New crisis in Delhi-NCR: यूरेनियम से दूषित पानी! दिल्ली-NCR में क्यों बढ़ रही चिंता?
New crisis in Delhi-NCR, दिल्ली में सुरक्षित सीमा से अधिक यूरेनियम मिलने की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ किडनी या हड्डियों को ही नहीं,
New crisis in Delhi-NCR : दिल्ली-NCR में पानी का नया खतरा, यूरेनियम की बढ़ती मात्रा से हड़कंप
New crisis in Delhi-NCR, दिल्ली में सुरक्षित सीमा से अधिक यूरेनियम मिलने की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ किडनी या हड्डियों को ही नहीं, बल्कि दिमाग़ और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। लंबे समय तक यूरेनियम से दूषित पानी पीने वाले लोगों में दिमाग़ी कार्यक्षमता घटने, नर्वस सिस्टम के कमजोर पड़ने और याददाश्त पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति धीरे-धीरे पूरे शहर को मानसिक और शारीरिक संकट की ओर धकेल रही है।
नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि यूरेनियम शरीर के नर्वस सिस्टम को सबसे पहले प्रभावित करता है। इसके कारण ब्रेन सिग्नलिंग बाधित होने लगती है, जिससे सोचने-समझने, ध्यान केंद्रित करने और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होने लगती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह समस्या बच्चों, छात्रों और बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक खतरनाक है क्योंकि इनकी मानसिक क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक संपर्क में रहने पर मानसिक थकान, चिंता, तनाव और भ्रम जैसी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ने की आशंका रहती है।
दिल्ली में भूजल की हालत बेहद खराब
केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की हालिया रिपोर्ट-2025 में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दिल्ली के 103 भूजल नमूनों में से लगभग 12.63% नमूनों में यूरेनियम सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक पाया गया। इसका मतलब है कि राजधानी में हर आठ में से एक भूजल स्रोत लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ज़िले हैं:
- उत्तरी दिल्ली
- उत्तर-पश्चिम दिल्ली
- पश्चिमी दिल्ली
- दक्षिण-पश्चिम दिल्ली
- रोहिणी क्षेत्र
- भलस्वा झील के आसपास
- नांगली राजपुरा क्षेत्र
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में इसका असर भयावह हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य संकट का ‘साइलेंट’ खतरा
एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. हर्षल आर. साल्वे ने इसे दिल्ली के लिए “साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी” बताया है। उनका कहना है कि पानी में मौजूद यूरेनियम न्यूरो-टॉक्सिसिटी पैदा करता है, यानी तंत्रिका ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। यह असर न केवल याददाश्त कमजोर करता है, बल्कि सीखने की क्षमता घटाता है और लगातार मूड डिसऑर्डर का कारण बनता है।
डॉ. साल्वे के अनुसार:
- दिमाग़ी कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त होती हैं
- तनाव और चिंता बढ़ती है
- अवसाद (डिप्रेशन) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है
पहले से ही वायु प्रदूषण से जूझती दिल्ली में यह नया खतरा मानसिक स्वास्थ्य पर दोहरी मार कर रहा है।
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नींद में खलल और मानसिक थकान में तेज़ बढ़ोतरी
एम्स पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. अनंत मोहन बताते हैं कि यूरेनियम सबसे पहले किडनी पर हमला करता है, लेकिन इसका सबसे गहरा प्रभाव ब्रेन फ़ंक्शन पर पड़ता है।
लंबे समय तक दूषित पानी पीने से:
- ब्रेन सेल्स की गति धीमी हो जाती है
- चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है
- नींद में गड़बड़ी होती है
- लगातार मानसिक थकान महसूस होती है
यह प्रभाव खासतौर पर स्कूली बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है, क्योंकि उनका दिमाग़ विकास की अवस्था में होता है।
दिल्ली में पेयजल की खपत और भूजल पर निर्भरता
दिल्ली में रोजाना लगभग 1,000 करोड़ लीटर पानी की खपत होती है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड (DJB) सिर्फ करीब 900 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध करा पाता है। इस कमी को पूरा करने के लिए 10–13% पानी भूजल से लिया जाता है। यही वह हिस्सा है जहाँ यूरेनियम का स्तर लगातार बढ़ रहा है, और यह अनदेखा जोखिम लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है।
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हैंडपंप-बोरवेल का पानी न पीने की सलाह
विशेषज्ञों ने स्पष्ट सलाह दी है कि जिन इलाकों में भूजल दूषित पाया गया है, वहाँ के लोग:
- हैंडपंप या बोरवेल का पानी सीधे न पीएँ
- आरओ आधारित वॉटर फिल्टर का उपयोग करें
- बच्चों को विशेष रूप से यह पानी न पिलाएँ
- सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी परीक्षण रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ें
साथ ही सरकार को भूजल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई है।
यूरेनियम: एक धीमा ज़हर, जो चुपचाप मारता है
यूरेनियम को विशेषज्ञ “धीमा जहर” और साइलेंट किलर कहते हैं क्योंकि यह शरीर में किसी शुरुआती लक्षण के बिना जमता जाता है और धीरे-धीरे:
- किडनी
- लीवर
- हड्डियाँ
- दिमाग़
सबको नुकसान पहुँचाता है।
इसके प्रभाव महीनों बाद दिखाई देने लगते हैं, इसलिए लोग यह समझ ही नहीं पाते कि बीमारियों की असल वजह क्या है।
भारत में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा
भारतीय मानकों के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर (30 PPB) है।
लेकिन दिल्ली के कई इलाकों में यह स्तर 59 PPB के करीब तक पहुँच गया, जो सुरक्षित मात्रा का लगभग दोगुना है।
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर के लिए यह गंभीर चेतावनी है कि पानी का प्रदूषण स्वास्थ्य संकट का बड़ा कारण बन चुका है।
यह संकट अभी थमने वाला नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या अगर जल्द नहीं रोकी गई तो आने वाले वर्षों में दिल्ली में मानसिक रोगों, न्यूरोलॉजिकल विकारों और क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा तेज़ी से बढ़ेगा। यूरेनियम प्रदूषण सिर्फ पानी का मसला नहीं, बल्कि लोगों के भविष्य और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।
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