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Worlds Largest EV: इलेक्ट्रिक कारों की रेस में BYD अव्वल, Tesla रह गई पीछे

Worlds Largest EV, दुनिया की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

Worlds Largest EV : दुनिया की सबसे बड़ी EV कंपनी बनी BYD, Tesla की बादशाहत खत्म

Worlds Largest EV, दुनिया की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी दिग्गज कंपनी टेस्ला (Tesla) को पीछे छोड़ते हुए चीन की ऑटोमोबाइल कंपनी BYD (Build Your Dreams) दुनिया की सबसे बड़ी EV निर्माता बन गई है। साल भर में BYD ने 22.60 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियां बेचकर नया रिकॉर्ड कायम किया है। यह उपलब्धि न सिर्फ चीन बल्कि पूरी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री के लिए अहम मानी जा रही है।

कैसे Tesla से आगे निकली BYD

अब तक इलेक्ट्रिक कारों की दुनिया में टेस्ला का दबदबा माना जाता था। एलन मस्क की कंपनी ने EV टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर और चार्जिंग नेटवर्क के दम पर बाजार में मजबूत पकड़ बनाई थी। लेकिन BYD ने अलग रणनीति अपनाई। कंपनी ने सस्ती EVs, बेहतर बैटरी टेक्नोलॉजी और बड़े पैमाने पर उत्पादन पर फोकस किया, जिससे वह तेजी से आगे बढ़ सकी। BYD की सबसे बड़ी ताकत उसकी वर्टिकल इंटीग्रेशन है। यानी कंपनी बैटरी से लेकर चिप्स और गाड़ियों के अहम पार्ट्स खुद बनाती है। इससे लागत कम होती है और सप्लाई चेन पर निर्भरता भी घटती है। वहीं टेस्ला को कई बार सप्लाई चेन और कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा।

22.60 लाख गाड़ियों की बिक्री का मतलब

BYD द्वारा एक साल में 22.60 लाख से ज्यादा गाड़ियों की बिक्री यह दिखाती है कि दुनिया भर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है। इसमें पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों के साथ-साथ प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल भी शामिल हैं, जो खासकर एशियाई और उभरते बाजारों में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

BYD के सेडान, SUV और इलेक्ट्रिक बसें न सिर्फ चीन में बल्कि यूरोप, लैटिन अमेरिका और एशिया के कई देशों में तेजी से बिक रही हैं। कंपनी का फोकस सिर्फ प्रीमियम सेगमेंट नहीं बल्कि मिड-रेंज और बजट EVs पर भी है, जिससे आम ग्राहकों तक इलेक्ट्रिक गाड़ियां पहुंच पा रही हैं।

बैटरी टेक्नोलॉजी में BYD की बढ़त

BYD की सफलता का एक बड़ा कारण उसकी Blade Battery टेक्नोलॉजी है। यह बैटरी ज्यादा सुरक्षित, लंबी उम्र वाली और किफायती मानी जाती है। बैटरी से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के बीच BYD की टेक्नोलॉजी को कई ग्लोबल एक्सपर्ट्स ने सराहा है। इसके अलावा BYD सिर्फ अपनी गाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरी कंपनियों को भी बैटरी सप्लाई करता है। इससे कंपनी की आय के स्रोत और मजबूत हो गए हैं।

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टेस्ला के लिए क्या मायने रखता है यह झटका

टेस्ला अभी भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में मजबूत खिलाड़ी है, लेकिन BYD की बढ़त ने यह साफ कर दिया है कि EV बाजार में मुकाबला अब कहीं ज्यादा कड़ा हो गया है। कीमतों में कटौती, नए मॉडल और टेक्नोलॉजी इनोवेशन के बावजूद टेस्ला को चीन जैसे बड़े बाजार में कड़ी चुनौती मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में टेस्ला को सस्ती EVs और नए मार्केट्स पर ज्यादा ध्यान देना होगा, ताकि वह अपनी लीड दोबारा मजबूत कर सके।

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भारत समेत उभरते बाजारों पर असर

BYD की यह सफलता भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए भी अहम संकेत देती है। भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है और सरकार भी EV को बढ़ावा दे रही है। अगर BYD भारत में बड़े पैमाने पर निवेश और लोकल मैन्युफैक्चरिंग करती है, तो यह घरेलू कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

भविष्य की EV रेस

दुनिया तेजी से ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की ओर बढ़ रही है। ऐसे में BYD और टेस्ला जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। आने वाले वर्षों में बैटरी रेंज, चार्जिंग स्पीड, कीमत और सेफ्टी जैसे फैक्टर्स इस रेस का फैसला करेंगे। Tesla को पछाड़कर BYD का दुनिया की सबसे बड़ी EV कंपनी बनना यह साबित करता है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। 22.60 लाख से ज्यादा गाड़ियों की सालाना बिक्री BYD की रणनीति, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल विस्तार का नतीजा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि EV की इस जंग में कौन सी कंपनी बाजी मारती है, लेकिन फिलहाल BYD ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि वह अब नंबर वन है।

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