Tata Electronics: भारत में तैयार होंगी Nexperia की चिप्स, Tata Electronics के साथ हुआ बड़ा करार
Tata Electronics, भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए सितंबर 2026 में एक और बड़ा डेवलपमेंट सामने आया है। डच सेमीकंडक्टर कंपनी Nexperia और Tata Electronics ने चिप मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, टेस्टिंग और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए रणनीतिक साझेदारी की है।
Tata Electronics और Nexperia की डील से बदलेगी भारत की चिप इंडस्ट्री, जानें क्या होगा फायदा
Tata Electronics, भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए सितंबर 2026 में एक और बड़ा डेवलपमेंट सामने आया है। डच सेमीकंडक्टर कंपनी Nexperia और Tata Electronics ने चिप मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, टेस्टिंग और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते के तहत Nexperia के कई पावर कंट्रोल चिप्स का निर्माण Tata Electronics की गुजरात के धोलेरा में बन रही सेमीकंडक्टर फैब में किया जाएगा। इसके अलावा चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग का काम असम के जागीरोड स्थित Tata Electronics की पैकेजिंग फैसिलिटी में किया जाएगा।
धोलेरा में बनेंगे Nexperia के पावर कंट्रोल चिप्स
इस साझेदारी का सबसे अहम हिस्सा गुजरात के धोलेरा में बन रही Tata Electronics की करीब 11 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर फैब है। यहां Nexperia के पावर कंट्रोल चिप्स के निर्माण की योजना है। ये चिप्स ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई सेक्टर्स में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की श्रेणी में आते हैं। Nexperia लंबे समय से ऐसे चिप्स बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वाहनों में किया जाता है।Tata Electronics की धोलेरा परियोजना भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का एक प्रमुख हिस्सा है। कंपनी ने इस फैब के लिए पहले ही Taiwan की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation यानी PSMC के साथ तकनीकी सहयोग किया है। इस फैब में पावर मैनेजमेंट IC, डिस्प्ले ड्राइवर, माइक्रोकंट्रोलर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग से जुड़े चिप्स के निर्माण की क्षमता विकसित की जा रही है।
असम में होगी चिप की असेंबली और टेस्टिंग
सिर्फ चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि इस साझेदारी में सेमीकंडक्टर की असेंबली और टेस्टिंग को भी भारत में करने की योजना है। इसके लिए Tata Electronics की असम के जागीरोड स्थित पैकेजिंग फैसिलिटी का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन के अलग-अलग चरणों को भारत में जोड़ने में मदद मिल सकती है।Tata Electronics असम में करीब 3 अरब डॉलर के निवेश से अपनी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग फैसिलिटी विकसित कर रही है। कंपनी ने इस प्लांट की एडवांस पैकेजिंग क्षमताओं को मजबूत करने के लिए Dutch कंपनी Besi के साथ भी रणनीतिक साझेदारी की है।
डील में सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग नहीं, टेक्नोलॉजी भी शामिल
Nexperia और Tata Electronics की साझेदारी केवल मौजूदा चिप्स बनाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां भविष्य की टेक्नोलॉजी के विकास और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए भी साथ काम करेंगी। आधिकारिक घोषणा के मुताबिक साझेदारी में wafer fabrication, semiconductor assembly and test, technology collaboration और ecosystem development जैसे क्षेत्र शामिल हैं।हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि इस साझेदारी के तहत सीधे तौर पर कितने निवेश या राजस्व का प्रावधान किया गया है। फिलहाल मुख्य फोकस भारत में मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग क्षमता विकसित करने पर है।
Nexperia के लिए क्यों महत्वपूर्ण है भारत?
Nexperia के लिए भी भारत में Tata Electronics के साथ साझेदारी रणनीतिक महत्व रखती है। कंपनी का अपने चीनी पैरेंट Wingtech के साथ विवाद पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। 2025 में Dutch सरकार ने Nexperia से जुड़ी स्थिति में हस्तक्षेप किया था। इसके बाद कंपनी के संचालन और सप्लाई चेन को लेकर तनाव बढ़ा था। चीन ने कुछ समय के लिए Dongguan में पैकेज किए गए Nexperia चिप्स के निर्यात पर रोक भी लगाई थी, जिससे ऑटो इंडस्ट्री की सप्लाई पर असर पड़ा था।ऐसे माहौल में भारत में उत्पादन और पैकेजिंग क्षमता विकसित करना Nexperia की सप्लाई चेन को अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि कंपनी के वैश्विक संचालन पर इस साझेदारी का अंतिम प्रभाव आने वाले वर्षों में ही स्पष्ट होगा।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को मिलेगा फायदा
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य केवल चिप डिजाइन करना नहीं, बल्कि wafer fabrication से लेकर packaging, testing, materials, equipment और skilled workforce तक पूरी वैल्यू चेन को भारत में विकसित करना है।Semicon India 2026 में Tata Electronics ने सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़ी कई रणनीतिक साझेदारियों का ऐलान किया। Nexperia के अलावा कंपनी ने Fujifilm, Besi और Semi-Conductor Laboratory जैसी संस्थाओं के साथ भी सहयोग की घोषणा की। इन साझेदारियों का उद्देश्य भारत में चिप निर्माण के लिए जरूरी सामग्री, पैकेजिंग, रिसर्च और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना है।Tata Electronics की धोलेरा और जागीरोड परियोजनाएं इस पूरी रणनीति में अहम भूमिका निभा रही हैं। कंपनी के मुताबिक धोलेरा में करीब 11 अरब डॉलर और जागीरोड में करीब 3 अरब डॉलर के निवेश से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग क्षमताएं विकसित की जा रही हैं।
ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए अहम कदम
पावर कंट्रोल चिप्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में बिजली के प्रवाह और नियंत्रण से जुड़े कामों में होता है। ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उपकरण, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में ऐसे सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की जरूरत होती है। Nexperia के साथ साझेदारी से भारत में इन चिप्स के उत्पादन की क्षमता बढ़ सकती है और भविष्य में घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए यहां से सप्लाई विकसित की जा सकती है।कुल मिलाकर, Nexperia और Tata Electronics की यह साझेदारी भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक सहयोग है। धोलेरा में चिप निर्माण और जागीरोड में असेंबली-टेस्टिंग को जोड़कर दोनों कंपनियां सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के कई हिस्सों को भारत में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। अब इस साझेदारी का अगला महत्वपूर्ण चरण उत्पादन शुरू होना और इन चिप्स की वास्तविक व्यावसायिक सप्लाई है।
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