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History of Coffee in India: कॉफी के पीछे छिपी है सदियों पुरानी कहानी, दाढ़ी में छिपाकर भारत लाए गए थे इसके बीज

History of Coffee in India आज कॉफी दुनिया के सबसे लोकप्रिय पेयों में से एक है। सुबह की शुरुआत हो, ऑफिस में काम के बीच ब्रेक या दोस्तों के साथ कैफे में मुलाकात कॉफी हर जगह मौजूद है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब कॉफी को

History of Coffee in India : 7 बीज, एक दाढ़ी और कॉफी का सफर… जानिए भारत में कॉफी पहुंचने की दिलचस्प कहानी

History of Coffee in India आज कॉफी दुनिया के सबसे लोकप्रिय पेयों में से एक है। सुबह की शुरुआत हो, ऑफिस में काम के बीच ब्रेक या दोस्तों के साथ कैफे में मुलाकात कॉफी हर जगह मौजूद है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब कॉफी को “शैतानी फल” (Devil’s Drink) कहकर खारिज कर दिया गया था? और भारत में कॉफी की शुरुआत भी किसी व्यापारिक जहाज से नहीं, बल्कि एक सूफी संत द्वारा दाढ़ी में छिपाकर लाए गए सात बीजों से हुई थी।कॉफी का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही रोमांचक भी। आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानियां।

इथियोपिया से शुरू हुई कॉफी की कहानी

कॉफी की उत्पत्ति पूर्वी अफ्रीका के इथियोपिया से मानी जाती है। सबसे लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, एक बकरी चराने वाले चरवाहे काल्दी (Kaldi) ने देखा कि उसकी बकरियां एक खास लाल फल खाने के बाद असामान्य रूप से ऊर्जावान हो जाती हैं।जब यह बात स्थानीय साधुओं तक पहुंची, तो उन्होंने उन फलों से पेय तैयार किया और पाया कि इससे देर रात तक जागना आसान हो जाता है। हालांकि इतिहासकार इस कहानी को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं मानते, लेकिन यह कॉफी की सबसे प्रसिद्ध लोककथाओं में से एक है।

अरब देशों से दुनिया तक पहुंची कॉफी

इथियोपिया से कॉफी यमन पहुंची, जहां इसकी खेती व्यवस्थित रूप से शुरू हुई। 15वीं शताब्दी तक यमन के सूफी संत धार्मिक अनुष्ठानों और रातभर इबादत के दौरान जागे रहने के लिए कॉफी पीने लगे।यमन लंबे समय तक कॉफी व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा। उस समय कॉफी के बीजों को उबालकर या भूनकर ही निर्यात किया जाता था ताकि कोई अन्य देश उसकी खेती न कर सके।

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कभी ‘शैतानी पेय’ भी कहा गया

जब कॉफी यूरोप पहुंची, तो कुछ लोगों ने इसे संदेह की नजर से देखा। 16वीं शताब्दी में इटली के कुछ धार्मिक नेताओं ने इसे “शैतान का पेय” तक कहा और इसका विरोध किया।हालांकि बाद में पोप क्लेमेंट अष्टम (Pope Clement VIII) ने कॉफी का स्वाद चखा और इसे प्रतिबंधित करने के बजाय स्वीकार कर लिया। इसके बाद यूरोप में कॉफी तेजी से लोकप्रिय होती चली गई और कॉफी हाउस सामाजिक और बौद्धिक चर्चाओं के प्रमुख केंद्र बन गए।

भारत में कैसे पहुंची कॉफी?

भारत में कॉफी की शुरुआत की सबसे प्रसिद्ध कहानी बाबा बुदान (Baba Budan) से जुड़ी है।कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी में बाबा बुदान हज यात्रा के दौरान यमन गए थे। उस समय वहां से कच्चे कॉफी बीज बाहर ले जाना प्रतिबंधित था।लोककथा के अनुसार, बाबा बुदान ने सात कॉफी बीज अपनी दाढ़ी (कुछ कथाओं में कमरबंद) में छिपाकर भारत लाए। भारत लौटने के बाद उन्होंने इन्हें कर्नाटक की चंद्रगिरि पहाड़ियों में लगाया। बाद में इन्हीं पहाड़ियों को बाबा बुदनगिरि के नाम से जाना जाने लगा।हालांकि इस कहानी के कुछ हिस्से लोककथा पर आधारित हैं, लेकिन भारत में कॉफी की शुरुआत का श्रेय व्यापक रूप से बाबा बुदान को ही दिया जाता है।

कैसे बढ़ी भारत में कॉफी की खेती?

बाबा बुदान द्वारा लगाए गए पौधों से धीरे-धीरे दक्षिण भारत में कॉफी की खेती फैलने लगी।ब्रिटिश शासन के दौरान कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर कॉफी के बागान विकसित किए गए। आज भारत दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक देशों में शामिल है और यहां उगाई जाने वाली अरेबिका (Arabica) और रोबस्टा (Robusta) कॉफी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है।

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भारत की खास कॉफी

भारत अपनी शेड-ग्रोन कॉफी (Shade-Grown Coffee) के लिए प्रसिद्ध है। यहां कॉफी के पौधे बड़े पेड़ों की छाया में उगाए जाते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और स्वाद बेहतर माना जाता है।इसके अलावा भारत की मॉनसूनड मालाबार (Monsooned Malabar) कॉफी भी दुनिया भर में अपनी खास प्रोसेसिंग और स्वाद के लिए जानी जाती है।

आज का कॉफी कल्चर

आज भारत में कॉफी सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। बड़े शहरों में कैफे संस्कृति तेजी से बढ़ी है और युवा वर्ग के बीच अलग-अलग तरह की कॉफी जैसे एस्प्रेसो, कैप्पुचीनो, लाटे और कोल्ड ब्रू काफी लोकप्रिय हैं।साथ ही, घरेलू स्तर पर भी फिल्टर कॉफी और इंस्टेंट कॉफी का चलन लगातार बढ़ रहा है।

कॉफी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • कॉफी दुनिया में पानी के बाद सबसे अधिक पिए जाने वाले पेयों में से एक मानी जाती है।
  • कॉफी बीन्स वास्तव में बीज होते हैं, जो कॉफी चेरी नामक फल के अंदर पाए जाते हैं।
  • भारत में कॉफी उत्पादन का बड़ा हिस्सा दक्षिण भारतीय राज्यों में होता है।
  • कॉफी उद्योग लाखों किसानों और श्रमिकों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है।

कॉफी का सफर इथियोपिया की पहाड़ियों से शुरू होकर यमन, यूरोप और फिर भारत तक पहुंचा। कभी इसे “शैतानी पेय” कहकर ठुकराया गया, तो कभी इसके बीजों को देश से बाहर ले जाना प्रतिबंधित था। भारत में बाबा बुदान द्वारा सात कॉफी बीज लाने की कहानी आज भी सबसे चर्चित ऐतिहासिक कथाओं में गिनी जाती है। चाहे इसमें लोककथा का रंग हो या इतिहास का, इतना तय है कि आज कॉफी भारतीय संस्कृति और वैश्विक खानपान का एक अहम हिस्सा बन चुकी है।

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