Ear damage causes: कान की सेहत बिगाड़ रही हैं आपकी ये रोजमर्रा की गलतियां
Ear damage causes, कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है। यही हमें सुनने, संतुलन बनाए रखने और आसपास की ध्वनियों को पहचानने में मदद करता है।
Ear damage causes : तेज म्यूजिक से लेकर कॉटन बड तक, कान खराब करती हैं ये 6 आदतें
Ear damage causes, कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है। यही हमें सुनने, संतुलन बनाए रखने और आसपास की ध्वनियों को पहचानने में मदद करता है। लेकिन रोजमर्रा की कुछ आदतें अनजाने में हमारे कानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। धीरे-धीरे यह नुकसान सुनने की क्षमता (Hearing Ability) को प्रभावित कर सकता है और गंभीर स्थिति में स्थायी बहरापन भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कान से जुड़ी समस्याएं अचानक नहीं होतीं, बल्कि समय के साथ विकसित होती हैं। इसलिए जरूरी है कि हम उन आदतों को पहचानें जो कानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसी 6 आम आदतों के बारे में।
1. तेज आवाज में हेडफोन या ईयरफोन का इस्तेमाल
आजकल ज्यादातर लोग लंबे समय तक हेडफोन या ईयरफोन का इस्तेमाल करते हैं। अगर आप तेज आवाज में गाने सुनते हैं या वीडियो देखते हैं, तो यह कान के अंदर मौजूद संवेदनशील हेयर सेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है।लगातार 85 डेसिबल से ज्यादा आवाज सुनना हानिकारक माना जाता है। तेज आवाज के संपर्क में लंबे समय तक रहने से “नॉइज़ इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस” हो सकता है।
क्या करें?
60-60 नियम अपनाएं—60% वॉल्यूम पर अधिकतम 60 मिनट तक ही हेडफोन का उपयोग करें।
2. कान में कॉटन बड या नुकीली चीजें डालना
कई लोग कान साफ करने के लिए कॉटन बड, हेयरपिन या माचिस की तीली जैसी चीजों का उपयोग करते हैं। यह आदत बेहद खतरनाक हो सकती है।
ऐसा करने से ईयरवैक्स अंदर की ओर धकेला जा सकता है, जिससे कान बंद होने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा कान के पर्दे (Eardrum) को भी नुकसान पहुंच सकता है।
क्या करें?
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सुरक्षित तरीके से कान साफ करवाएं।
3. तेज आवाज वाले माहौल में सुरक्षा न करना
लंबे समय तक फैक्ट्री, ट्रैफिक, कंसर्ट या पटाखों जैसी तेज आवाज वाले वातावरण में रहना कानों के लिए हानिकारक हो सकता है।
तेज ध्वनि तरंगें कान के अंदर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
क्या करें?
ऐसे माहौल में ईयरप्लग या ईयरमफ का इस्तेमाल करें।
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4. कान के संक्रमण को नजरअंदाज करना
कान में दर्द, खुजली, पानी आना या भारीपन महसूस होना संक्रमण के संकेत हो सकते हैं। कई लोग इन लक्षणों को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं।
यदि समय पर इलाज न किया जाए तो संक्रमण बढ़कर कान के पर्दे और अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या करें?
लक्षण दिखने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करें।
5. कान को गीला छोड़ देना
नहाने या तैराकी के बाद कानों में पानी रह जाना भी संक्रमण का कारण बन सकता है। नम वातावरण में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ते हैं।
बार-बार कान गीले रहने से “स्विमर’स ईयर” जैसी समस्या हो सकती है।
क्या करें?
नहाने के बाद कानों को हल्के कपड़े से सुखाएं और जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह से ड्रॉप्स का उपयोग करें।
6. धूम्रपान और अस्वस्थ जीवनशैली
धूम्रपान केवल फेफड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि कानों के लिए भी नुकसानदायक है। सिगरेट में मौजूद हानिकारक रसायन रक्त प्रवाह को प्रभावित करते हैं, जिससे कानों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
इसके अलावा उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापा भी सुनने की क्षमता पर असर डाल सकते हैं।
क्या करें?
स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
कान खराब होने के शुरुआती संकेत
- आवाज धीमी सुनाई देना
- बार-बार “क्या?” पूछना
- कान में घंटी बजने जैसी आवाज (टिनिटस)
- चक्कर आना
- कान में दर्द या दबाव
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत जांच करवाना जरूरी है।
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सुनने की क्षमता बचाने के लिए जरूरी टिप्स
- तेज आवाज से दूरी रखें
- नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं
- संतुलित आहार लें, खासकर विटामिन और मिनरल से भरपूर भोजन
- कान में बिना सलाह के दवा न डालें
- बच्चों के कानों की विशेष देखभाल करें
हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें भी कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। तेज आवाज में संगीत सुनना, कान में नुकीली चीजें डालना या संक्रमण को नजरअंदाज करना सुनने की क्षमता को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है।कान की देखभाल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि एक बार सुनने की शक्ति कम हो जाए तो उसे पूरी तरह वापस पाना मुश्किल होता है। इसलिए अभी से सतर्क रहें और स्वस्थ आदतें अपनाएं।
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