Hormonal changes: क्या मेनोपॉज के दौरान बढ़ सकता है माइग्रेन? एक्सपर्ट से जानें
Hormonal changes, माइग्रेन सिर्फ सामान्य सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो धड़कते हुए तेज दर्द, मतली, उल्टी, रोशनी और आवाज से परेशानी जैसे लक्षणों के साथ आती है।
Hormonal changes : पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और माइग्रेन का कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें सच्चाई
Hormonal changes, माइग्रेन सिर्फ सामान्य सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो धड़कते हुए तेज दर्द, मतली, उल्टी, रोशनी और आवाज से परेशानी जैसे लक्षणों के साथ आती है। विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में माइग्रेन की समस्या लगभग तीन गुना अधिक देखी जाती है। इसका एक प्रमुख कारण हार्मोनल बदलाव माना जाता है। खासतौर पर एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन में उतार-चढ़ाव माइग्रेन के ट्रिगर के रूप में काम कर सकता है।
हार्मोन और माइग्रेन का क्या संबंध है?
डॉक्टरों के मुताबिक, एस्ट्रोजन मस्तिष्क में मौजूद केमिकल्स को प्रभावित करता है जो दर्द को नियंत्रित करते हैं। जब शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर अचानक घटता या बढ़ता है, तो इससे मस्तिष्क की नसों में संवेदनशीलता बढ़ सकती है और माइग्रेन का अटैक ट्रिगर हो सकता है। इसी वजह से महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों—जैसे पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज—के दौरान माइग्रेन की शिकायत अधिक होती है।
पीरियड्स के दौरान माइग्रेन क्यों बढ़ता है?
मासिक धर्म से ठीक पहले एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से गिरता है। इस हार्मोनल गिरावट को “मेंस्ट्रुअल माइग्रेन” कहा जाता है। कई महिलाएं बताती हैं कि उन्हें हर महीने पीरियड्स शुरू होने से 1–2 दिन पहले या शुरुआती दिनों में तेज सिरदर्द होता है। यह दर्द सामान्य माइग्रेन से अधिक गंभीर और लंबा चलने वाला हो सकता है।
प्रेग्नेंसी में क्या होता है?
गर्भावस्था के दौरान हार्मोन स्तर में बड़ा बदलाव आता है। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में माइग्रेन के अटैक कम हो जाते हैं क्योंकि एस्ट्रोजन का स्तर स्थिर रहता है। हालांकि, कुछ मामलों में शुरुआती महीनों में माइग्रेन बढ़ भी सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा लेने से बचना चाहिए।
मेनोपॉज और माइग्रेन
मेनोपॉज के समय हार्मोनल असंतुलन काफी अधिक होता है। इस दौरान कुछ महिलाओं में माइग्रेन की तीव्रता बढ़ सकती है। हालांकि, मेनोपॉज के बाद जब हार्मोन स्तर स्थिर हो जाता है, तो कई महिलाओं में माइग्रेन के अटैक कम हो जाते हैं।
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हार्मोनल गर्भनिरोधक और माइग्रेन
ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (गर्भनिरोधक गोलियां) भी एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर को प्रभावित करती हैं। कुछ महिलाओं में इन दवाओं के कारण माइग्रेन बढ़ सकता है, जबकि कुछ में सुधार भी देखा गया है। इसलिए यदि पिल्स लेने के बाद सिरदर्द बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है।
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माइग्रेन के अन्य ट्रिगर
हालांकि हार्मोनल बदलाव एक बड़ा कारण है, लेकिन माइग्रेन के और भी कई ट्रिगर हो सकते हैं जैसे—
- तनाव और चिंता
- नींद की कमी
- तेज रोशनी या तेज आवाज
- ज्यादा देर तक भूखे रहना
- कुछ खास खाद्य पदार्थ जैसे चॉकलेट, कैफीन या प्रोसेस्ड फूड
डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि माइग्रेन हर महीने एक निश्चित समय पर हो रहा है, तो यह हार्मोनल कारणों से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में निम्न उपाय मददगार हो सकते हैं—
- डायरी में रिकॉर्ड रखें – सिरदर्द कब शुरू होता है और कितनी देर तक रहता है, यह नोट करें।
- नियमित दिनचर्या अपनाएं – पर्याप्त नींद लें और समय पर भोजन करें।
- तनाव कम करें – योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज मदद कर सकती हैं।
- डॉक्टर से सलाह लें – जरूरत पड़ने पर प्रिवेंटिव दवाएं या हार्मोनल थेरेपी दी जा सकती है।
- हाइड्रेशन बनाए रखें – शरीर में पानी की कमी भी सिरदर्द को बढ़ा सकती है।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
अगर माइग्रेन के साथ अचानक तेज बुखार, बोलने में दिक्कत, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या दृष्टि में गंभीर बदलाव महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और माइग्रेन के बीच गहरा संबंध है। खासकर एस्ट्रोजन में उतार-चढ़ाव माइग्रेन के अटैक को ट्रिगर कर सकता है। हालांकि, सही जीवनशैली, ट्रिगर्स की पहचान और डॉक्टर की सलाह से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि माइग्रेन बार-बार और गंभीर रूप से परेशान कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।
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