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Lehar Pepsi History: क्या वजह थी कि भारत में Pepsi को ‘लहर पेप्सी’ कहा जाता था? जानिए दिलचस्प इतिहास

Lehar Pepsi History, आज भारत में Pepsi का नाम हर किसी की जुबान पर है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इसे "लहर पेप्सी (Lehar Pepsi)" के नाम से बेचा जाता था।

Lehar Pepsi History : भारत में ‘लहर पेप्सी’ नाम रखने के पीछे क्या थी सरकारी शर्त?

Lehar Pepsi History, आज भारत में Pepsi का नाम हर किसी की जुबान पर है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इसे “लहर पेप्सी (Lehar Pepsi)” के नाम से बेचा जाता था। 1990 के दशक में टीवी विज्ञापनों, दुकानों और बोतलों पर “Lehar Pepsi” लिखा दिखाई देता था। धीरे-धीरे यह नाम गायब हो गया और सिर्फ “Pepsi” रह गया। आखिर ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे भारत की आर्थिक नीतियों, सरकारी नियमों और विदेशी कंपनियों की एंट्री से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प कहानी छिपी है।

भारत से कोका-कोला के जाने के बाद खुला रास्ता

1977 में विदेशी निवेश संबंधी नियमों के कारण Coca-Cola ने भारत का कारोबार बंद कर दिया था। इसके बाद कई वर्षों तक भारतीय बाजार में स्थानीय सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांडों का दबदबा रहा। 1980 के दशक के आखिर में जब भारत ने सीमित रूप से विदेशी कंपनियों को प्रवेश देना शुरू किया, तब PepsiCo ने भारतीय बाजार में आने की तैयारी की।

भारत में एंट्री आसान नहीं थी

PepsiCo की भारत में एंट्री काफी विवादों और लंबी सरकारी प्रक्रिया के बाद संभव हुई। कंपनी को भारतीय साझेदारों के साथ संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) के रूप में काम करने की अनुमति मिली। उस समय विदेशी कंपनियों पर कई शर्तें लागू थीं और सरकार चाहती थी कि विदेशी ब्रांड भारतीय पहचान के साथ बाजार में आएं।

पहले रखा गया था ‘Pepsi Era’ नाम

दिलचस्प बात यह है कि PepsiCo शुरुआत में अपने उत्पाद का नाम “Pepsi Era” रखना चाहती थी। उस समय सरकार की नीति के अनुसार विदेशी कंपनियों को हाइब्रिड या भारतीय पहचान वाला नाम अपनाने के लिए कहा जाता था। लेकिन अंतिम समय में सरकार ने “Pepsi Era” नाम को पर्याप्त भारतीय नहीं माना और इसे बदलने का निर्देश दिया।

कैसे बना ‘Lehar Pepsi’?

सरकारी निर्देश के बाद कंपनी ने अपने भारतीय साझेदारों और बाजार को ध्यान में रखते हुए “Lehar Pepsi” नाम चुना। “लहर” शब्द हिंदी का है, जिसका अर्थ होता है तरंग या वेव (Wave)। यह नाम भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक अपनापन देने के उद्देश्य से रखा गया था।कहा जाता है कि इस बदलाव के कारण पहले से तैयार कई बोतलें और लेबल बदलने पड़े, जिससे कंपनी को अतिरिक्त लागत भी उठानी पड़ी।

‘Lehar Pepsi’ की खूब हुई मार्केटिंग

1990 के दशक की शुरुआत में “Lehar Pepsi” नाम से बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाए गए। टीवी, रेडियो, पोस्टर और दुकानों पर यही नाम दिखाई देता था। उस दौर में यह ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हुआ और भारतीय युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा।

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फिर क्यों हट गया ‘Lehar’?

1991 के आर्थिक उदारीकरण (Liberalisation) के बाद भारत में विदेशी निवेश संबंधी नियमों में धीरे-धीरे ढील दी गई। 1994 के आसपास PepsiCo ने अपने भारतीय साझेदारों की हिस्सेदारी खरीद ली और भारत में अपना कारोबार अधिक स्वतंत्र रूप से संचालित करना शुरू किया।नई आर्थिक नीतियों के बाद विदेशी ब्रांडों को अपने मूल वैश्विक नाम का इस्तेमाल करने की अधिक स्वतंत्रता मिली। इसके बाद कंपनी ने “Lehar” शब्द हटाकर केवल “Pepsi” नाम से अपने उत्पाद की बिक्री शुरू कर दी, ताकि दुनिया भर में एक समान ब्रांड पहचान बनाई जा सके।

क्या आज भी ‘Lehar’ ब्रांड मौजूद है?

हालांकि “Lehar Pepsi” नाम अब इतिहास बन चुका है, लेकिन “Lehar” नाम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। PepsiCo ने इस नाम का इस्तेमाल बाद में स्नैक्स श्रेणी में भी किया। कुछ समय तक Lehar Chips जैसे उत्पाद बाजार में उपलब्ध रहे। बाद में कंपनी ने अपने कई स्नैक्स ब्रांडों की अलग पहचान विकसित की।

ब्रांडिंग का बड़ा सबक

“Lehar Pepsi” की कहानी बताती है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय कंपनी को नए देश में कारोबार शुरू करने के लिए वहां के कानूनों, संस्कृति और सरकारी नीतियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। भारत में Pepsi की शुरुआती सफलता केवल उसके स्वाद की वजह से नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाई गई रणनीति का भी परिणाम थी।

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आज सिर्फ Pepsi क्यों दिखती है?

आज भारत समेत दुनिया के अधिकांश देशों में कंपनी केवल Pepsi नाम का उपयोग करती है। वैश्विक ब्रांडिंग, एक जैसी पहचान और आसान मार्केटिंग रणनीति के कारण “Lehar” शब्द को हटा दिया गया। हालांकि 1990 के दशक में बड़े हुए लोगों के लिए “Lehar Pepsi” आज भी यादों का एक खास हिस्सा है।भारत में “Lehar Pepsi” नाम किसी मार्केटिंग प्रयोग का नहीं, बल्कि उस दौर की सरकारी नीतियों और विदेशी कंपनियों पर लागू नियमों का परिणाम था। बाद में आर्थिक उदारीकरण और नियमों में बदलाव के साथ यह नाम इतिहास बन गया और सिर्फ Pepsi रह गई। यही वजह है कि आज की नई पीढ़ी शायद “Lehar Pepsi” नाम से परिचित न हो, लेकिन भारतीय उपभोक्ता संस्कृति में यह नाम हमेशा एक दिलचस्प अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

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