मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को दूर करने पर TFM 2026 में जोर
TFM 2026, भारत में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने को लेकर राजधानी दिल्ली में आयोजित TFM 2026 यानी Times Future of Maternity Summit & Awards में बड़ा मंथन देखने को मिला।
मां और बच्चे की सुरक्षा पर TFM 2026 में हुई बड़ी चर्चा, एक्सपर्ट्स ने दिए सुझाव
TFM 2026, भारत में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने को लेकर राजधानी दिल्ली में आयोजित TFM 2026 यानी Times Future of Maternity Summit & Awards में बड़ा मंथन देखने को मिला। इस सम्मेलन में देशभर के डॉक्टरों, गायनेकोलॉजिस्ट, पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स, नीति निर्माताओं और हेल्थ सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल से जुड़ी चुनौतियों, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने माना कि भारत में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में पिछले कुछ वर्षों में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी कई ऐसी चुनौतियां हैं जिन पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। खासकर हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, प्रसव के बाद देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।
मां और बच्चे को अलग न देखने की सलाह
सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य को केवल प्रसव तक सीमित नहीं समझना चाहिए। मां और नवजात दोनों की देखभाल एक साथ जरूरी है। कई मामलों में प्रसव के बाद महिलाओं की सेहत को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। डॉक्टरों ने बताया कि प्रसव के बाद महिलाओं में मानसिक तनाव, कमजोरी, पोषण की कमी और स्तनपान से जुड़ी परेशानियां आम हैं, लेकिन इन मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। विशेषज्ञों ने पोस्टपार्टम केयर यानी प्रसव के बाद देखभाल को स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाने की मांग की।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी पर जताई चिंता
TFM 2026 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार भारत में 49 प्रतिशत से ज्यादा गर्भावस्थाएं हाई-रिस्क कैटेगरी में आती हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और नियमित मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। डॉक्टरों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एनीमिया और पोषण की कमी जैसी समस्याएं गर्भवती महिलाओं और बच्चों दोनों के लिए खतरा बन सकती हैं। इसलिए शुरुआती जांच और सही मेडिकल गाइडेंस पर ज्यादा फोकस करने की जरूरत है।
सरकारी अस्पतालों में सिस्टम सुधारने पर जोर
सम्मेलन में यह मुद्दा भी उठा कि कई सरकारी अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं का सिस्टम अभी भी कमजोर है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि केवल डॉक्टरों की सोच पर निर्भर रहना काफी नहीं है, बल्कि पूरे हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अस्पतालों में बेहतर समन्वय, प्रशिक्षित स्टाफ, पर्याप्त मेडिकल उपकरण और डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम को बढ़ावा दिया जाए। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने पर भी जोर दिया गया।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी हुई चर्चा
TFM 2026 में मातृत्व के दौरान महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में अब भी प्रसवोत्तर अवसाद यानी Postpartum Depression को गंभीरता से नहीं लिया जाता। डॉक्टरों के अनुसार कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद तनाव, डर और अकेलेपन का सामना करती हैं, लेकिन परिवार और समाज इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। सम्मेलन में सुझाव दिया गया कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं की मानसिक स्थिति की नियमित जांच होनी चाहिए।
टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर दिया जोर
सम्मेलन में हेल्थ टेक्नोलॉजी और AI आधारित सेवाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और AI चैटबॉट्स के जरिए ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में गर्भवती महिलाओं तक सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी के जरिए हाई-रिस्क मामलों की जल्दी पहचान, डॉक्टरों से संपर्क और हेल्थ रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
पोषण और जागरूकता पर फोकस
विशेषज्ञों ने कहा कि कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान सही पोषण नहीं ले पातीं, जिससे मां और बच्चे दोनों की सेहत प्रभावित होती है। सम्मेलन में आयरन, कैल्शियम और संतुलित आहार के महत्व पर जोर दिया गया। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जागरूक करने और परिवारों को भी मातृ स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाने की बात कही गई।
मातृ स्वास्थ्य को लेकर बदल रही सोच
TFM 2026 में यह साफ दिखाई दिया कि अब मातृ स्वास्थ्य को केवल एक मेडिकल मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज की नींव होती है।सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि अगर भारत को आने वाले वर्षों में मातृ मृत्यु दर कम करनी है और स्वस्थ पीढ़ी तैयार करनी है, तो स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े स्तर पर सुधार करना होगा। इसके लिए सरकार, अस्पतालों, डॉक्टरों और समाज सभी को मिलकर काम करना होगा।TFM 2026 में हुई इस चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल सुविधाएं बढ़ाने से नहीं होगा, बल्कि महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और समग्र स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने से ही असली बदलाव आएगा।
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