हममें किसी भी कार्य को करने की तीव्र इच्छा नहीं होती, हम कार्य पूर्ण रूप से नहीं कर पाते। ठीक ऐसे ही मां से जुड़ने की इच्छा ही हमें मां जगत जननी जगदंबा तक ले जाती है। नवरात्रि खुद से जुड़ने का समय है, कुंडलिनी जागृत करने का समय है, अपने आप को सशक्त करने का समय है।

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वैसे तो नवरात्रि धूमधाम से वर्ष में दो बार मनाई जाती है। किंतु जो मां भगवती के साधक हैं, वह नवरात्रि वर्ष में चार बार बनाते हैं। दो सार्वजनिक रूप से और दो गुप्त रूप से। चैत्र मास और आश्विन मास के नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाए जाते हैं। पौष और आषाढ़ मास में नवरात्रि गुप्त रूप से मनाई जाती है। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है तथा पौष और आषाढ़ मास में 10 महाविद्या की। अगर हम देखे तो चैत्र मास की नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन से व शरद ऋतु की शुरुआत आश्विन मास के  नवरात्रि से होती है। यह वही समय होता है, जब ना बहुत गर्मी होती है और ना ही बहुत ठंड। यह समय ध्यान लगाने के लिए, साधना करने के लिए उत्तम माना गया है। इस बार शारदीय नवरात्रि 7 अक्टूबर 2021 से शुरू हो रहे हैं।  आओ जानते हैं कि मां को कैसे प्रसन्न किया जाए और अपने जीवन को कैसे सफल बनाया जाए। इस बार नवरात्रि 8 दिनों की हैं। इसमें चतुर्थी का क्षय रहेगा।

आइए अब जानते हैं की मां भगवती प्रसन्न कैसे होंगी। क्योंकि कन्या को भी मां भगवती का ही रूप मानते हैं तो हर नवरात्रि को नमन प्रकार से मां को प्रसन्न कर अपने घर में सुख, स्मृद्धि, सम्पति व ऐश्वर्य लाएं।

पहले नवरात्रि को मां को लाल पुष्प चढ़ाए।

दूसरे नवरात्र को केला या चीकू किसी कन्या को भेंट करें।

तीसरे नवरात्रि को कन्या को खोये की या मावे की बर्फी दे, या रसगुल्ला भेंट में दें।
चौथे नवरात्रे को कन्या को वस्त्र भेंट में दें।
पांचवे नवरात्रि को चूड़ी बिंदी इत्यादि भेंट करें।
छठे  नवरात्रि को खिलौना कन्या को बहुत करें।

सातवें नवरात्रि स्टेशनरी की वस्तु दें।

आठवें नवरात्रि को खीर कन्या को खिलाएं अथवा जैसे आपके कुटुंब के रीति रिवाज हैं, वैसा करें।
नवें  नवरात्रि को जैसे आपके वंश की रीति है उस तरह भेंट करें।

कन्या के अभाव में ऊपर दी गई वस्तुएं मंदिर में चढ़ाएं।
जो भी भक्त बहुत श्रद्धा से ये नौ दिन का पर्व मनाते हैं, वे कैसे मां को प्रसन्न कर अपनी ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं, इसकी चर्चा करते हैं। कुछ भक्त मां को तरह तरह की भेंट से रिझाते हैं और कुछ भक्त भंडारे देते हैं, कुछ अपनी कुलदेवी को प्रसन्न करने के लिए यथोचित उपाय करते हैं। किन्तु इन सब से सर्वोपरि हमारा भाव है। हम कुछ भी करें मां भगवती के लिए, हमें इसके पीछे की मंशा ज्ञात होनी चाहिए। कोई भक्त महंगी से महंगी वस्तु चढ़ाए या फिर सुंदर से सुंदर दिखने हेतु अच्छे से अच्छे वस्त्र डाले, किन्तु क्या मां भगवती प्रसन्न हो जाएगी? नहीं, क्योंकि मां भगवती सिर्फ और सिर्फ एक भक्त के  भाव को देखती है। अगर आप के भाव शुद्ध हैं, पवित्र हैं, आपकी मंशा  शुद्ध है तो मां भगवती अवश्य प्रसन्न होंगी। हमारे अंदर के भाव जो बहते हैं, वह बहुत महत्व रखते हैं। अगर हमारे मन में किसी के प्रति द्वेष की भावना है, किसी के प्रति भी ईर्ष्या की भावना है या किसी के प्रति क्रोध है तो ये सब भावनाएं भी मां देखती हैं। मां भगवती भाव की भूखी है, ममतामयी है, आनन्दमयी है। अगर हममें इनमें से कोई भी नकारात्मक भावना है तो हमें इन सबको मां को समर्पण करने के लिए साधना करनी चाहिए क्योंकि नवरात्रि इन्हीं को समर्पण करने के दिन हैं, अपने को साधने के दिन हैं, एकाग्रता बढाने के दिन हैं, अंतःकरण शुद्ध करने के दिन हैं, स्वयंम से जुड़ने के दिन है। अगर पूजा करते समय हमें वो लोग दिखते हैं जिनके प्रति हमारे अंदर नकारात्मक विचार हैं तो हमें समझ जाना चाहिए कि हमें अपनी बुराइयों को त्यागना है।

हममें से कुछ भक्त ऐसे भी हैं जो श्लोक का उच्चारण नहीं जानते, जिन्हें संस्कृत नहीं आती तो निराश बिल्कुल मत होइए क्योंकि मां भाव की भूखी है। शुद्ध भावों से मां भगवती के सामने हाथ जोड़ करके प्रार्थना करें, मां अवश्य आपकी प्रार्थना सुनेगी। आंखें बंद करके थोड़ा समय मां के सानिध्य में बिताइए, यही सबसे बड़ी साधना है।

कल हम उपवास पर चर्चा करेंगे और साथ ही कुछ और उपाय भी बताएंगे।

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नाम: पूनम गौर (न्यू एज हीलर व के० बी०/ के० पी० विशेषज्ञ)
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