जाने क्यों की थी माँ ब्रह्मचारिणी ने कड़ी तपस्या?

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माँ ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कैसे पूरी होंगी आपकी इच्छाएँ


नवरात्रि के दूसरे दिन ‘माँ ब्रह्मचारिणी’ की पूजा की जाती है। माँ ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए बेहद कड़ी तपस्या की थी और यही कारण है की माँ का एक नाम ब्रह्मचारिणी भी पड़ गया था। माँ के हर रूप की तरह ये रूप भी काफी निराला है। ब्रह्म का मतलब होता है ‘तपस्या’ और चारिणी का मतलब होता है ‘आचरण’ करने वाली अर्थाथ तप की आचरण करने वाली माँ ब्रह्मचारिणी। तो चलिए जानते है की माता के इस स्वरूप की कैसे करे पूजा अर्चना ।

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माँ ब्रह्मचारिणी

माँ की पूजा विधि:

माँ ब्रह्मचारिणी दरसअल माँ पार्वती का दूसरा रूप है। माँ के इस रूप की पूजा करने से तप, त्याग, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है और इसके साथ ही जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से पहले आप नहा धो कर साफ़ कपड़े पहन ले।  देवी की पूजा करने से पहले अपने हाथ में फूल ले कर प्रार्थना  करे और इसके बाद देवी को स्नान कराये, फिर फूल, सबूत चावल यानि अक्षत, कुमकुम और सिन्दूर अर्पित करे। इस पूजा में आप लाल फूल ज़रूर इस्तेमाल करे। पूजा में  इस मन्त्र की  ‘दधानां करपद्याभ्यामक्षमालाकमण्डल, देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा’ आराधना करने के बाद, माता की घी और कपूर का दिया जला कर आरती करे। फिर अंत में मिठाई चढ़ा कर  पूजा को सम्पन करे।

माँ ब्रह्मचारिणी की कथा:

माँ ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर में एक पुत्री के रूप में जन्म लिया था और नारद की के उपदेश से भगवान शिव पति के रूप प्राप्त करने के लिए उन्हे कड़ी तपस्या करनी होगी और इसी तपस्या के कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी हो गया था। एक हज़ार साल  तक तो इन्होने केवल फूल और फल ही खाये थे। कुछ दिन तक कठिन व्रत रखे और खुले आकाश के नीचे कड़ी दूप और बारिश के कष्ट भी सहे। यहाँ तक की उन्होंने तीन हज़ार वर्ष तक पेड़ से टूटे बेल के पते भी खाये और कई वर्ष तक तो निर्जल और निराहार भी रही। उनकी ये तपस्या देख कर सारे देवता भी हैरान रहे गए थे। सारे देवताओ ने माता की तपस्या की सहारना की और कहा की इस प्रकार की तपस्या आपसे ही संभव थी देवी और आशीर्वाद दिया की उनकी मनोकामना ज़रूर पूरी होगी।

माता का प्रसाद:

देवी मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और कमल का फूल बेहद पसंद है और इसलिए इनकी पूजा के दौरान इन्हीं फूलों को देवी मां के चरणों में अर्पित करें। क्योंकि मां को चीनी और मिश्री काफी पसंद है इसलिए मां को भोग में चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं। इस भोग से देवी ब्रह्मचारिणी प्रसन्न हो जाएंगी। इन्हीं चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य भी पाया जा सकता है।